DRDO पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में दिखाएगा भारत की हाइपसोनिक मिसाइल

DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई जाएगी. इसकी रेंज 1500 किमी है. हाइपरसोनिक स्पीड से दुश्मन रडार इसे पकड़ नहीं पाते. भारतीय नौसेना के लिए बन रही यह मिसाइल हिंद महासागर में समुद्री हमले की क्षमता बढ़ाएगी. भविष्य में रेंज 3000-3500 किमी तक होगी.

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गणतंत्र दिवस पर यही हाइपरसोनिक मिसाइल परेड में दिखाई जाएगी. (Photo: DRDO) गणतंत्र दिवस पर यही हाइपरसोनिक मिसाइल परेड में दिखाई जाएगी. (Photo: DRDO)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत दुनिया को अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमता का नया प्रमाण दिखाएगा. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार परेड में प्रदर्शित होगी. 

यह मिसाइल भारतीय नौसेना के लिए बनाई जा रही है. हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री हमले की क्षमता को बहुत मजबूत करेगी. DRDO के मिसाइल डायरेक्टर जनरल राजा बाबू और प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए प्रसाद गौड़ ने बताया कि यह मिसाइल हाइपरसोनिक है, जिससे दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाते.

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LRAShM मिसाइल की मुख्य खासियतें

  • रेंज: लगभग 1500 किलोमीटर 
  • स्पीड: हाइपरसोनिक (मैक 8-10 तक) — यह दुश्मन जहाजों को 15 मिनट से कम समय में नष्ट कर सकती है.
  • प्रकार: हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) — रॉकेट से ऊपर जाती है, फिर ग्लाइड करके अनियमित रास्ते से लक्ष्य तक पहुंचती है. इससे इसे रोकना बहुत मुश्किल होता है.
  • पेलोड: विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जा सकती है. दुश्मन के युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर को नष्ट करने में सक्षम.
  • उद्देश्य: मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के लिए एंटी-शिप रोल में, लेकिन भविष्य में लैंड-अटैक वर्जन भी संभव.
  • विकास: DRDO के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स, हैदराबाद में बन रही है. हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है.

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क्यों है यह मिसाइल महत्वपूर्ण?

यह मिसाइल दुश्मन के रडार से बचकर तेजी से हमला करती है. हाइपरसोनिक स्पीड के कारण दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है. यह भारत को हिंद महासागर में मजबूत स्थिति देगी, खासकर चीन की बढ़ती नौसेना के खिलाफ. DRDO का लक्ष्य है कि भविष्य में इसकी रेंज 3000-3500 किलोमीटर तक बढ़ाई जाए.

गणतंत्र दिवस परेड में क्या दिखेगा?

LRAShM का मॉडल या लॉन्चर पहली बार कार्तव्य पथ पर दिखेगा. परेड में अन्य स्वदेशी हथियार जैसे धनुष गन सिस्टम, आकाश मिसाइल, सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर आदि भी होंगे. यह प्रदर्शन भारत की उन्नत रक्षा तकनीक और समुद्री सुरक्षा की प्रतिबद्धता दिखाएगा.

DRDO के वैज्ञानिकों का कहना है कि हाइपरसोनिक मिसाइलें भारत का भविष्य हैं. यह मिसाइल दुनिया की चुनिंदा देशों (जैसे रूस, चीन, अमेरिका) की सूची में भारत को शामिल करेगी. 26 जनवरी को यह परेड न सिर्फ उत्सव होगी, बल्कि भारत की रक्षा शक्ति का मजबूत संदेश भी देगी.

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