भीमा कोरेगांव हिंसा: NIA ने दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को किया अरेस्‍ट

NIA ने मंगलवार को दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 54 साल के असोसिएट प्रोफेसर हानी बाबू को अरेस्ट किया है. वह दिल्‍ली से सटे नोएडा में रहते हैं.

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NIA ने दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया (फाइल फोटो) NIA ने दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया (फाइल फोटो)

मुनीष पांडे / जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 12:36 AM IST

  • दिल्‍ली यूनिवर्सिटी का एक प्रोफेसर गिरफ्तार
  • 54 साल के प्रोफेसर हानी बाबू नोएडा में रहते हैं

महाराष्‍ट्र के भीमा कोरेगांव एल्‍गार परिषद हिंसा मामले में NIA ने मंगलवार को दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 54 साल के असोसिएट प्रोफेसर हानी बाबू को अरेस्ट किया है. वह दिल्‍ली से सटे नोएडा में रहते हैं.

आरोपी को बुधवार को एनआईए की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा. एनआईए पूछताछ के लिए हानी बाबू को हिरासत में लेने की मांग करेगी. एनआईए से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रोफेसर हानी बाबू नक्सल गतिविधियों और नक्सली विचारधारा का लगातार समर्थन कर रहे थे. एनआईए ने गृह मंत्रालय के आदेश पर 24 जनवरी 2020 को यह केस लिया था. उसके बाद एनआईए ने 14 अप्रैल को गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ्तार किया.

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इससे पहले इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एनआईए को नोटिस भेजा. नोटिस गौतम नवलखा की जमानत अर्जी के बाद भेजा गया है. गौतम नवलखा ने मेडिकल ग्राउंड पर जमानत की मांग की है. वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं.

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गौतम नवलखा उन पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से एक हैं जिन्हें माओवादियों के साथ कथित संबंधों और भीमा कोरेगांव हिंसा में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर अरेस्ट किया गया था. बता दें पीएम मोदी की हत्या की साजिश के सिलसिले में 5 राज्यों के 8 स्थानों पर अगस्त 2018 में ताबड़तोड़ छापे मारे गए थे. गिरफ्तार किए गए लोगों में गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज और उनकी बेटी अनु भारद्वाज शामिल थे.

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भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कर रहे आयोग ने एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार को भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था. भीमा कोरेगांव इलाके में हुई हिंसा की जांच के लिए बने इस जांच आयोग का गठन 1 जनवरी 2018 को किया गया था. जस्टिस जे.एन. पटेल आयोग के अध्यक्ष और सुमित मुलिक आयोग के सदस्य हैं. 5 सितंबर 2018 से इस आयोग ने काम शुरू किया था.

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