पाकिस्तान का फाइटर जेट JF-17 थंडर... ब्लंडर या PR वंडर, बढ़ती मांग पर उठ रहे सवाल

JF-17 थंडर की निर्यात सफलता की खबरें रॉयटर्स से लगातार आ रही हैं, लेकिन सभी सूत्रों पर आधारित हैं. लीबिया सहित कई देशों से बड़े सौदों की बात है. पर पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं. दो दशक पुराना जेट अचानक हिट कैसे? ये सिर्फ हाइप, हकीकत नहीं.

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ये है पाकिस्तान का फाइटर जेट जेएफ-17 थंडर. (File Photo: PAF) ये है पाकिस्तान का फाइटर जेट जेएफ-17 थंडर. (File Photo: PAF)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:12 AM IST

पिछले कुछ महीनों से लगातार खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान और चीन द्वारा मिलकर बनाया गया JF-17 थंडर लड़ाकू जेट अचानक दुनिया भर में बहुत लोकप्रिय हो रहा है. कहा जा रहा है कि लीबिया के साथ तो बड़ा सौदा हो ही चुका है. सऊदी अरब, सूडान, बांग्लादेश व इंडोनेशिया के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है. अगर ये सभी सौदे हो जाएं तो पाकिस्तान को 10 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हो सकती है.

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लेकिन इन सारी खबरों को ध्यान से देखें तो एक सवाल बार-बार उठता है: क्या ये वाकई इतनी बड़ी कामयाबी है, या सिर्फ़ प्रचार और हाइप?

JF-17 थंडर की पुरानी कहानी

JF-17 थंडर को पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया है. इसकी पहली उड़ान 2003 में हुई थी. 2010 तक यह पाकिस्तान वायुसेना में शामिल हो गया था. लगभग दो दशक बीत जाने के बावजूद इसका निर्यात बहुत सीमित रहा.

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अब तक सिर्फ तीन ग्राहक ही हैं...

  • म्यांमार- 2015 में 16 जेट खरीदे, लेकिन रखरखाव की गंभीर समस्याओं के कारण कई बार ग्राउंडेड रहे.
  • नाइजीरिया - 2016 में सिर्फ 3 जेट खरीदे. उसके बाद और नहीं खरीदे. बाद में इटली के M-346FA जेट चुने. 
  • अजरबैजान- 2025 में 40 जेटों का सौदा, लगभग 4.6 अरब डॉलर का; यह सौदा दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से घोषित किया गया.

दिलचस्प बात यह है कि चीन खुद, जो इस जेट का सह-निर्माता है, अपनी वायुसेना में एक भी JF-17 नहीं इस्तेमाल करता.

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2025 के बाद अचानक बूम?

2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग हुआ था. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके जेटों ने कई भारतीय विमान (यहां तक कि राफेल भी) मार गिराए. इन दावों में JF-17 और चीनी J-10CE को श्रेय दिया गया. हालांकि भारत ने इन दावों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया बताया. 

इस संघर्ष के बाद से JF-17 की चर्चा ज्यादा होने लगी, लेकिन J-10CE को लेकर अभी तक कोई एक्सपोर्ट डील नहीं हुई है. फिर भी दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच अचानक कई खबरें आईं कि JF-17 की मांग बहुत बढ़ गई है.

सभी बड़ी खबरें एक ही जगह से

ये सभी नई खबरें एक ही न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से आईं. खास बातें...

पांच में से तीन खबरें एक्सक्लूसिव थीं. पांच में से चार खबरों का बायलाइन एक ही पत्रकार का था: साद सईद (Saad Sayeed). सभी खबरें उच्च पदस्थ अनाम सूत्रों (highly-placed anonymous sources) पर आधारित थीं. इनमें से किसी भी सौदे की पाकिस्तान की सेना या ISPR (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

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कुछ उदाहरण... 

  • लीबिया सौदा (22 दिसंबर 2025): 16 जेटों की डील पूरी होने की खबर. चार पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के हवाले से, जिनके नाम नहीं बताए गए. लीबिया के LNA ने सिर्फ रक्षा सौदा होने की पुष्टि की. जेट का जिक्र नहीं. सबसे बड़ी बात- लीबिया पर अब भी संयुक्त राष्ट्र का हथियार एम्बार्गो लगा हुआ है. पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं. 
  • सऊदी अरब (8 जनवरी 2026): 2 अरब डॉलर के कर्ज़ को JF-17 सौदे में बदलने की बातचीत. दो अनाम सूत्रों के हवाले से.
  • सूडान (9 जनवरी 2026): 1.5 अरब डॉलर का हथियार-जेट सौदा अंतिम चरण में. एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी और तीन अनाम सूत्र.
  • इंडोनेशिया (12 जनवरी 2026): 40 से ज्यादा JF-17 और ड्रोन की बातचीत. तीन सुरक्षा अधिकारियों (अनाम) के हवाले से. लेकिन इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने सिर्फ सामान्य रक्षा सहयोग की बात कही- जेट या ड्रोन का कोई ज़िक्र नहीं. बाद में इंडोनेशिया ने ये डील खत्म कर दिया.

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जो सवाल उठाता है

सभी खबरों में मुख्य जानकारी अनाम सूत्रों से. सेवानिवृत्त पाकिस्तानी अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से ब्रीफ किया गया बताया गया, जो संवेदनशील बातचीत की जानकारी दे रहे हैं. एक खबर दूसरी पुरानी रॉयटर्स खबरों का हवाला देकर खुद को मजबूत दिखाती है. यानी सेल्फ-रेफरेंसिंग. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान भी दिया गया कि JF-17 की बिक्री से पाक को IMF लोन की जरूरत नहीं पड़ेगी. 

सवाल क्यों उठ रहे हैं?

  • इतने बड़े सौदों की कोई आधिकारिक घोषणा क्यों नहीं?
  • अनाम सूत्रों पर आधारित लगातार एक्सक्लूसिव खबरें एक ही पत्रकार से- क्या ये सूत्र वाकई स्वतंत्र हैं या कोई सुनियोजित अभियान?
  • लीबिया जैसे देश पर हथियार एम्बार्गो होने के बावजूद सौदा कैसे संभव?
  • क्या ये खबरें पाकिस्तान की रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने और आर्थिक संकट से ध्यान हटाने का तरीका हैं?

JF-17 थंडर एक चौथी पीढ़ी का लड़ाकू जेट है. अजरबैजान जैसे सौदे से इसकी क्षमता साबित भी हुई है. लेकिन हाल की ये सारी खबरें जब तक आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो जातीं. इन्हें सावधानी से देखना चाहिए. अनाम सूत्रों की लगातार खबरें निश्चित रूप से हाइप और मार्केटिंग का हिस्सा लगती हैं.

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