दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित एक होटल में लगी आग ने एक झटके में 21 लोगों का जिंदगी खत्म कर दी. जो लोग यहां छुट्टी मनाने आए थे, उनके लिए आज का दिन उनके जीवन का आखिरी दिन बन गया, मौके से आ रही दिल दहलाने वाली तस्वीरें बयां कर रही हैं कि हादसा कितना खतरनाक रहा होगा. इस हादसे में जो लोग बचे वो भी अस्पताल में घायल पड़े हैं. यहां तक कि लोगों को बचाने गए 10 पुलिस वाले भी आग की चपेट में आकर घायल हो गए हैं.
इस तरह के हादसे से हमें सबक लेने की जरूरत है कि जब भी हम किसी होटल या होम स्टे में ठहरने का प्लान बनाएं तो पूरी जांच पड़ताल बेहद जरूरी है, ये मामला हमारी जिंदगी से जुड़ा हुआ है, जिस आराम और सुकून की तलाश में हम घूमने जाते हैं, वो हमारे लिए इस कदर खतरनाक हो सकता है दिल्ली की घटना उसका बड़ा उदाहरण है.
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अक्सर लोग जब किसी शहर में होटल बुक करते हैं, तो वे वहां की सजावट, वाई-फाई और रील्स बनाने के लिए अच्छे व्यूज देखते हैं, लेकिन सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं. होटलों में आग लगने की घटनाएं कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि लंबे समय से की जा रही लापरवाही का नतीजा होती हैं.
चेक-इन के तुरंत बाद ये 2 मिनट बचा सकते हैं आपकी जान
जैसे ही आप किसी होटल के कमरे में एंट्री करें अपना सामान रखने के बाद सबसे पहले 2 मिनट अपनी सुरक्षा की जांच को दें. हर होटल के कमरे के दरवाजे के पीछे एक इमरजेंसी इवैक्युएशन मैप लगा होता है. उसे ध्यान से देखें और समझें कि आपके कमरे से सबसे नजदीकी फायर एग्जिट किस तरफ है, इसके अलावा, कमरे की छत पर लगे स्मोक डिटेक्टर और वॉटर स्प्रिंकलर पर नजर जरूर डालें. अगर आपको लगे कि आपातकालीन सीढ़ियों के रास्ते में होटल स्टाफ ने गद्दे, कुर्सियां या कोई कबाड़ रखा है, तो तुरंत मैनेजर से शिकायत कर उसे साफ करवाएं.
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अगर होटल में आग लग जाए, तो पैनिक नहीं, ये कदम उठाएं
आग लगने की स्थिति में सबसे पहला नियम है घबराएं नहीं, हड़बड़ाहट में लोग गलत फैसले लेते हैं, अगर गलियारे में धुआं फैल चुका है, तो कभी भी लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, क्योंकि बिजली कटने पर आप उसमें फंस सकते हैं और लिफ्ट का शाफ्ट चिमनी की तरह काम करता है, जिससे उसमें तेजी से धुआं भरता है. बाहर निकलने के लिए हमेशा सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.
अगर आपके कमरे का दरवाजा छूने पर गर्म लग रहा है, तो उसे बिल्कुल न खोलें, क्योंकि बाहर भारी आग हो सकती है. ऐसी स्थिति में दरवाजे के नीचे के गैप को गीले तौलिये या चादर से बंद कर दें ताकि धुआं अंदर न आ सके और खिड़की से बाहर की तरफ देखकर मदद के लिए आवाज लगाएं.
अग्निकांड में ज्यादातर मौतें आग से जलने के कारण नहीं, बल्कि धुएं में मौजूद जहरीली गैसों के दम घुटने से होती हैं. चूंकि गर्म धुआं और जहरीली गैसें हवा में ऊपर की तरफ उठती हैं, इसलिए कमरे या गैलरी में खड़े होकर भागने की गलती न करें. अपनी नाक और मुंह को किसी गीले कपड़े या रुमाल से ढकें और जमीन के करीब होकर घुटनों के बल रेंगते हुए बाहर निकलें. जमीन के पास ऑक्सीजन का स्तर थोड़ा बेहतर होता है, जो आपको सुरक्षित बाहर निकलने तक होश में बनाए रखने में मदद करेगा.
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आजकल हम होटलों की बुकिंग केवल ऑनलाइन स्टार रेटिंग्स और आकर्षक तस्वीरों को देखकर कर लेते हैं. अब समय आ गया है कि हम एक जिम्मेदार और जागरूक ग्राहक बनें. होटल बुक करने से पहले उनके रिव्यूज में सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को भी पढ़ें. अगर संभव हो, तो होटल प्रशासन से पूछें कि क्या उनके पास वैध 'फायर एनओसी' है? जब तक ग्राहक खुद होटल मालिकों से सुरक्षा पर सवाल नहीं करेंगे और असुरक्षित जगहों पर रुकना बंद नहीं करेंगे, तब तक प्रशासन और मैनेजमेंट की नींद नहीं टूटेगी.
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