सेकेंडों में ट्रेनें, 50 से कम AQI, ओवरटाइम का पैसा... भारतीय इंजीनियर ने बताया क्यों 'जन्नत' है जापान की लाइफ!

इंजीन‍ियर ने बताया कि कैसे जापान में रहने वाले कामकाजी पेशेवरों के लिए साफ हवा, सेकंड के हिसाब से चलने वाली ट्रेनें और उचित ओवरटाइम भुगतान जैसी सुविधाएं उनकी जीवनशैली को बेहतर बनाती हैं. भारत के मेट्रो शहरों के मुकाबले जापान में एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से नीचे रहता है, जिससे स्वास्थ्य लाभ होता है. वहां की ट्रेनें समय पर चलती हैं और सफर के दौरान अनुशासन बना रहता है.

Advertisement
आईटी प्रोफेशनल अंक‍ित पुरोहित ने शेयर क‍िए अनुभव (Photo Credit:Instagram) आईटी प्रोफेशनल अंक‍ित पुरोहित ने शेयर क‍िए अनुभव (Photo Credit:Instagram)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:35 AM IST

भारत के महानगरों में रहने वाले किसी भी कामकाजी प्रोफेशनल से पूछिए कि उसकी सबसे बड़ी रोजमर्रा की दिक्कतें क्या हैं? जवाब मिलेगा- घंटों लेट चलती ट्रेनें, खराब एक्यूआई के कारण घुटता हुआ दम और ऑफिस में बिना पैसों के देर तक घिसना. लेकिन सोचिए, अगर किसी को एक ऐसी जिंदगी मिले जहां हवा हमेशा कांच जैसी साफ हो, ट्रेनें सेकंड के हिसाब से चलती हों और ऑफिस में एक्स्ट्रा रुकने पर जेब में मोटा पैसा आता हो, तो क्या कोई उसे छोड़ना चाहेगा?

Advertisement

शायद यही वजह है कि 'उगते सूरज के देश' जापान में बसना आज दुनिया भर के प्रोफेशनल्स का एक बड़ा सपना बन चुका है. अपनी इसी शानदार और अनुशासित लाइफस्टाइल को लेकर आईआईएम काशीपुर के एलुमनस और आईटी प्रोफेशनल अंकित पुरोहित का एक वीडियो सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) पर इस समय जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने जापान में रहने के उन गजब के फायदों को गिनाया है जो अमूमन भारत में देखने को नहीं मिलते.

जिन्हें अंकित ने कहा 'नुकसान', असल में वही हैं वरदान!
पिछले 10 सालों से जापान में रह रहे अंकित पुरोहित ने अपने वीडियो में एक बेहद अनोखा और मजेदार अंदाज अपनाया. उन्होंने जापान की इन खूबियों को मजाकिया लहजे में 'कमियां' या 'ड्रॉबैक' कहकर पुकारा, लेकिन असल में उनका इशारा उन बेहतरीन सुविधाओं की तरफ था जो किसी भी इंसान के क्वाल‍िटी ऑफ लाइफ को सातवें आसमान पर पहुंचा देती हैं.

Advertisement

50 से नीचे रहता है AQI
अंकित के मुताबिक, भारत के मेट्रो शहरों के मुकाबले जापान की सबसे बड़ी ताकत वहां की शुद्ध हवा है. जहां हमारे यहां सर्दियों में एक्यूआई (AQI) 400 के पार चला जाता है, वहीं जापान के लोग पूरे दिन बिल्कुल साफ हवा में सांस लेते हैं. वहां एयर क्वालिटी इंडेक्स अमूमन 50 से भी नीचे बना रहता है, जिसे सेहत के लिए सबसे मुफीद माना जाता है.

घड़ी की सुई जैसी ट्रेनें और 'पिन-ड्रॉप साइलेंस'
भारत में जहां ट्रेन या मेट्रो का 5-10 मिनट लेट होना आम बात है, वहीं जापान का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम दुनिया के लिए एक मिसाल है. अंकित बताते हैं कि यहां ट्रेनें मिनट नहीं बल्कि सेकंड के हिसाब से चलती हैं, जिससे किसी के भी लेट होने की गुंजाइश न के बराबर होती है. इसके अलावा, वहां ट्रेनों का सफर बेहद शांतिपूर्ण होता है. लोग सफर के दौरान न तो फोन पर चिल्लाकर बात करते हैं, न ही बिना इयरफोन के गाने बजाते हैं. यह अनुशासन डेली ट्रेवल को बेहद आरामदायक बना देता है.

ओवरटाइम का मिलता है पूरा पैसा
कॉर्पोरेट लाइफ के सबसे बड़े दर्द यानी 'वर्क स्ट्रेस' को लेकर भी अंकित ने जापान की तारीफ की. उन्होंने बताया कि वहां का ऑफिस कल्चर कर्मचारियों पर बोझ नहीं बनता. सबसे बड़ी बात यह है कि किसी को भी बिना पैसों के एक्स्ट्रा काम (Unpaid Hours) करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता. अगर आप अपनी शिफ्ट के बाद काम कर रहे हैं या किसी छुट्टी के दिन ऑफिस आ रहे हैं, तो कंपनी आपको उसके बदले पूरा ओवरटाइम मुआवजा देती है.

Advertisement

वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर और सुरक्षा
अंकित ने वीडियो के आखिर में एक बहुत पते की बात कही कि जापान में नागरिक जो टैक्स सरकार को देते हैं, उसका सीधा असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में दिखता है. बेहतरीन और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं, मजबूत बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और महिलाओं व बच्चों के लिए कमाल की सुरक्षा व्यवस्था, ये सब चीजें मिलकर जापान को रहने के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन जगहों में से एक बनाती हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »