ट्रंप की राह पर आसिम मुनीर... ईरान में पीसमेकर-अफगानिस्तान में अटैकर

आसिम मुनीर ट्रंप की राह पर चल रहे हैं. ईरान के साथ वे पीसमेकर बनकर शांति की बात कर रहे हैं, वहीं अफगानिस्तान पर सख्त हमलावर रुख अपनाए हुए हैं. पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवाद और पुरानी गलतियों के बावजूद मुनीर दोहरी नीति चला रहे हैं, जो पाकिस्तान के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है.

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आसिम मुनीर पूरी तरह से डोनाल्ड ट्रंप की राह पर चल रहे हैं. जिससे पूरी दुनिया में उनकी फजीहत हो रही है. (File Photo: PTI) आसिम मुनीर पूरी तरह से डोनाल्ड ट्रंप की राह पर चल रहे हैं. जिससे पूरी दुनिया में उनकी फजीहत हो रही है. (File Photo: PTI)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:35 AM IST

पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इन दिनों दो अलग-अलग रास्ते दिखा रहे हैं. एक तरफ वे ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में शांति बनाने वाले (Peacemaker) की भूमिका निभा रहे हैं. वे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ अच्छे संबंध रखते हुए ईरान के नेताओं से मिल रहे हैं. सीजफायर की कोशिश कर रहे हैं.

दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ वे सख्त और हमलावर (Attacker) रुख अपनाए हुए हैं. वे अफगान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान/टीटीपी को शरण देने का आरोप लगाते हैं. पाकिस्तान की सेना अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले कर रही है. 

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यह दोहरा रवैया कई लोगों को ट्रंप की विदेश नीति की याद दिलाता है. ट्रंप भी कुछ देशों के साथ डील करके शांति की बात करते थे तो कुछ पर सख्ती दिखाते थे. मुनीर को ट्रंप अपना फेवरेट फील्ड मार्शल कहते हैं. लेकिन आलोचक कहते हैं कि मुनीर की यह नीति पाकिस्तान के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. 

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ईरान में पीसमेकर की भूमिका

अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था. युद्ध की स्थिति बन गई थी. इस बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अचानक डिप्लोमेसी की कमान संभाल ली. उन्होंने तेहरान जाकर ईरानी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और सैन्य नेताओं से मुलाकात की. मुनीर ने डायलॉग, डी-एस्केलेशन और शांतिपूर्ण समाधान की बात की. 

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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मुनीर को खुलकर सपोर्ट किया. ट्रंप ने उन्हें फैंटास्टिक और मेरा फेवरेट फील्ड मार्शल कहा. मुनीर ने ट्रंप के मैसेज ईरान तक पहुंचाए और सीजफायर की कोशिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भी दोनों पक्षों की बैठक कराई. 

यह पाकिस्तान की डिप्लोमेसी की बड़ी जीत मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर पाकिस्तान को मध्य पूर्व में इतना महत्व नहीं दिया जाता. मुनीर ने अपनी ट्रंप से निकटता का फायदा उठाया. खुद को ग्लोबल पीसमेकर के रूप में पेश किया. लेकिन ईरान के कुछ नेता शक करते हैं कि मुनीर अमेरिका के ज्यादा करीब हैं. पाकिस्तान की मध्यस्थता एकतरफा हो सकती है.

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अफगानिस्तान में अटैकर का रुख

दूसरी ओर अफगानिस्तान के साथ मुनीर का रवैया बिल्कुल अलग है. पाकिस्तान में टीटीपी के हमले लगातार बढ़ रहे हैं. 2025 में पाकिस्तान का सबसे खतरनाक साल रहा. सैकड़ों सैनिक और आम लोग मारे गए. मुनीर अफगान तालिबान पर आरोप लगाते हैं कि वे टीटीपी को शरण दे रहे हैं और पाकिस्तान में हमले करवा रहे हैं. 

उन्होंने साफ कहा कि टीटीपी के ज्यादातर हमलावर अफगान नागरिक हैं. मुनीर ने तालिबान से कहा कि पाकिस्तान या टीटीपी, एक चुनो. 2025 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर प्रिसीजन एयर स्ट्राइक्स किए. इन हमलों में काबुल और कंधार जैसे इलाकों को निशाना बनाया गया. इससे दोनों देशों के बीच खुला संघर्ष शुरू हो गया. 

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2025-26 में सीमा पर तनाव बढ़ा. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से आने वाले आतंकियों के खिलाफ सख्त ऑपरेशन चलाए. मुनीर ने कहा कि अफगानिस्तान से आने वाला आतंकवाद पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.

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मुनीर की पुरानी और नई गलतियां

आसिम मुनीर के कार्यकाल में कई गलतियां सामने आई हैं. 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद बहुत बढ़ा. टीटीपी और बलोच विद्रोही सक्रिय हो गए. जाफर एक्सप्रेस ट्रेन हाईजैक जैसी बड़ी घटनाएं हुईं. आर्मी को कई जगहों पर पीछे हटना पड़ा. मुनीर की खुफिया एजेंसियां (ISI) इन हमलों की पहले से भनक नहीं ले पाईं – इसे इंटेलिजेंस फेलियर कहा गया.

2025 में अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों के बाद भी टीटीपी के हमले रुके नहीं. बल्कि तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंध और खराब हो गए. पाकिस्तान में 2025 सबसे घातक साल साबित हुआ, जहां लड़ाई में हजारों लोग मारे गए. 

पुरानी गलतियों में शामिल है - भारत के साथ तनाव के समय गलत अनुमान लगाना. मई 2025 में भारत की ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर ने डिवाइन हेल्प (ईश्वरीय मदद) का दावा किया, जिस पर काफी मजाक उड़ा. आर्मी के अंदर भी असंतोष की खबरें आईं. कुछ जूनियर अधिकारियों ने लीक लेटर में मुनीर पर ऑपरेशनल अक्षमता, भ्रष्टाचार और राजनीतिक दखल का आरोप लगाया. 

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बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने पर भी मुनीर की नीति पर सवाल उठे. आर्मी ने कई बार सख्त ऑपरेशन चलाए लेकिन आम लोगों का विस्थापन बढ़ा. आतंकवाद कम नहीं हुआ. मुनीर अंदरूनी समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए अफगानिस्तान और भारत पर सख्त बयान देते रहते हैं.

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ट्रंप की राह और मुनीर का भविष्य

ट्रंप सत्ता में आकर सख्त डीलमेकर की छवि रखते हैं. मुनीर भी उसी राह पर चलते दिख रहे हैं - जहां फायदा हो वहां शांति की बात, जहां खतरा लगे वहां हमला. ईरान के मामले में ट्रंप की दोस्ती ने मुनीर को ग्लोबल स्टेज पर जगह दी. लेकिन अफगानिस्तान में सख्ती से पाकिस्तान और अधिक अलग-थलग पड़ सकता है. 

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है. अगर अफगानिस्तान के साथ संबंध पूरी तरह बिगड़ गए और ईरान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया तो मुनीर की यह दोहरी नीति उल्टी पड़ सकती है. 

आसिम मुनीर ट्रंप की तरह ही डिसाइसिव लीडर बनना चाहते हैं. ईरान में वे पीसमेकर बनकर पाकिस्तान की इमेज सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान में अटैकर बनकर अपनी सेना की ताकत दिखा रहे हैं. लेकिन इतिहास गवाह है कि दोहरी नीति लंबे समय तक कामयाब नहीं रहती. 

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मुनीर की कई पुरानी गलतियां – इंटेलिजेंस फेलियर, बढ़ता आतंकवाद और अंदरूनी असंतोष - उनके इस नए अवतार पर सवाल खड़े करती हैं. पाकिस्तान के आम लोगों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मुनीर की नीति कितनी सफल होगी, यह आने वाले समय में साफ होगा. फिलहाल वे ट्रंप की राह पर चलते हुए ईरान में शांति और अफगानिस्तान में सख्ती का खेल खेल रहे हैं.

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