जापानी डेवलपर्स की भारत में 'चुपके से एंट्री', रियल एस्टेट में अरबों का निवेश क्यों?

जापान के कई बड़े डेवलपर भारत के रियल एस्टेट बाजार में धमाकेदार एंट्री के लिए तैयार हैं और आने वाले वक्त में भारत के कुछ मेट्रो सिटीज में उनके प्रोजेक्ट बनते नजर आएंगे.

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भारत के किन शहरों में जापान का प्रोजेक्ट? (Photo-ITG) भारत के किन शहरों में जापान का प्रोजेक्ट? (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST

जापान के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स अब भारत के बाजार में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दूसरी तरफ कम निर्माण लागत के कारण, भारत के रियल एस्टेट बाजार में निवेश कर रहे हैं. भारत में बढ़ते ऑफिस किराए को देखते हुए, उम्मीद है कि कई और जापानी कंपनियां जल्द ही भारतीय रियल एस्टेट में कदम रखेंगी.
 
इसका एक मुख्य उदाहरण जापान की सबसे बड़ी प्रॉपर्टी डेवलपर मित्सुई फुदोसान (Mitsui Fudosan) है, जिसने 2020 में स्थानीय डेवलपर RMZ रियल एस्टेट के साथ साझेदारी करके बेंगलुरु में एक ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाने के साथ भारत में प्रवेश किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक मित्सुई फुदोसान कंपनी भारत में और तगड़ा पैसा लगाने वाली है. 

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कंपनी RMZ या फिर किसी दूसरी बिल्डर कंपनी के साथ मिलकर 30 से 35 अरब येन (1,500 करोड़ से 1,875 करोड़ रुपये) का नया प्रोजेक्ट शुरू कर सकती है. बताया जा रहा है कि कंपनी की मैनेजमेंट टीम ने हाल ही में मुंबई और नई दिल्ली के आस-पास के इलाकों का दौरा किया ताकि वे वहां नए बिजनेस के मौके तलाश सकें. 

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सुमोटोमो रियल्टी का मुंबई पर फोकस

जापान की तीसरी सबसे बड़ी डेवलपर सुमोटोमो रियल्टी एंड डेवलपमेंट, जो मुंबई को टोक्यो के बाद विकास का अपना दूसरा इंजन मानती है, उसने शहर में पांच प्रोजेक्ट में 6.5 बिलियन डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है. इन पांच परियोजनाओं में दो ऐसी साइटें भी शामिल हैं जो इसी साल जोड़ी गई हैं.

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भारत के रियल एस्टेट में जापान की दिलचस्पी क्यों?

जापानी डेवलपर्स के लिए भारत में निवेश का एक मुख्य आकर्षण यहां की कम लेबर कॉस्ट है. इसके अलावा, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसतन 8% की आर्थिक वृद्धि के कारण भारत में प्रीमियम ऑफिस स्पेस का किराया बहुत तेजी से बढ़ा है. मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स ने तीसरी तिमाही में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में कमर्शियल किराए की वृद्धि में सबसे आगे रहा, जहां किराए में 14.2% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई.  

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी टर्नर एंड टाउनसेंड (Turner & Townsend) के आंकड़ों से पता चलता है कि प्रमुख ऑफिस बिल्डिंग बनाने की लागत में वैश्विक स्तर पर जमीन-आसमान का अंतर है. जहां न्यूयॉर्क में 20 मंजिल तक की प्रीमियम ऑफिस इमारत बनाने में प्रति वर्ग मीटर $8,000 से भी अधिक खर्च आता है, लंदन में करीब $5,300 और टोक्यो में $4,000 तक लगता है, वहीं भारत के मुंबई में यही काम केवल $656 प्रति वर्ग मीटर की लागत में हो जाता है. यह बहुत कम लागत जापानी डेवलपर्स के लिए भारत को एक बड़ा आकर्षक निवेश गंतव्य बनाती है.

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भारत पर क्या असर पड़ेगा?

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भारत में बढ़ता निवेश भारतीय रियल एस्टेट बाजार के लिए महत्वपूर्ण पूंजी, उच्च गुणवत्ता और अंतर्राष्ट्रीय मानक ला रहा है. इन निवेशों से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और अन्य विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित करने का प्रोत्साहन मिलेगा. जापानी कंपनियां न केवल पारंपरिक ऑफिस और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स, बल्कि लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर जैसे नए सेगमेंट में भी अपनी उन्नत तकनीक और बेहतरीन डिजाइन लाकर निर्माण की गुणवत्ता को बेहतर बना रही हैं.

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