अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगा है, नए फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) ने अपनी पहली बैठक में ही स्टॉक मार्केट और व्हाइट हाउस दोनों को चौंका दिया है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप लगातार ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहे थे, लेकिन केविन वॉर्श की अगुवाई में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को घटाना तो दूर, बल्कि साल के अंत तक रेट बढ़ाने को लेकर साफ संकेत दे दिया है.
फेडरल रिजर्व ने सर्वसम्मति से अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.5% से 3.75% के दायरे पर ही बरकरार रखा है. अमेरिका में महंगाई दर 3 साल के उच्चतम स्तर 4.2% पर पहुंच गई है, जो फेड के 2% के लक्ष्य से दोगुनी है. केविन वॉर्श ने सख्त लहजे में कहा, 'महंगाई एक विकल्प है और केंद्रीय बैंक का मुख्य काम देश में मूल्य स्थिरता लाना है.'
डोनाल्ड ट्रंप और शेयर बाजार पर असर
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वह दरों में कटौती चाहते हैं, लेकिन वॉर्श के काम में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. हालांकि फेड के इस कड़े रुख को ट्रंप की उम्मीदों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. वहीं जैसे ही केविन वॉर्श ने कहा कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, और इस साल एक बार बढ़ोतरी की संभावना है, वैसे ही अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. अमेरिकी शेयर बाजार डाऊ जोंस में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि महंगाई कम नहीं हुई, तो केविन वॉर्श सितंबर तक ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर हो सकते हैं।
जेरोम पॉवेल और ट्रंप के बीच तनाव जगजाहिर
केविन वॉर्श को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बेहद करीबी और पसंदीदा माना जाता है, जबकि पूर्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) के साथ ट्रंप के संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे थे. ऐसे में इस बैठक के आर्थिक और राजनीतिक दोनों मायने निकाले जा रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले और दूसरे दोनों कार्यकालों में फेड की नीतियों के कड़े आलोचक रहे हैं. पूर्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल से उनकी कभी नहीं बनी. ट्रंप लगातार पॉवेल पर ब्याज दरों को ऊंचा रखने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी करने का आरोप लगाते रहे थे. ट्रंप ने सार्वजनिक मंचों से कई बार पॉवेल को मूर्ख तक कहा और उन्हें पद से हटाने की धमकियां भी दीं.
जबकि केविन वॉर्श को मई 2026 में फेडरल रिजर्व का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है. वे ट्रंप प्रशासन और कॉरपोरेट जगत के बीच एक मजबूत कड़ी माने जाते हैं. अपनी नियुक्ति के समय और शपथ ग्रहण समारोह में वॉर्श ने केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को बनाए रखने का संकल्प लिया था और ट्रंप ने भी बयान दिया था कि वे वॉर्श को स्वतंत्र रूप से काम करने देंगे. इसके बावजूद, बाजारों का मानना है कि वॉर्श की सोच ट्रंप की कम ब्याज दरों वाली नीति के अधिक अनुकूल है.
ब्याज दरों में बदलाव के पीछे ये कारण
अमेरिका-ईरान शांति समझौता और क्रूड ऑयल: बढ़ती महंगाई के अलावा अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद होर्मुज दोबारा खुलने जा रहा है. इससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिरी हैं. फेड इस बड़ी भू-राजनीतिक राहत के असर का आकलन करने के लिए कुछ समय लेना चाहेगा.
आजतक बिजनेस डेस्क