शुक्रवार को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई उपाय करने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार नहीं चला, बल्कि निफ्टी-सेंसेक्स थोड़ी गिरावट पर बंद हुआ. वहीं अब सोमवार को बड़े गिरावट के संकेत दिखाई दे रहा है.
Gift Nifty 356 पॉइंट नीचे दिख रहा है. इससे एक बात तो साफ है कि सेामवार को भारतीय बाजार एक बड़े गैप-डाऊन के साथ खुल सकता है. साथ ही कई बड़े शेयरों में गिरावट आ सकती है. आइए जानते हैं अचानक ऐसा क्या हुआ है, जो इतनी बड़ी गिरावट की आशंका बढ़ गई है?
अमेरिकी बाजार में भी भारी तबाही
हालांकि, सिर्फ भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि अमेरिकी बाजार में भी भारी गिरावट आई है. डाउ जोन्स से लेकर एस एंड पी इंडेक्स में इस साल की सबसे बड़ी गिरावट आई है. एसएंडपी 500 में 2.64% की गिरावट आई और यह 7,383.74 पर बंद हुआ, जो 10 अक्टूबर, 2025 के बाद से एक दिन में सबसे तेज गिरावट है.
टेक शेयरों वाले नैस्डैक कंपोजिट में 4.18% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 25,709.43 पर बंद हुआ. यह अप्रैल 2025 के बाद से यह इसकी सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है. वहीं डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेजमें भी 1.35% की गिरावट आई और यह 50,866.78 पर बंद हुआ.
क्यों आई इतनी भारी गिरावट?
AI और टेक शेयरों में भारी बिकवाली की वजह से अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है. अब सोमवार को भारतीय बाजार में भी ऐसे ही बड़े गिरावट के संकेत दिखाई दे रहे हैं. इस गिरावट के पीछे, सबसे बड़ी वजह अमेरिकी जॉब डाटा है.
मई महीने के दौरान अमेरिकी जॉब डाटा उम्मीद से बेहतर रहा है, जिस कारण इस साल फेडरल इनटरेस्ट रेस्ट की बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ गई है. फेड रेट इस साल दिसंबर तक 25 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है और उम्मीद है कि जा रही है कि आगे ये बढ़ोतरी और भी बढ़ सकती है. रेट बढ़ने से महंगाई का खतरा भी आने की आशंका है, जिस असर दुनिया और कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है. इसी उम्मीद के कारण शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है.
ट्रेजरी यील्ड बढ़ा
आक्रामक रुख की आशंकाओं के बीच, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी आई है. बॉन्ड की कीमतें और यील्ड विपरीत दिशाओं में चलती हैं और शुक्रवार को बॉन्ड की कीमतों में गिरावट देखी गई, जिससे शेयर बाजार में निवेश कम आकर्षक हो गया, जिसके परिणामस्वरूप शेयरों पर दबाव पड़ा.
अस्थिरता और मुनाफावसूली
मुनाफावसूली की इस लहर ने बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया. वॉल स्ट्रीट का VIX इंडेक्स एक ही दिन में 39% से अधिक बढ़ गया, जो बाजार में चिंता की ओर बदलाव का संकेत देता है.
भू-राजनीतिक अस्थिरता
आर्थिक आंकड़ों के अलावा, वैश्विक अनिश्चितताओं ने भी बाजार की भावना को प्रभावित किया. हिज़्बुल्लाह द्वारा इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम समझौते को अस्वीकार करने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ गया. अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर अस्पष्टता ने भी बेचैनी को और बढ़ा दिया.
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क