भीड़ से मुक्ति, 30 मिनट में सफर! 'नमो शहर' कम करेंगे दिल्ली-NCR का बोझ

नमो भारत नेटवर्क के विस्तार और जेवर एयरपोर्ट जैसे आने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ मिलकर, इस पहल में 2041 तक NCR में लाखों लोगों के रहने, आने-जाने और काम करने के तरीके को पूरी तरह बदलने की क्षमता है.

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NCR में बनने वाले 4 'नमो शहर' कैसे बदलेंगे आपकी जिंदगी? (Photo-ITG) NCR में बनने वाले 4 'नमो शहर' कैसे बदलेंगे आपकी जिंदगी? (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:17 PM IST

नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) अब तक के अपने सबसे बड़े शहरी बदलावों में से एक के लिए तैयारी कर रहा है. 'रीजनल प्लान 2041' के तहत, NCR में चार नए "नमो शहर" बनाने का प्रस्ताव है. इनका मकसद तेज़ी से बढ़ती आबादी को जगह देना, कनेक्टिविटी बेहतर करना और दिल्ली और नोएडा, गुरुग्राम और गाज़ियाबाद जैसे मौजूदा शहरी केंद्रों पर दबाव कम करना है.

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2041 तक NCR की आबादी लगभग दोगुनी हो सकती है, जिससे घरों, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव पड़ेगा. दिल्ली में जमीन की कमी और सैटेलाइट शहरों में बढ़ती भीड़ और प्रॉपर्टी की कीमतों को देखते हुए, पॉलिसी बनाने वाले 'डिसेंट्रलाइज़्ड ग्रोथ' को इसका समाधान मान रहे हैं. प्रस्तावित 'नमो शहरों' का मकसद पारंपरिक विकास केंद्रों के बाहर नए आर्थिक और रिहायशी हब बनाना है. 

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प्रस्तावित 'नमो शहर' सेमी-ग्रीनफील्ड शहरी हब होंगे जिन्हें नमो भारत RRTS (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ विकसित किया जाएगा. पारंपरिक शहर विस्तार के विपरीत, ये शहर 'ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) मॉडल का पालन करेंगे, जिसमें रिहायशी, कमर्शियल, रिटेल और मनोरंजन की जगहों को ज़्यादा क्षमता वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट स्टेशनों के आस-पास प्लान किया जाएगा. 

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इसका मकसद यात्रा के समय को कम करना, निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना और टिकाऊ शहरीकरण को बढ़ावा देना है. NCR प्लानिंग बोर्ड ने ऐसे चार शहरों का प्रस्ताव दिया है, जिनमें से हर एक NCR राज्य - दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में विकसित किए जाने की संभावना है. इनकी अंतिम जगहों का चुनाव इसमें शामिल राज्यों के बीच एक कॉम्पिटिटिव प्रोसेस के ज़रिए किया जाएगा.

'रीजनल प्लान 2041' की एक मुख्य विशेषता "30-मिनट NCR" का कॉन्सेप्ट है. इसका विजन घरों, काम की जगहों और ज़रूरी सेवाओं को RRTS कॉरिडोर, मेट्रो सिस्टम, हाईवे और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि निवासी प्रमुख शहरी केंद्रों के बीच आधे घंटे के भीतर यात्रा कर सकें.

केंद्र से ₹5,000 करोड़ की मंजूरी

इन नए शहरी हब के विकास में मदद के लिए, केंद्र ने अगले पांच वर्षों में ₹5,000 करोड़ की सहायता की घोषणा की है. इस पैकेज में ग्रांट, लोन और गारंटी शामिल हैं, जिनका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की रफ़्तार बढ़ाना और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना है. इंडस्ट्री के जानकारों का मानना ​​है कि इस पहल से रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नए मौके मिल सकते हैं.

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भविष्य का लक्ष्य

नमो सिटीज प्रोजेक्ट दिल्ली-केंद्रित विकास से हटकर कई केंद्रों वाले शहरी ढांचे की ओर बढ़ने का एक कदम है. अगर इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो ये नए शहर ऐसे आत्मनिर्भर केंद्र बन सकते हैं, जहां तेज रफ़्तार पब्लिक ट्रांसपोर्ट के आस-पास घर, रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मौजूद होंगी. 
 

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