Capital Gains Tax: ये तो होना ही था! एक तीर से दो शिकार... इधर सरकार का ऐलान, उधर रुपया हुआ मजबूत

विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बॉन्ड से कमाए गए ब्याज पर लगने वाले 20% टैक्स को पूरी तरह से खत्म करने का फैसला लिया गया है. इसका उद्देश्य है कि ग्लोबल मार्केट के अनुरूप टैक्स स्ट्रक्चर को बनाना है.

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आरबीआई के ऐलान से रुपये में मजबूती. (Photo: ITG) आरबीआई के ऐलान से रुपये में मजबूती. (Photo: ITG)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST

जिस तरह से पिछले कुछ महीनों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं, और निवेश से बच रहे हैं, उसको देखते हुए सरकार और आरबीआई ने मिलकर बड़ा ऐलान कर दिया है. इकोनॉमी के लिए भी ये अच्छी खबर है. सरकार के इस फैसले से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में शानदार मजबूती देखी गई.

दरअसल, सरकार और आरबीआई की ये पूरी कवायद रुपये को ताकत देना और विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए है. सरकारी सहमति से आरबीआई ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को सरकारी प्रतिभूतियों यानी G-Secs में निवेश करने पर 'कैपिटल गेन्स टैक्स' में छूट देने का ऐलान किया है. पिछले कुछ दिनों से इस तरह के ऐलान के कयास लगाए जा रहे थे.

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बॉन्ड टैक्स में कटौती का ऐलान
प्रस्ताव के मुताबिक विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बॉन्ड से कमाए गए ब्याज पर लगने वाले 20% टैक्स को पूरी तरह से खत्म करने का फैसला लिया गया है. इसका उद्देश्य है कि ग्लोबल मार्केट के अनुरूप टैक्स स्ट्रक्चर को बनाना है, ताकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय डेट मार्केट में खुलकर पैसा लगा सकें.

FII से जुड़े इस ऐलान के साथ ही शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में अचानक जोरदार तेजी देखी जा रही है. सरकार के इस कदम के बाद शुरुआती कारोबार में रुपया 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर पर पहुंच गया था. हालांकि दोपहर 1 बजे 95.37 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस टैक्स छूट के बाद भारतीय डेट मार्केट में विदेशी पूंजी का प्रवाह काफी तेजी से बढ़ेगा. 

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क्यों जरूरी था सरकार का यह कदम?
इस साल की शुरुआत से ही भारतीय रुपया लगातार दबाव में था. साल 2026 के शुरुआती महीनों से अब तक रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5% से अधिक टूट चुका था. रुपये में इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण थे.

1. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल क्रूड ऑयल के दामों में लगातार हो रहे इजाफे के कारण भारत का आयात बिल काफी बढ़ गया था, जिससे डॉलर की मांग बहुत ज्यादा थी.

2. इक्विटी मार्केट से विदेशी फंड्स की निकासी: विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे थे, जिसके चलते घरेलू बाजार से डॉलर बाहर जा रहा था.

इन दोनों वजहों से रुपये पर बने दबाव को कम करने और देश में विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए सरकार ने FII को सरकारी बॉन्ड्स में निवेश पर टैक्स छूट देने का यह बड़ा दांव खेला है. 

अब आगे क्या होगा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस फैसले से न केवल रुपये की गिरावट थमेगी, बल्कि भारतीय बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी. सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी और चालू खाता घाटे को संतुलित करने में मदद मिलेगी. आने वाले दिनों में यदि विदेशी पूंजी का आगमन इसी तरह बना रहा, तो रुपये में और अधिक स्थिरता देखने को मिल सकती है. 

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