भ्रष्टाचार से महंगे हुए घर, बच्चे पैदा करने से डर रहे युवा, श्रीधर वेंबू का बड़ा दावा

श्रीधर वेंबू ने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति आय का स्तर काफी कम होने के बावजूद, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में ज़मीन की कीमतें न्यूयॉर्क के बराबर हैं इसलिए आम लोग यहां घर नहीं खरीद पा रहे हैं.

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भारत के मिडिल क्लास लोग क्यों नहीं खरीद पा रहे हैं घर (Photo-ITG) भारत के मिडिल क्लास लोग क्यों नहीं खरीद पा रहे हैं घर (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

Zoho के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने भारत में आसमान छूती महंगाई और रियल एस्टेट की कीमतों को लेकर एक बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि देश में पैर पसार चुका राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार ही आज जमीनों और मकानों के दाम बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है.

वेंबू के मुताबिक, भारत के लोगों की औसत आमदनी भले ही विकसित देशों से काफी कम हो, लेकिन चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में जमीनों के दाम आज अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के बराबर पहुंच चुके हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भ्रष्टाचार और राजनीति से कमाया गया काला धन बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट मार्केट में छुपाया जा रहा है, जिससे जमीनों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई हैं. इसके अलावा, इमारतों और सोसाइटियों के सरकारी अप्रूवल की प्रक्रिया में होने वाली रिश्वतखोरी मकान बनाने की लागत को और ज्यादा बढ़ा देती है.

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इस बढ़ते रियल एस्टेट खर्च का असर सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की पूरी जिंदगी को महंगा बना रहा है. चूंकि जमीनें और निर्माण कार्य महंगे हैं, इसलिए दुकानदारों को ज्यादा किराया देना पड़ता है, जिससे रोजमर्रा का घरेलू सामान महंगा हो जाता है. यही खेल शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी चल रहा है, जहां प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों को सरकारी नियमों की मंजूरी और कागजी कार्रवाई के नाम पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है, और अंततः इसकी वसूली आम जनता से भारी-भरकम स्कूल फीस और महंगे इलाज के रूप में की जाती है.  

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श्रीधर वेंबू ने चेतावनी दी है कि इस कमरतोड़ आर्थिक बोझ का देश की आबादी पर बेहद गंभीर और चिंताजनक सामाजिक असर पड़ रहा है. आज का युवा जब चारों तरफ इतनी भीषण महंगाई देखता है, तो वह भारी खर्चों के डर से शादी का फैसला टालने लगा है. जो लोग शादी कर भी रहे हैं, वे बच्चों की पढ़ाई और परवरिश के खर्च से डरकर या तो बच्चे पैदा करने का फैसला टाल रहे हैं या फिर एक ही बच्चे पर रुक रहे हैं. 

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वेंबू ने विशेष रूप से तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा, जो कि देश के सबसे तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते राज्यों में से एक है, वहां बच्चों की जन्म दर खतरनाक स्तर तक गिर चुकी है. उन्होंने भ्रष्टाचार को समाज के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि तमिलनाडु में आबादी के इस तरह घटने के पीछे जीवनयापन का महंगा होना एक बहुत बड़ा कारण है. 

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