दिल्ली में इंटरनेशनल साइबर क्राइम रैकेट का भंडाफोड़, ऐसे पकड़े गए तीन आरोपी

दिल्ली पुलिस ने इंटरनेशनल हाई-प्रोफाइल साइबर क्राइम मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर 42.5 लाख रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में चीन से जुड़े साइबर-फाइनेंशियल नेटवर्क के संकेत मिले हैं.

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पुलिस ने रैकेट के चीनी कनेक्शन का खुलासा किया, मनी ट्रेल से खुला खेल. (Photo: X/@CrimeBranchDP) पुलिस ने रैकेट के चीनी कनेक्शन का खुलासा किया, मनी ट्रेल से खुला खेल. (Photo: X/@CrimeBranchDP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:01 PM IST

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक संगठित इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर की गई बड़ी ऑनलाइन ठगी की जांच के बाद की गई है. यह मामला उत्तम नगर इलाके के 56 साल के एक व्यक्ति की शिकायत से सामने आया. 

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ने आरोप लगाया था कि साइबर ठगों ने उसे शेयर बाजार में मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया. इस दौरान अलग-अलग बैंक खातों के जरिए करीब 42.5 लाख रुपए निकाल लिए. इस शिकायत पर 17 दिसंबर 2025 को ई-FIR दर्ज की गई थी. इसके बाद पुलिस इस मामले की जांच शुरू कर दी थी.

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इस जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम को छुपाने और ट्रेल मिटाने के लिए 36 अलग-अलग बैंक अकाउंट्स के जरिए पैसे ट्रांसफर किए गए थे. इन खातों का लाभार्थी दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के मुनीरका गांव का रहने वाला सब्बीर अहमद निकला, जिसे 21 जनवरी को गिरफ्तार किया गया. उसने पूछताछ में कई खुलासे किए.

आरोपी सब्बीर ने पुलिस को बताया कि उसने अलग-अलग बैंकों में 9 से 10 अकाउंट खुलवाए थे और पूरी बैंक किट मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद दिलशाद को सौंप दी थी. दोनों आरोपी बाटला हाउस इलाके के रहने वाले हैं. सब्बीर को इन अकाउंट्स में आने वाली धोखाधड़ी की रकम पर करीब दो प्रतिशत कमीशन मिलता था. 

उसके खुलासे के आधार पर पुलिस ने 5 फरवरी को सरफराज और दिलशाद को भी गिरफ्तार कर लिया. जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों के इंटरनेशनल साइबर हैंडलर्स से संपर्क थे. उन्होंने कबूल किया कि वे चीनी नागरिकों को USDT क्रिप्टोकरेंसी बेचने में शामिल थे, जिससे इस साइबर क्राइम रैकेट के इंटरनेशनल कनेक्शन का खुलासा हुआ.

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सरफराज और दिलशाद की भूमिका डमी कैंडिडेट्स का इंतजाम करने और बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय कर कई बैंक खाते खुलवाने में मदद करने की थी. जांचकर्ताओं ने यह भी बताया कि सब्बीर की गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की थी. उन्होंने चेक बुक नष्ट करने और सिम कार्ड तोड़ने की बात कबूल की है. 

पुलिस ने तोड़े गए सिम कार्ड के साथ इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन बरामद कर लिया है. पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि तीनों आरोपी इससे पहले सितंबर 2025 में दर्ज एक अन्य साइबर फ्रॉड मामले में भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. फिलहाल पुलिस इंटरनेशनल नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और पैसों की ट्रेल खंगालने में जुटी है.

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