भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में सोमवार को कोहराम मचा है, वैसे तो पिछले करीब 2 साल से बाजार पर दबाव है. 8 जून 2024 को भी निफ्टी 23 हजार के आसपास था, और 8 जून 2026 को भी निफ्टी इसी लेवल पर है. शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशक सहमे हुए हैं.
दरअसल, वैश्विक बाजारों के लिए अचानक कई बुरी खबरें आ गईं, जिससे दुनियाभर के बाजार पस्त पड़ते नजर आ रहे हैं, मंदी की बात होने लगी है. कारोबार हफ्ते के पहले दिन ही शुरुआती कारोबार में बिकवाली का ऐसा दबाव देखा गया कि निफ्टी-50 लगभग 1% से ज्यादा टूटकर 23 हजार के पास पहुंच गया.
इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर एक के बाद एक 10 बड़े झटके हैं, जिन्होंने निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए हैं.
1. अमेरिका-ईरान में बढ़ता सैन्य तनाव
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण मिडिल-ईस्ट में फिर से तनाव बढ़ना है. ईरान द्वारा इजरायल पर दागी गई मिसाइलों और बदले में इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति पैदा कर दी है. इस युद्ध जैसी स्थिति से वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल है, जिस कारण निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों के तौर पर अमेरिकी बॉन्ड और सोना में लगा रहे हैं.
2. कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
युद्ध की आशंका के चलते ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है. खासकर 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के ब्लॉक होने का डर है, जहां से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार होता है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3.29% उछलकर 96.15 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, महंगे तेल का सीधा मतलब है, भारत का बढ़ता चालू खाता घाटा, सरकारी कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ और देश में महंगाई का बढ़ना है. इस बीच भारत में घरेलू LPG की कीमतों फिर 29 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है.
3. अमेरिकी जॉब डेटा में अप्रत्याशित उछाल
हाल ही में जारी हुए अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा ने बाजार को चौंका दिया है. अनुमान से कहीं ज्यादा नौकरियां पैदा होने के कारण अमेरिकी लेबर मार्केट बेहद मजबूत नजर आ रहा है. सामान्य तौर पर मजबूत इकोनॉमी अच्छी बात है, लेकिन शेयर बाजार के लिए यह बुरी खबर बनकर आई है, क्योंकि मजबूत अर्थव्यवस्था महंगाई को कम नहीं होने देगी.
4. फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें खत्म
अमेरिकी जॉब डेटा मजबूत आने के बाद अब यूएस फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर रह गई है, बल्कि डर यह है कि फेड रिजर्व साल के अंत तक ब्याज दरें और बढ़ा सकता है. उच्च ब्याज दरों के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार बिकवाली कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने देश में ही बिना रिस्क के अच्छा रिटर्न मिल रहा है.
5. अमेरिकी शेयर बाजार में भूचाल (नेस्डैक 4% गिरा)
वैश्विक मंदी और ब्याज दरों के डर से पिछले शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई. खासतौर पर टेक-हैवी इंडेक्स नेस्डैक 4.18% टूटकर बंद हुआ. अमेरिकी टेक स्टॉक्स में आई इस सुनामी का असर सोमवार सुबह भारतीय आईटी (IT) कंपनियों पर साफ देखा गया, जहां निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.85% से ज्यादा फिसल गया.
6. एशियाई बाजारों में कोहराम
अमेरिकी बाजारों की तरह ही एशियाई बाजारों में कत्लेआम मचा हुआ है. टेक और सेमीकंडक्टर पर निर्भर दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 6 फीसदी से ज्यादा क्रैश हो गया. वहीं जापान का निक्केई 225 भी 4.14% तक गोता लगा गया. एशिया के अन्य बड़े बाजारों में भारी गिरावट का माहौल है.
7. AI और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में भारी बिकवाली
पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में एक बड़ा बबल बन रहा था. लेकिन अब वैश्विक मांग में कमी और ओवरवैल्यूएशन के कारण इन सेक्टर्स में भारी मुनाफावसूली हो रही है. दुनिया की बड़ी चिप और सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिरे हैं, जिससे टेक-इकोसिस्टम से जुड़े हर बाजार में पैनिक सेलिंग हो रही है. भारतीय एआई और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स भी दो दिन में 10 फीसदी तक फिसल चुके हैं.
8. कम बारिश का अनुमान
घरेलू मोर्चे पर मौसम विभाग के कमजोर मानसून या कम बारिश के शुरुआती अनुमानों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है. भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि और मानसून पर निर्भर है. अगर बारिश कम होती है, तो ग्रामीण इलाकों में मांग घटेगी, जिससे एफएमसीजी (FMCG), ऑटो (Tractor & Two-wheelers) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों के बिजनेस पर सीधा निगेटिव असर पड़ेगा.
9. सोना-चांदी पस्त
शेयर बाजार में बिकवाली और वैश्विक तनाव की वजह से सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है. सोमवार को MCX पर चांदी प्रति किलो 8000 रुपये सस्ती और सोना 2000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता गया है.
10. संभल नहीं रहा है रुपया
इन सब खराब खबरों के बीच भारतीय करेंसी 'रुपया' सोमवार को फिर फिसल गया है. सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले टूटकर 96.32 के पार निकल गया. रुपये के कमजोर होने से भारत के लिए आयात बेहद महंगे हो जाएंगे, जिससे आयातित महंगाई बढ़ेगी. रिजर्व बैंक (RBI) को रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों को ऊंचा रखना पड़ेगा, जो शेयर बाजार की ग्रोथ के लिए एक बड़ा स्पीड ब्रेकर है. ॉ
इस बीच मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी 23,000 के स्तर को नीचे की तरफ तोड़ता है, तो बाजार में बिकवाली और तेज हो सकती है जो इंडेक्स को 22,700 के स्तर तक धकेल सकती है.
अमित कुमार दुबे