गणतंत्र दिवस पर स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन से होगी 21 तोपों की सलामी

इस साल गणतंत्र दिवस पर पहली बार स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी होगी. ये तोपें ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान स्थित आतंकी कैंपों के खिलाफ सफल रहीं थीं. 8 गन 52 सेकंड में 21 गोले दागेंगी. यह ब्रिटिश 25-पाउंडर गनों की जगह ले रही हैं, जो मेक इन इंडिया की मिसाल है.

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दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर इसी तोप से दी जाएगी सलामी. (Photo: PTI) दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर इसी तोप से दी जाएगी सलामी. (Photo: PTI)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:09 PM IST

इस साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत की स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन (LFG) पहली बार 21 तोपों की सलामी फायर करेगी. यह परंपरा राष्ट्रीय महत्व के सबसे पवित्र अवसरों पर दिया जाने वाला सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है. ये स्वदेशी तोपें ऑपरेशन सिंदूर में अपनी ताकत साबित कर चुकी हैं, जहां उन्होंने पाकिस्तान स्थित आतंकी कैंपों के खिलाफ कारगर भूमिका निभाई.

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ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में हुआ था, जब पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. यह चार दिनों का संक्षिप्त संघर्ष था, जिसमें भारतीय सेना की तोपखाने और अन्य हथियारों ने शानदार प्रदर्शन किया. इस ऑपरेशन की सफलता के बाद अब गणतंत्र दिवस पर ये तोपें देश की आत्मनिर्भरता और सैन्य शक्ति का प्रतीक बनकर सामने आएंगी.

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105mm लाइट फील्ड गन की खासियतें

  • यह भारत की पहली स्वदेशी तोप है, जिसकी रेंज 17.2 किलोमीटर है.
  • यह प्रति मिनट 6 राउंड तक फायर कर सकती है.
  • इसे ऑर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड ने 1982 में विकसित किया था. तब से इसके विभिन्न संस्करण सीमाओं पर तैनात हैं.
  • यह पुरानी भारतीय फील्ड गन का अपग्रेडेड वर्जन है. पुरानी गन से लगभग 1000 किलोग्राम हल्की है, जिससे इसे आसानी से ले जाया जा सकता है.
  • पहले 21-गन सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25-पाउंडर गन इस्तेमाल होती थीं, लेकिन अब इन्हें पूरी तरह स्वदेशी 105mm LFG से बदल दिया गया है. 

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21-गन सलामी का आयोजन कैसे होगा?

  • 8 लाइट फील्ड गन का एक विशेष बैटरी (सेरेमोनियल बैटरी) इस्तेमाल होगा.
  • ये गन 52 सेकंड में ठीक 21 गोले दागेंगी.
  • फायरिंग राष्ट्रगान बजने के साथ शुरू होगी. गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत के साथ तालमेल में होगी.
  • इसमें बेहद सटीकता और समन्वय की जरूरत होती है — कोई गलती नहीं होनी चाहिए.
  • भारतीय सेना की सेरेमोनियल बैटरी ने कई दिनों तक इस ड्रिल की प्रैक्टिस की है. हाल ही में दिल्ली में पहले फायरिंग ट्रायल्स भी सफल रहे.

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यह साल का गणतंत्र दिवस इसलिए खास है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पहला बड़ा राष्ट्रीय उत्सव है. परेड में भी स्वदेशी हथियार जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ATAGS तोप और अर्जुन टैंक दिखाए जाएंगे. सेना के नए 'भैरव' कमांडो और अन्य यूनिट्स भी हिस्सा लेंगी.

प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह परेड आधुनिक युद्ध की कहानी बयान करेगी. स्वदेशी 105mm LFG की यह सलामी न सिर्फ सेना की ताकत दिखाएगी, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और सीमाओं की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता भी जाहिर करेगी.

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