27 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले से सिर्फ एक दिन पहले, भारतीय झंडे वाला LPG टैंकर पाइन गैस UAE के रुवैस पोर्ट पर 45 हजार मीट्रिक टन LPG लोड कर रहा था. चीफ ऑफिसर सोहन लाल ने बताया कि 27 भारतीय क्रू सदस्यों को उम्मीद थी कि एक हफ्ते में घर पहुंच जाएंगे.
जंग शुरू होते ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया. ईरान ने माइन्स बिछा दिए और जहाजों की आवाजाही रोक दी. टैंकर को करीब 3 हफ्ते तक रुकना पड़ा. इस दौरान क्रू सदस्य हर रोज ऊपर उड़ते मिसाइल और ड्रोन देखते रहे.
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11 मार्च को भारतीय अधिकारियों ने क्रू को तैयार रहने को कहा था, लेकिन जंग तेज होने के कारण 23 मार्च तक इंतजार करना पड़ा. तब ईरान ने टैंकर को सामान्य होर्मुज लेन से नहीं, बल्कि एक अनोखे और संकरे चैनल से जाने की अनुमति दी. यह रूट ईरान के तट के पास लारक द्वीप के उत्तर में था, जो आमतौर पर किसी भी जहाज द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जाता.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने टैंकर को यह रूट सुझाया क्योंकि सामान्य रास्ता पूरी तरह माइन्स से भरा हुआ था. भारतीय अधिकारियों और मालिक कंपनी (मुंबई की सेवन आइलैंड्स शिपिंग) ने फैसला लिया कि सिर्फ तभी आगे बढ़ेंगे जब हर क्रू सदस्य इस रूट पर हां कहे.
सभी क्रू ने दी सहमति, IRGC ने नहीं किया बोर्डिंग
चीफ ऑफिसर सोहन लाल ने बताया कि IRGC ने हर क्रू सदस्य से व्यक्तिगत हां या ना मांगा. सभी 27 भारतीय क्रू सदस्यों ने एकमत से हां कहा. टैंकर ने ईरान के क्षेत्रीय पानी से गुजरते हुए लारक और क़ेश्म द्वीपों के बीच से रास्ता बनाया. यह रूट सामान्य से ज्यादा लंबा और घुमावदार था, लेकिन माइन्स और हमलों से बचने के लिए सबसे सुरक्षित था.
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IRGC ने टैंकर पर कभी बोर्डिंग नहीं की. कोई फीस भी नहीं ली. भारतीय नौसेना ने पूरे ट्रांजिट के दौरान टैंकर को गाइड किया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने के बाद चार भारतीय युद्धपोतों ने लगभग 20 घंटे तक गल्फ ऑफ ओमान से अरब सागर तक एस्कॉर्ट किया.
विदेश मंत्रालय के अनुसार अब भी 18 भारतीय झंडे वाले जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इनमें लगभग 458 भारतीय नाविक हैं. इनमें से 6 जहाज (ज्यादातर LPG ले जा रहे) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित पार कर चुके हैं. ईरान ने दोस्त देशों - भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को विशेष अनुमति दे रखी है.
भारतीय नौसेना ने पुष्टि की कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने के बाद वह भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा करती है. नौसेना गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर में कई सालों से भारतीय और अन्य जहाजों की सुरक्षा के लिए मौजूद है.
LPG संकट और भारत पर असर
भारत LPG का बहुत बड़ा आयातक है. देश के करोड़ों घर रसोई के लिए LPG पर निर्भर हैं. पाइन गैस मूल रूप से मंगलौर पोर्ट पर गैस को उतारने वाला था, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने निर्देश दिया कि LPG को दो बराबर हिस्सों में पूर्वी पोर्ट - विशाखापट्टनम और हल्दिया - पर उतारा जाए.
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यह घटना दिखाती है कि जंग के बावजूद भारत अपने जहाजों और क्रू की सुरक्षा के लिए राजनयिक और नौसैनिक स्तर पर सक्रिय है. LPG की समय पर सप्लाई घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता के लिए बहुत जरूरी है. पाइन गैस टैंकर की अनोखी यात्रा एक सफल उदाहरण है, लेकिन 18 जहाज अभी भी खाड़ी में हैं.
ईरान, अमेरिका और इजरायल जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट बना हुआ है. भारत सरकार ईरान और अन्य देशों से लगातार बातचीत कर रही है ताकि बाकी जहाज भी सुरक्षित निकल सकें. भारतीय LPG टैंकर ने सामान्य रास्ते की बजाय अनोखे रूट और भारतीय नौसेना की मदद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बच निकलने का कमाल दिखाया.
ऋचीक मिश्रा