डीसा एयरबेस को पीएम मोदी ने क्यों बताया पश्चिमी सीमा का नया मजबूत किला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के डीसा एयर बेस को देश की पश्चिमी सीमा सुरक्षा का मेन सेंटर बताया है. पाकिस्तान सीमा से सिर्फ 130 किमी दूर स्थित यह बेस लंबे समय से फाइलों में दबा रहा था. मोदी सरकार में इसे तेजी से पूरा किया गया. अब यह भारतीय वायुसेना का फॉरवर्ड बेस बनकर कच्छ क्षेत्र और जामनगर रिफाइनरी की सुरक्षा मजबूत कर रहा है.

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डीसा एयरबेस गुजरात का पांचवां एयरबेस होगा जहां से पाक सीमा सिर्फ 130 किलोमीटर है. (Photo: ITG) डीसा एयरबेस गुजरात का पांचवां एयरबेस होगा जहां से पाक सीमा सिर्फ 130 किलोमीटर है. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:56 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात दौरे के दौरान डीसा एयर बेस को देश की पश्चिमी सीमा सुरक्षा का सबसे जरूरी केंद्र बताया. अक्टूबर 2022 में उन्होंने खुद इस एयर बेस का उद्घाटन किया था. मंगलवार को गुजरात में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा के लिए डीसा का स्थान बहुत खास है. 

यहां एयर बेस बनाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी था. लेकिन पहले दिल्ली में सत्ता में जो लोग थे, उन्हें गुजरात से बेवजह की नाराजगी थी. इस वजह से यह प्रोजेक्ट कई सालों तक फाइलों में दबा रहा. जब लोगों ने मुझे दिल्ली की जिम्मेदारी सौंपी तो मैंने उन फाइलों को निकाला और आज डीसा में विशाल एयर फोर्स बेस तैयार हो गया है.

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डीसा एयर बेस की सामरिक स्थिति क्या है?

डीसा एयर बेस राजस्थान और गुजरात की सीमा पर स्थित है. यह पाकिस्तान सीमा से सिर्फ 130 किलोमीटर दूर है. जोधपुर के बाद गुजरात में लंबे समय तक कोई एयर बेस नहीं था. नलिया, भुज और जोधपुर के बीच काफी बड़ा गैप था. डीसा को विकसित करके भारतीय वायुसेना को अब एक मजबूत फॉरवर्ड बेस मिल गया है.

यहां रडार, हेलीकॉप्टर यूनिट और निगरानी उपकरण तैनात किए जा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान भी यहां से ऑपरेट कर सकते हैं. पूरी तरह तैयार होने के बाद यह कच्छ की सुरक्षा के साथ जामनरग ऑयल रिफाइनरी जैसे बड़े संपत्तियों की भी सुरक्षा करेगा.

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यह एयर बेस की जरूरत तीन दशक पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने महसूस की थी. 2000 में भूमि आवंटन और इन-प्रिंसिपल मंजूरी भी मिल चुकी थी. लेकिन UPA सरकार के 14 साल के शासन में यह प्रोजेक्ट फाइलों में दबा रहा. सुरक्षा की दृष्टि से यह बेस बहुत जरूरी था, लेकिन पहले की सरकार ने इसे प्राथमिकता नहीं दी. 

2017  की बाढ़ ने कैसे तेज किया प्रोजेक्ट?

2017 में बनासकांठा जिले में भारी बाढ़ आई थी. प्रधानमंत्री मोदी और तब की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय वायुसेना से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने को कहा. लेकिन एयर हेडक्वार्टर में कोई पास का एयरफील्ड नहीं था. इस वजह से राहत कार्य में दिक्कत हुई. 

एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ के नेतृत्व में वायुसेना ने सरकार को रिपोर्ट दी. इसके बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1000 करोड़ रुपये के साथ एयर बेस को मंजूरी दिलाई. इस बाढ़ ने डीसा एयर बेस को वाकई तेजी दी. अक्टूबर 2022 में उद्घाटन के बाद डीसा एयर बेस को ऑपरेशनल बनाने का काम तेजी से चल रहा है.

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यह जल्द ही भारतीय वायुसेना का फॉरवर्ड बेस सपोर्ट यूनिट (FBSU) बन जाएगा. FBSU का मतलब है कि यहां से लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और निगरानी उपकरणों को सपोर्ट मिलेगा. बेस पर 4519 एकड़ जमीन है. अभी 22 किलोमीटर लंबी बाउंड्री वॉल और 20 वॉचटावर बन चुके हैं. यह बेस साउथ वेस्टर्न एयर कमांड के अधीन आएगा. गुजरात में यह पांचवां एयर बेस है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद डीसा की अहमियत और बढ़ गई

ऑपरेशन सिंदूर के बाद डीसा एयर बेस की जरूरत और भी ज्यादा महसूस की जा रही है. भारतीय सशस्त्र बल इस क्षेत्र में लगातार अभ्यास कर रहे हैं. पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं. डीसा से भारतीय विमान पाकिस्तान के हैदराबाद, कराची और सुक्कुर शहरों तक तेजी से गहरे हमले कर सकते हैं. 

यह बेस नलिया, भुज और फलोदी के बीच का रणनीतिक गैप भी भर देगा. अगर जरूरत पड़ी तो भारतीय लड़ाकू विमान मात्र दो मिनट में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर सकते हैं. डीसा पाकिस्तान के मीरपुर खास, हैदराबाद और शाहबाज F-16 एयर बेस से आने वाले विमानों के खिलाफ मजबूत दीवार बनेगा.

डीसा एयर बेस सिर्फ एक एयरफील्ड नहीं, बल्कि भारत की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा का नया मजबूत किला है. पीएम मोदी के नेतृत्व में फाइलों से निकलकर यह बेस अब फ्रंटलाइन पर आ चुका है. यह कच्छ क्षेत्र, जामनगर रिफाइनरी और पूरे गुजरात की सुरक्षा को और मजबूत करेगा. 

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