कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के लिए स्पुतनिक वी वैक्सीन की एक ही डोज काफी: स्टडी

रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी कोरोना संक्रमण से लड़ने में 94 फीसदी तक कारगर है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड से ठीक हो चुके लोगों को स्पुतनिक वी की दूसरी डोज देने के बाद लाभ पहुंचने के कोई साक्ष्य नहीं है. ऐसे में वैक्सीन की एक ही डोज उन लोगों के लिए पर्याप्त है जो कोरोना से लड़कर ठीक हो चुके हैं.

Advertisement
Sputnik V वैक्सीन हर वेरिएंट के खिलाफ है असरदार (फोटो-PTI) Sputnik V वैक्सीन हर वेरिएंट के खिलाफ है असरदार (फोटो-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 9:37 AM IST
  • हर वेरिएंट के खिलाफ असरदार है स्पुतनिक वी
  • 94 फीसदी तक असरदार है वैक्सीन की डोज

कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट (Delta variant ) के खिलाफ mRNA वैक्सीन प्रभावी हैं. वैज्ञानिकों की घोषणा के एक दिन बाद ही एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोरोना (Coronavirus) संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों पर रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी (Sputnik V) की दूसरी डोज का इस्तेमाल करने का कोई स्पष्ट लाभ नहीं है. ऐसे में कोरोना के खिलाफ 94 फीसदी तक असरदार इस वैक्सीन की एक ही डोज उन लोगों के लिए पर्याप्त है, जो कोरोना से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं.

Advertisement

हालांकि स्टडी में यह भी बात सामने आई है कि वैक्सीन की दूसरी खुराक एंटीबॉडी और कोविड संक्रमण को बेअसर करने की क्षमता को और बढ़ाती है. साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि वैक्सीन की पहली खुराक मिलने के 21 दिन बाद 94 फीसदी लोगों ने स्पाइक-स्पेसिफिक एंटीबॉडी विकसित की. अध्ययन अर्जेंटीना में स्वास्थ्य कर्मियों पर किया गया था.

शोधकर्ताओं का कहना है कि स्पुतनिक वी वैक्सीन की सिंगल डोज, ज्यादा बेहतर एंटीबॉडी का स्तर उन लोगों को देती है, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं. यह उनकी तुलना में है जो संक्रमित होने के बाद भी वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं. 

दिल्ली के इस अस्पताल पहुंची 1000 Sputnik-V वैक्सीन, जानिए आम लोगों को कब से मिलेगी?
 

भारत में भी हो चुकी है स्टडी!

इससे पहले, हैदराबाद के एआईजी अस्पतालों के एक अध्ययन में यह भी दावा किया गया था कि कोविड से ठीक हुए मरीजों के लिए उनकी मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया के कारण टीके की एक खुराक पर्याप्त है. यह अध्ययन 260 स्वास्थ्य कर्मियों पर किया गया था, जिन्हें 16 जनवरी से 5 फरवरी के बीच कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई थी.

Advertisement

डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 90 फीसदी तक प्रभावी स्पुतनिक वी

स्पुतनिक वी के डेवलपर्स ने जून में दावा किया था कि अत्यधिक संक्रामक डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ टीका लगभग 90 प्रतिशत प्रभावी है. आरआईए समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को के गामालेया इंस्टीट्यूट के उप निदेशक डेनिस लोगुनोव ने कहा था कि डेल्टा वेरिएंट पर आकंड़े मेडिल रिकॉर्ड्स के मुताबिक जुटाए गए थे. गामालेया इंस्टीट्यूट ने ही स्पूतनिक वी वैक्सीन को डेवलेप किया है.

भारत में मंजूरी पाने वाला तीसरा टीका

स्पुतनिक वी वैक्सीन, कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद भारत में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल होने वाला तीसरा टीका है. वहीं स्पुतनिक लाइट को मई में रूस में इमरजेंसी यूज के लिए 79.4 प्रतिशत तक प्रभावी माना गया था. इसे रूस में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है, भारत में भी इसके इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी देने की बात चल रही है. 

 

कैसे काम करती है वैक्सीन?

वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन बनाने के लिए SARS-CoV-2 के आनुवंशिक इंस्ट्रक्शन का इस्तेमाल करती है. यह इन्फॉर्मेशन को डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए में स्टोर करता है. वैक्सीन को एडिनोवायरस से विकसित किया गया है. शोधकर्ताओं ने कोविड स्पाइक प्रोटीन के लिए जीन को दो एडिनोवायरस में जोड़ा, उन्हें प्रभावित कोशिकाओं पर अटैक करने के लिए विकसित किया. स्पूतनिक-वी, जॉनसन एंड जॉनसन की ओर से विकसित इबोला के लिए टीका बनाने की प्रक्रिया से प्रेरित है.
 

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »