यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और परीक्षा में सेंधमारी करने वाले माफियाओं के लिए बोर्ड ने पूरी तैयारी कर ली है. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आगामी भर्ती परीक्षा को लेकर एक ऐसा सख्त फरमान जारी किया है, जो हद से बाहर जाते ही पेपर लीक माफियाओं और नकलची गिरोहों पर भारी पड़ेंगे.
बोर्ड ने इस बार साफ कर दिया है कि अगर किसी ने भी परीक्षा में चालाकी करने की कोशिश की, तो सिर्फ जेल नहीं होगी, बल्कि सीधे तौर पर घर-बार सब कुर्क कर लिया जाएगा. आइए, इस पूरी गाइडलाइन और नए नियमों के बारे में जानिए
'सॉल्वर' बने तो संपत्ति होगी कुर्क!
यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड ने सॉल्वर गिरोहों को घुटने पर लाने के लिए सबसे तगड़ी चोट उनकी संपत्ति पर करने का फैसला किया है. बोर्ड के अनुसार अगर कोई भी आरोपी किसी अन्य अभ्यर्थी की जगह परीक्षा में 'सॉल्वर' बनकर बैठता हुआ पकड़ा गया, तो उस आरोपी की चल और अचल दोनों संपत्तियां कुर्क (जब्त) की जा सकती हैं.
इतना ही नहीं ऐसे मामलों में जो भी विवेचक (इन्वेस्टिगेटर) होगा, वह अपनी रिपोर्ट सीधे संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) को भेजेगा. इस रिपोर्ट के आधार पर ही आरोपी की संपत्ति जब्ती की पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा. वहीं अगर आप सोचते हैं कि परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र का एनालिसिस करना या उसे दोस्तों के साथ शेयर करना आम बात है, तो अपनी यह गलतफहमी तुरंत दूर कर लीजिए.
बोर्ड ने इस चर्चा और शेयरिंग पर पूरी रोक लगाई है. बोर्ड ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र या उससे जुड़े किसी भी कंटेंट पर सोशल मीडिया में चर्चा करना, उसका विश्लेषण करना, उसका प्रचार-प्रसार करना या उसे किसी के साथ भी शेयर करना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा.
बता दें कि 'यूपी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024' के तहत ऐसी सभी गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसलिए परीक्षा के बाद सोशल मीडिया बाजी बिल्कुल भारी पड़ सकती है.
पहली बार में 10 लाख, दूसरी बार में उम्रकैद!
इस नए कानून और बोर्ड की गाइडलाइन के तहत जो सजा और जुर्माने तय किए गए हैं, उसके अनुसार यदि कोई सॉल्वर गिरोह में पहली बार पकड़ा जाता है, तो उसे अधिकतम 7 वर्ष की जेल की सजा काटनी होगी और साथ ही 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी भरना पड़ेगा. अगर कोई बाज नहीं आता और दूसरी बार दोषी पाया जाता है, तो सजा सीधे आजीवन कारावास में बदल जाएगी और जुर्माना 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का लगाया जा सकता है. इसीलिए बोर्ड ने सभी ईमानदार अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा की गोपनीयता को पूरी तरह बनाए रखें और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या बहकावे से खुद को दूर रखें.
28 लाख अभ्यर्थी, 75 जिले और महापरीक्षा
यह उत्तर प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक होने जा रही है. आगामी 8 से 10 जून के बीच होने वाली इस सिपाही भर्ती परीक्षा में 32,679 पदों के लिए प्रदेश भर से 28 लाख से अधिक अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे. परीक्षा को पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 1183 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे.
आशीष श्रीवास्तव