पाकिस्तान के करीब 13 हजार सैनिक और 10 से 18 लड़ाकू विमान सऊदी अरब पहुंच गए हैं. सऊदी सरकार ने खुद 11 अप्रैल को ऐलान किया कि पाकिस्तानी सैनिक किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पहुंचे हैं. साथ में पाकिस्तान एयर फोर्स के विमान भी आए हैं.
यह सब पिछले साल सितंबर 2025 में साइन किए गए स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट का हिस्सा है. इस समझौते में साफ लिखा है कि किसी एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा. अब सवाल यह है कि क्या ये सैनिक ईरान के खिलाफ लड़ाई के लिए गए हैं?
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान की सेना का एक बड़ा दल पूर्वी सेक्टर के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर उतरा. इसमें लगभग 13 हजार सैनिक हैं. पहले से ही सऊदी में करीब 10 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात थे. अब नए सैनिकों के साथ कुल संख्या और बढ़ गई है.
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पाकिस्तान ने 10 से 18 फाइटर जेट और सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी भेजे हैं. पाकिस्तान सरकार के अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है. इसका मकसद है कि दोनों देशों की सेनाएं बेहतर तरीके से साथ काम कर सकें और इलाके में सुरक्षा मजबूत हो.
पाकिस्तान-सऊदी रिश्ते का पुराना इतिहास
पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते बहुत पुराने और मजबूत हैं. पाकिस्तान पहले भी सऊदी को सैन्य मदद दे चुका है. 1991 के गल्फ वॉर में भी पाकिस्तान ने सैनिक भेजे थे. अब 2025 का यह नया डिफेंस पैक्ट दोनों देशों को और करीब लाया है.
इस पैक्ट में दोनों देशों ने वादा किया है कि अगर किसी एक पर हमला हुआ तो दूसरे को भी अपना दुश्मन मानेंगे. सऊदी अरब को हमेशा ईरान से खतरा महसूस होता रहा है. दोनों देशों के बीच पुरानी दुश्मनी है. ईरान शिया बहुल देश है जबकि सऊदी सुन्नी बहुल. दोनों में ताकत का झगड़ा चलता रहता है. ऐसे में पाकिस्तान सऊदी का पुराना दोस्त बनकर खड़ा होता है.
इन दिनों पश्चिम एशिया में तनाव बहुत ज्यादा है. मार्च में ईरान के भूमिगत एयर बेस पर हमला हुआ था. उसके बाद अमेरिका-ईरान के बीच शांति बातचीत चल रही थी. पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में इन बातचीत की मेजबानी की लेकिन बातें विफल हो गईं. ठीक उसी समय पाकिस्तानी सैनिक सऊदी पहुंच गए.
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कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि हाल ही में ईरान ने सऊदी के ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए थे जिनमें एक सऊदी नागरिक भी मारा गया. ऐसे में सऊदी को अपनी सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत पड़ी. पाकिस्तान का यह कदम सऊदी को भरोसा दिलाने वाला है. हालांकि दोनों देशों ने साफ कहा है कि यह तैनाती किसी हमले के लिए नहीं बल्कि बचाव और सहयोग के लिए है.
क्या ये सैनिक ईरान से वॉर लड़ेंगे?
यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर किसी के मन में है. अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि पाकिस्तानी सैनिक सीधे ईरान पर हमला करेंगे. पाकिस्तान ने हमेशा कहा है कि वह मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है. लेकिन डिफेंस पैक्ट की वजह से ईरान ने सऊदी पर हमला किया तो पाकिस्तान को सऊदी की मदद करनी पड़ेगी.
यानी अगर युद्ध छिड़ा तो पाकिस्तानी सैनिक और विमान सऊदी की तरफ से लड़ सकते हैं. कुछ लोग इसे पाकिस्तान का दोहरा खेल बता रहे हैं क्योंकि वह शांति बातचीत करवा रहा था और उसी बीच सैनिक भेज रहा था. पाकिस्तान के लिए सऊदी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता है.
यह तैनाती पूरे इलाके में तनाव बढ़ा सकती है. ईरान इसे दुश्मनी का संकेत मान सकता है. पाकिस्तान-ईरान के रिश्ते भी अच्छे नहीं रहे हैं. अगर सऊदी पर कोई हमला हुआ तो पाकिस्तान खुद भी खतरे में पड़ सकता है क्योंकि ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन हैं. दूसरी तरफ सऊदी को मजबूत समर्थन मिल गया है.
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अमेरिका और इजरायल भी इस इलाके में सक्रिय हैं. ऐसे में पाकिस्तान का यह कदम बड़े खेल का हिस्सा लगता है. पाकिस्तान सरकार ने अभी तक कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है. अभी स्थिति साफ नहीं है. अगर ईरान और सऊदी के बीच शांति हो गई तो ये सैनिक सिर्फ ट्रेनिंग और सहयोग के लिए रहेंगे. लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो ये सैनिक लड़ाई में शामिल हो सकते हैं.
पाकिस्तान के लिए यह फैसला आसान नहीं है क्योंकि वह ईरान के साथ भी सीमा साझा करता है. दुनिया भर के विशेषज्ञ इस तैनाती को देख रहे हैं. फिलहाल दोनों देश कह रहे हैं कि यह डिफेंस समझौते का पहला कदम है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही है – क्या ये 13 हजार सैनिक ईरान से वॉर लड़ेंगे?
ऋचीक मिश्रा