छंटनी, इस्तीफे और टाउनहॉल... कैसे अर्श से फर्श पर BYJU'S, अब रवींद्रन का ये इमोशनल मैसेज

बायजूस ने मार्च 2023 तक ही लाभ की स्थिति में पहुंचने का लक्ष्य रखा था. लेकिन कोविड के बाद कारोबार में गिरावट से कामयाबी नहीं मिली. पहले भी कई रिपोर्ट में बायजूस की वित्तीय स्थिति और कर्ज को लेकर चिंता जताई जा चुकी है.

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कर्मचारियों को रवींद्रन ने किया संबोधित कर्मचारियों को रवींद्रन ने किया संबोधित

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2023,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

देश की सबसे अधिक वैल्यूएशन वाली स्टार्टअप बायजूस (Byju's) अब संकट में है. कोरोना महामारी के दौरान Byju's घर-घर तक पहुंच गया था. उस दौरान कंपनी की बैलेंस शीट में जबर्दस्त ग्रोथ दर्ज की गई थी. लेकिन अब पिछले कुछ महीनों से कंपनी में उथल-पुथल चल रही है. लगातार छंटनियां हो रही हैं. वहीं बायजू के को-फाउंडर बायजू रवींद्रन के सहयोगी भी साथ छोड़ जा रहे हैं. 

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इस बीच गुरुवार यानी 29 जून को एडटेक कंपनी बायजू के को-फाउंडर बायजू रवींद्रन (Byju Raveendran) ने टाउनहॉल का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने कर्मचारियों से बात की, और उनमें जोश भरने का काम किया. उन्होंने कहा, 'फिलहाल कंपनी संकट में है. लेकिन हम जल्द वापसी करेंगे.' उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा रखने की सलाह दी. 

कर्मचारियों को रवींद्रन का संदेश 

रवींद्रन ने करीब 45 मिनट तक टाउनहॉल में कर्मचारियों से बात की. उन्होंने कहा, 'हम पिछले 12 महीनों से हम संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन एडटेक सेक्टर हमेशा रहेगा और हम इस सेक्टर के लीडर हैं. यह सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स में से एक है और हम सही जगह पर हैं.' उन्होंने इमोशनली कर्मचारियों को संदेश देने की कोशिश की है.

बता दें, पिछले हफ्ते Byju's के बोर्ड के 3 सदस्यों और ऑडिटर डेलॉयट (Deloitte) ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया था. बायजूस के बोर्ड के 3 सदस्यों सिकोइया कैपिटल इंडिया (पीक XV पार्टनर्स) के जीवी रविशंकर, चैन जुकरबर्ग इनिशिएटिव के विवियन वू और प्रोसस के रसेल ड्रेसेन स्टॉक ने इस्तीफा दे दिया. कहा जा रहा है कि रवींद्रन से मतभेद के चलते इन तीनों ने पद छोड़ा है. लेकिन रवींद्रन का कहना है कि कंपनी के बोर्ड सदस्यों ने डेलॉयट के इस्तीफे के कारण पद नहीं छोड़ा है.

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धड़ाधड़ इस्तीफे...

बता दें, डेलॉयट ने कंपनी की वित्त वर्ष 2022 के वित्तीय नतीजों में देरी का हवाला देते हुए बायजूस और इसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी आकाश (Aakash) के ऑडिटर के पद से खुद को अलग कर लिया है. हालांकि वर्ष 2025 तक Byju's का ऑडिट करने के लिए डेलॉयट फर्म का चयन किया गया था. फिलहाल कंपनी को नया ऑडिटर मिल गया है. कंपनी ने बीडीओ (एमएसकेए एंड एसोसिएट्स) की 5 सालों के लिए ऑडिटर के रूप में नियुक्ति की है.

बायजू इस समय 1.2 बिलियन डॉलर के लोन को लेकर अमेरिकी मुकदमे से जूझ रहा है. कंपनी को इस कर्ज का भुगतान करना था. लेकिन कंपनी फिलहाल इस स्थिति में नहीं है. इस बीच खबर है कि बायजू 1 बिलियन डॉलर फंड जुटाने की कोशिश में है, इसके लिए शेयर होल्डर्स से बातचीत की जा रही है. बायजूस ने मार्च 2023 तक ही लाभ की स्थिति में पहुंचने का लक्ष्य रखा था. लेकिन कोविड के बाद कारोबार में गिरावट से कामयाबी नहीं मिली. पहले भी कई रिपोर्ट में बायजूस की वित्तीय स्थिति और कर्ज को लेकर चिंता जताई जा चुकी है.

अर्श से फर्श पर कंपनी

इस बीच निवेशक फर्म प्रोसस ने उसका मूल्यांकन भी 22 अरब डॉलर से घटाकर 5.1 अरब डॉलर कर दिया है. आंकड़ों के लिहाज से यह गिरावट 75 फीसदी से ज्यादा है. यानी केवल एक-चौथाई वैल्यूवेशन रह गई है. जिससे फंड जुटाने में भी दिक्कतें आ सकती हैं. बायजू रवींद्रन की फैमिली की नेटवर्थ इस साल की शुरुआत तक करीब 25,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी.

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बता दें, प्रोसस समूह बायजूस का सबसे बड़ा निवेशक है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में प्रोसस ने बायजूस में अपनी 9.6 फ़ीसद हिस्सेदारी का मूल्य घटाकर 493 मिलियन डॉलर कर दिया है.

बायजू का ऑडिट लंबे समय से लंबित है. हालांकि बायजू (Byju's) ने निवेशकों से कहा है कि वह सितंबर तक 2022 की ऑडिटेड आय और दिसंबर तक 2023 के नतीजे दाखिल करेगी. इधर हाल ही में बायजू में एक बार फिर बड़े पैमाने छंटनी हुई. कंपनी ने रिस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया के तहत 1,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है.

कंपनी के बारे में 
बायजूस एक भारतीय बहुराष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी कंपनी है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरू में है. इसकी स्थापना 2011 में बायजू रवींद्रन और उनकी पत्नी दिव्या गोकुलनाथ ने की थी. देखते ही देखते बायजूस एक लर्निंग ऐप के तौर पर मशहूर हो गई. रवींद्रन ने खुद इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उसके बाद उन्होंने 2006 में छात्रों को गणित की कोचिंग देना शुरू किया.

 

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