यूपी के धर्मांतरण रैकेट मामले में कई बड़े खुलासे, विदेशी फंडिंग से ISI कनेक्शन तक, जानिए सब

जांच एजेंसी अब इस बात की तफ्तीश भी कर रही है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का संबंध इस रैकेट के साथ तो नहीं है? क्या आईएसआई भी इस रैकेट को फंडिंग कर रही थी?

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UP ATS ने इस मामले में काजी और उमर गौतम को गिरफ्तार किया है UP ATS ने इस मामले में काजी और उमर गौतम को गिरफ्तार किया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2021,
  • अपडेटेड 9:39 PM IST
  • खाड़ी देशों से फंडिंग के पुख्ता सबूत मिले
  • एक अधिकारी का नाम भी आया सामने
  • अधिकारी पर आरोपियों की मदद का आरोप

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद जांच में कई नए खुलासे हुए हैं. एटीएस को शक है कि धर्मांतरण कराने वाले इस रैकेट को विदेशों से भी अनुदान मिलता था. इसके अलावा एजेंसी इस बात की तफ्तीश भी कर रही है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का संबंध इस रैकेट के साथ तो नहीं है? क्या आईएसआई भी इस रैकेट को फंडिंग कर रही थी? उधर, डासना देवी मंदिर में दो लोगों के भेजने के आरोपी सलीमुद्दीन को रिहा कर दिया गया है. उसने साफ कहा कि उसका धर्मांतरण रैकेट से कोई लेना देना नहीं है.

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गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई
यूपी पुलिस को अपने सूत्रों से धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह के बारे में सूचनाएं मिल रहीं थी. उन्ही सूचनाओं के आधार पर यूपी एटीएस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था. पूछताछ में पता चला कि ये रैकेट खासकर मूक-बधिर बच्चों और महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराता था. जैसे-जैसे इस मामले में जांच आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. 

विदेशी फंडिंग और आईएसआई कनेक्शन!
यूपी एटीएस के सूत्रों का कहना है कि इस रैकेट को चंदे के तौर पर विदेशी से भी फंडिंग हुई है. जिसमें पाकिस्तान और कुछ खाड़ी देशों से कुल रकम का एक बड़ा हिस्सा इनके पास आया था. यही वजह है कि अब जांच एजेंसी इस रैकेट के आईएसआई के साथ लिंक तलाश रही है. एजेंसियां उन बैंक खातों की पहचान करने की कोशिश में जुटी हैं, इन लोगों को विदेशों से पैसा भेजा गया. जांच एजेंसियों को कतर से भी पैसे मिलने के सबूत मिले हैं. धर्म परिवर्तन के मामले में एक नहीं बल्कि दो संगठनों की भूमिका सामने आई है. दूसरे संगठन के प्रमुख की तलाश में जांच एजेंसियां ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं.

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गैंगस्टर एक्ट और एनएसए की कार्रवाई
इस धर्मांतरण रैकेट का खुलासा होने के बाद यूपी की योगी सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है. यही वजह है कि सरकार ने इस रैकेट से जुड़े आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट से लेकर एनएसए तक की कार्रवाई अमल में लाए जाने के आदेश दिए हैं. सूत्रों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो सभी आरोपियों की संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी. 

सलीमुद्दीन ने कहा- धर्मांतरण रैकेट से लेना-देना नहीं
गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में नाम बदलकर दो लोगों को घुसाने के आरोप में सलीमुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था. लेकिन अदालत ने उसे सोमवार की देर रात रिहा कर दिया. हालांकि, सलीमुद्दीन का कहना है कि उसने उन दो लोगों को महंत के पास जाने से रोका था.

दरअसल, 2 जून की रात करीब साढ़े आठ बजे दो संदिग्ध डासना देवी मंदिर में घुसे थे. गेट पर दोनों ने अपने नाम नागपुर निवासी विपुल विजयवर्गीय और काशी गुप्ता लिखवाया था. उन दोनों को वहां भेजने के आरोप में सलीमुद्दीन को मसूरी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि, मंदिर के गेट से पकड़े गए लोगों की रिहाई के बाद सलीमुद्दीन को भी रिहा कर दिया गया. इस दौरान सलीमुद्दीन का नाम धर्मांतरण रैकेट से भी जोड़ा गया था, लेकिन सलीमुद्दीन का कहना है कि उसका धर्मांतरण रैकेट से कोई लेना देना नहीं है. 

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ऐसे हुआ था रैकेट का खुलासा
इस रैकेट की कहानी का आगाज कुछ यूं हुआ कि यूपी पुलिस को धर्मांतरण कराने की सूचनाएं मिल रही थी. लेकिन पुलिस को ये अंदाजा नहीं था कि जो रैकेट ये काम कर रहा है, उसके तार कहां और कितने फैले हो सकते हैं. पुलिस ने सूचना के आधार पर जानकारी जुटानी शुरू की तो आगे चलकर पता चला कि इस मामले में विदेशी फंडिंग भी होती है. अब पुलिस के हाथ कई सुराग लग चुके थे. लिहाजा इस रैकेट में आरोपियों की धरपकड़ के लिए यूपी एटीएस को लगाया गया.

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मूक बधिर बच्चे और महिलाएं बनी शिकार
एटीएस की टीम ने नोएडा में दबिश दी और दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया. जिनकी पहचान आरोपी मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी  के तौर पर हुई. एटीएस को शक है कि इस रैकेट में 100 से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं. एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार के मुताबिक पिछले एक साल में 350 लोगों का धर्मांतरण कराया गया है. नोएडा के एक मूक बधिर स्कूल के 18 बच्चों का भी धर्मांतरण कराया गया. एडीजी का दावा है कि अब तक ये रैकेट एक हजार से ज्यादा लोगों का धर्म परिवर्तन करा चुका है. ये पूरा रैकेट पिछले दो साल से चल रहा था. 

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लखनऊ के गोमती नगर थाने में FIR
एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस रैकेट के मेंबर लोगों को लालच देकर और ज़रूरत पड़ने पर डरा-धमकाकर भी धर्मांतरण कराते थे. पकड़े में आए दोनों आरोपी मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी दिल्ली के रहने वाले हैं. इनके ऊपर सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि पूरे देश में धर्मांतरण कराने का आरोप है. इस मामले में एटीएस ने लखनऊ के गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें जामिया नगर स्थित आईडीसी इस्लामिक दावा सेंटर के चेयरमैन का नाम भी दर्ज है. 

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दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ
जानकारी के मुताबिक, यूपी एटीएस इन दोनों आरोपियों से चार दिन से पूछताछ कर रही है. जांच में ये भी सामने आया है कि मोहम्मद उमर गौतम भी हिंदू से मुस्लिम में कन्वर्ट हुआ था. एटीएस की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, ये लोग आमतौर पर कमजोर वर्गों, बच्चों, महिलाओं और मूक बधिरों को टारगेट कर उनका धर्म परिवर्तन कराते थे. एटीएस के अफसरों का दावा है कि ये रैकेट अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों का धर्मांतरण करा चुका है. पकड़े गए दोनों आरोपियों का नाम रामपुर से जुड़े धर्मांतरण के मामले में भी सामने आया है. अब यूपी एटीएस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट को फंडिंग कौन करता था? इनका असली मकसद क्या था? 

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रैकेट में शामिल हो सकते हैं कई लोग
एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि आरोपी मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी दिल्ली के जामिया नगर इलाके के रहने वाले हैं. उमर भी कन्वर्टेड मुस्लिम है. पुलिस को जांच में पता चला कि मोहम्मद उमर गौतम पहले हिंदू था, जिसने बाद में इस्लाम कबूल कर लिया. उसके पिता का नाम धनराज सिंह गौतम है. पुलिस को शक है कि इस रैकेट को चलाने में उमर गौतम के साथ बहुत से लोग शामिल हो सकते हैं. 

एक अधिकारी का नाम भी शामिल
दूसरी तरफ, इस मामले में अब एक सरकारी अधिकारी का नाम भी सामने आया है. केंद्र सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग में तैनात उस अधिकारी का नाम आरोपियों के मददगार के रूप में लिया जा रहा है. बताया जाता है कि वो अधिकारी जरूरतमंद लोगों की सूची बनाकर आरोपियों को मुहैया कराता था. उस अधिकारी से जल्द पूछताछ की जाएगी. 

सात दिन की रिमांड पर हैं दोनों आरोपी
रैकेट चलाने वाले दोनों आरोपियों को सात दिनों के लिए यूपी एटीएस ने रिमांड लिया है. पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने दावा किया है कि जिस तरह से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की फंडिंग हो रही थी, वैसी ही हमारी फंडिंग हो रही थी.

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