T-90 टैंक होंगे और घातक... तैनात होगी INVAR एंटी-टैंक मिसाइल, डील डन

रक्षा मंत्रालय ने बीडीएल के साथ 2,095.70 करोड़ का अनुबंध साइन किया. 'बाय (इंडियन)' के तहत इनवार एंटी-टैंक मिसाइलें खरीदी जाएंगी. ये लेजर-गाइडेड मिसाइलें टी-90 टैंकों की ताकत बढ़ाएंगी. दुश्मन के खिलाफ बड़ा फायदा मिलेगा. आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम.

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ये है इनवार एंटी-टैंक मिसाइल. (Photo: Wikipedia) ये है इनवार एंटी-टैंक मिसाइल. (Photo: Wikipedia)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 13 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 7:13 PM IST

रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के साथ एक महत्वपूर्ण डील किया. यह सौदा इनवार एंटी-टैंक मिसाइलों की खरीद के लिए है. कुल लागत 2,095.70 करोड़ रुपये है. यह अनुबंध 'बाय (इंडियन)' श्रेणी के तहत हुआ है. साउथ ब्लॉक नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए.

अनुबंध की मुख्य बातें

'बाय (इंडियन)' का मतलब है कि यह पूरी तरह भारतीय उत्पादन पर आधारित है. इससे देश की अपनी क्षमता मजबूत होगी. इनवार मिसाइलें टी-90 टैंकों के लिए हैं. टी-90 भारतीय सेना के आर्मर्ड रेजिमेंट्स का मुख्य टैंक है. ये मिसाइलें टैंक की फायर पावर को बढ़ाएंगी.

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इनवार मिसाइल: दुश्मन के लिए खतरा

इनवार एक उन्नत लेजर-गाइडेड एंटी-टैंक मिसाइल है. इसकी हिट प्रॉबेबिलिटी बहुत ज्यादा है, यानी निशाना कभी चूकेगा नहीं. यह मिसाइल मैकेनाइज्ड ऑपरेशंस को बदल देगी. दुश्मन के खिलाफ बड़ा फायदा मिलेगा. सैनिक अब ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीके से लड़ सकेंगे. यह हथियार सिस्टम दुश्मन के टैंकों को दूर से ही नष्ट कर सकता है.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

यह खरीद सरकार की कोशिशों को दिखाती है. सरकार भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स की मौजूदा विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर रही है. साथ ही, घरेलू उद्योगों द्वारा नई तकनीकों का विकास हो रहा है. इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) हासिल होगी. बीडीएल जैसी कंपनियां अब महत्वपूर्ण हथियार बना रही हैं, जो आयात पर निर्भरता कम करेगी.

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सेना की ताकत में इजाफा

भारतीय सेना के आर्मर्ड रेजिमेंट्स टी-90 टैंकों पर बहुत भरोसा करते हैं. ये टैंक रेगिस्तान से पहाड़ों तक हर इलाके में काम आते हैं. इनवार मिसाइलें इन्हें और घातक बनाएंगी. विशेषज्ञों का कहना है कि यह अनुबंध सीमा पर तैनात सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाएगा. दुश्मन की कोई चाल कामयाब नहीं होगी. 

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