ये PAK आतंक का 'जिंदा सबूत', जिसका सुषमा ने UN में लिया नाम

जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि हमने मित्रता के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन इसके बदले में हमें पठानकोट और उरी जैसा आतंकी हमला मिला है. हमारे पास सीमापार से आतंकवाद का जिंदा सबूत बहादुर अली के रूप में मौजूद है. सुषमा के इस बयान के बीच एनआईए कुपवाड़ा मुठभेड़ में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी सैफुल्ला बहादुर अली से उरी हमले से संबंध में पूछताछ करेगी.

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मुकेश कुमार / जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 7:50 AM IST

जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि हमने मित्रता के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन इसके बदले में हमें पठानकोट और उरी जैसा आतंकी हमला मिला है. हमारे पास सीमापार से आतंकवाद का जिंदा सबूत बहादुर अली के रूप में मौजूद है. सुषमा के इस बयान के बीच एनआईए कुपवाड़ा मुठभेड़ में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी सैफुल्ला बहादुर अली से उरी हमले से संबंध में पूछताछ करेगी.

एनआई सूत्रों के मुताबिक, बहादुर अली से पूछताछ में उरी आतंकी हमले से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं. उरी हमले के बाद जो सामान बरामद हुए हैं, वह बहादुर अली के पास से बरामद सामान से मिलते-जुलते हैं. ऐसे में उससे पूछताछ जरूरी है. यही नहीं, उरी में ढेर आतंकियों की तस्वीर भी अली को दिखाई जाएगी, ताकि वह किसी को पहचान सके. इससे पहले पूछताछ में भी बहादुर अली ने खुलासा किया था कि किस तरह पाकिस्तान आतंकियों को भारत में भेजकर तबाही मचा रहा है.


जानिए, बहादुर अली के बारे में प्रमुख बातें

  • बहादुर अली को कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नौगाम सेक्टर में हुई मुठभेड़ में पकड़ा गया था. उसने कबूली किया कि वह पाकिस्तान के लाहौर के रायविंड का रहने वाला है.
  • बहादुर अली POK में स्थित A3 कंट्रोल रूम के संपर्क में था. यहां से लश्कर का हैंडलर साजिद जट का सेकेंड इन कमांड वलीद भारत में इनको निर्देश दे रहा था.
  • के कंट्रोल रूम A3 के निर्देश पर उसको उत्तरी कश्मीर में 'डॉक्टर' और 'नर्स' से मिलना था. ये उनके नाम का कोड वर्ड था.
  • सैफुल्ला ने बताया कि उसे भारतीयों से बेइंतहा नफरत है. वह उन्हें मारने आया था. उसे मरने का कोई गम नहीं है.
  • ने बताया हमारी ट्रेनिंग के दौरान एक दो बार 'चाचा' भी आए थे. जानकारी के मुताबिक चाचा कोई और नहीं हाफिज सईद है.
  • उसने बताया, 'मैं लश्कर में फरवरी 2015 में शामिल हुआ था. हमें मुज्जफराबाद के तीन कैंपों में ट्रेनिंग दी गई. मुझे जान-ए-फिदाई बनने के लिए तैयार किया गया.'
  • उसने NIA को बताया कि साद और दर्दा भाई उसको तीसरे ट्रेनिंग कैंप में मिले थे. वो दोनों ट्रेनिंग कैंप में मुझसे पहले आ चुके थे.
  • हाफिज का बेटा तल्हा सईद साद को जनता था. आखिरी कैंप में वह साद से मिलने आया था. अली उनसे नहीं मिल पाया था.
  • अली ने NIA को बताया की उसे साद और दर्डा के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद वलीद ने मिशन को पूरा करने के लिए कहा था.
ग्राफिक्स: अरिंदम मुखर्जी

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