CNG पंप दिलाने के नाम पर दो करोड़ से ज्यादा की ठगी, दिल्ली में तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस उपायुक्त (आईएफएसओ) हेमंत तिवारी ने बताया कि जालसाजों ने सीएनजी पंप लगाने के नाम पर एक व्यक्ति से 2.39 करोड़ रुपये ठग लिए. उन्होंने बताया कि आरोपियों ने विभिन्न फर्जी बैंक खातों के जरिए 1.79 करोड़ रुपये और 60 लाख रुपये नकद हासिल किए.

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पुलिस ने ठगी के इस खेल में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है पुलिस ने ठगी के इस खेल में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:35 PM IST

दिल्ली पुलिस ने सीएनजी पंप उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने के आरोप में पेट्रोलियम मंत्रालय के एक पूर्व संविदा कर्मचारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों की करतूत का खुलासा उस वक्त हुआ, जब उन्होंने एक शख्स को सीएनजी पंप दिलाने के नाम पर दो करोड़ से ज्यादा का चूना लगा दिया. पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को इस मामले का खुलासा किया.

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पुलिस उपायुक्त (आईएफएसओ) हेमंत तिवारी ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि जालसाजों ने सीएनजी पंप लगाने के नाम पर एक व्यक्ति से 2.39 करोड़ रुपये ठग लिए. उन्होंने बताया कि आरोपियों ने विभिन्न फर्जी बैंक खातों के जरिए 1.79 करोड़ रुपये और 60 लाख रुपये नकद हासिल किए.

डीसीपी हेमंत तिवारी ने इस मामले में पीटीआई को बताया कि इसी साल 27 मार्च को शिकायतकर्ता ने आईएफएसओ विशेष प्रकोष्ठ से संपर्क किया था और बताया था कि उसकी जमीन पर सीएनजी पंप लगाने का वादा करने वाले लोगों ने उससे 2.39 करोड़ रुपये ठग लिए हैं. 

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया कि शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि वह पेट्रोल या सीएनजी पंप आवंटन प्रक्रिया ऑनलाइन खोज रहा था और दो व्यक्तियों, अमरेंद्र और अमित पांडे ने उससे संपर्क किया, जिन्होंने खुद को एक गैस कंपनी के समन्वयक और एजेंट के रूप में उसके सामने पेश किया.

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डीसीपी ने कहा कि उन्होंने उसे न्यूनतम औपचारिकताओं के साथ सीएनजी पंप स्थापित करने का भरोसा दिलाया. आरोपियों ने पंजीकरण प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण और जीएसटी नंबर के साथ एक चालान सहित जाली दस्तावेज बनाए और उन्हें शिकायतकर्ता को भेज दिया. उन्होंने खुद को एक गैस कंपनी का अधिकारी बताकर पीड़ित से 2.39 करोड़ रुपये ठग लिए. डीसीपी के मुताबिक, इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच शुरू की गई.

पुलिस के अनुसार, धोखाधड़ी लगभग तीन साल पुरानी होने के कारण एक विशेष टीम का गठन किया गया था. टीम ने धोखाधड़ी में शामिल बैंक खातों का विवरण एकत्र किया और पैसे के लेन-देन का पता लगाया. आरोपियों द्वारा प्रदान किए गए पंजीकरण और आवंटन दस्तावेजों को गैस कंपनी के साथ सत्यापित किया गया और पाया गया कि वे नकली हैं.

डीसीपी ने बताया कि पुलिस टीम ने आरोपियों के ठिकाने का पता लगाया और बाद में अमित कुमार पांडे (41), अमरेंद्र कुमार (47) और अमर सिंह (62) को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की पकड़ से बचने के लिए आरोपी किसी और के नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे. 

आरोपियों ने शिकायतकर्ता को दस्तावेज भेजने के लिए फर्जी ईमेल भी बनाए थे. अमित कुमार पांडे की पहचान मास्टरमाइंड के रूप में हुई है, जिसने पंजीकरण और आवंटन के दस्तावेजों में जालसाजी की, जबकि अमरेंद्र कुमार ने शिकायतकर्ता से कैश लिया था. पुलिस ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय के पूर्व कर्मचारी अमर सिंह ने खुद को इस मामले का सूत्रधार बताया है.

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डीसीपी ने कार्यप्रणाली साझा करते हुए बताया कि जालसाजों को पता चला कि शिकायतकर्ता अपनी जमीन पर सीएनजी पंप लगाना चाहता है और उन्होंने खुद को गैस कंपनी के अधिकारी और बिचौलिए के रूप में पेश किया. इसके बाद उन्होंने पेट्रोलियम मंत्रालय में मजबूत संबंध होने का दावा करते हुए न्यूनतम औपचारिकताओं के साथ सीएनजी पंप लगाने की पेशकश की.

पुलिस उपायुक्त (आईएफएसओ) हेमंत तिवारी ने बताया कि ठग गिरोह ने शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए, जिसमें साइट विजिट की व्यवस्था करना और संदेह से बचने के लिए फर्जी एनओसी, एरिया क्लीयरेंस रिपोर्ट और चालान जारी करना शामिल है. अन्य सह-षड्यंत्रकारियों और गैस कंपनी से किसी भी संभावित संबंध की जांच की जा रही है. 

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