अब क्या? US पर सबकी नजर, अचानक भारतीय बाजार में 9 लाख करोड़ डूबे, ट्रंप के बयान से तेल में लगी आग

US-Iran War Updates: अचानक भारतीय शेयर बाजार क्रैश होने की वजह से महज कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. भारतीय बाजार में ट्रंप के बयान के बाद दबाव गहराया.

Advertisement
ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के साथ बातचीत का रास्ता लगभग बंद हो चुका है. (Photo: ITG) ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के साथ बातचीत का रास्ता लगभग बंद हो चुका है. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:04 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. एक तरह से ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम को खत्म करने का ऐलान कर दिया है. जिसने अचानक वैश्विक शेयर बाजारों का मूड बिगाड़ दिया है. ट्रंप के बयान से अब मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ना तय है. 

दरअसल, ट्रंप का ईरान को लेकर बयान भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान आया, जिससे कोहराम मच गया. चौतरफा बिकवाली ने निवेशकों को हिलाकर रख दिया. अचानक लगातार तीन दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों ही औंधे मुंह नीचे आ गिरे. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी फिसलकर 23,800 के लेवल तक पहुंच गया. अचानक बाजार क्रैश होने की वजह से महज कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए.

Advertisement

इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से 4 बड़े कारण हैं-
1. ट्रंप के बयान से बिगड़ा माहौल: बाजार में आई इस सुनामी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा तनाव बढ़ना है. जैसे ही अमेरिका द्वारा ईरान पर नए हवाई हमलों और प्रतिबंधों की खबरें आईं, वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बन गया, उसके बाद ट्रंप का बयान आ गया. उन्होंने कहा कि ईरान बहुत बड़ा झूठा है, उसके साथ अब कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए. ईरान के साथ बातचीत करके समय बर्बाद करने जैसा है.  ट्रंप ने ईरानी लोगों के बारे में कहा, 'वे बीमार लोग हैं. मैं उनसे कोई डील नहीं करना चाहता. मुझे लगता है कि ईरान के साथ समझौते का दौर अब खत्म हो चुका है.'

2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल: ईरान पर ट्रंप का सख्त बयान आते ही कच्चे तेल में असर दिखने लगा, अचानक भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब  पहुंच गया. कीमतों में 6 फीसदी तक की उछाल दर्ज की गई. भारत के एक बार फिर ये खतरे की घंटी है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है. 

Advertisement

3. डॉलर इंडेक्स में मजबूती और रुपये में रिकॉर्ड गिरावट: वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के कारण 'सेफ हेवन' माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर में मजबूती आई. इसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा और रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर 95.55 प्रति डॉलर पर आ गिरा. कमजोर रुपये के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से ताबड़तोड़ बिकवाली की गई. 

4. इंडिया VIX में जोरदार उछाल: सबसे ज्यादा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से बाजार का मूड बिगड़ा है. महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं. तनाव बढ़ने से भारत और अमेरिका, दोनों जगह बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई है. यही नहीं, बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की वजह से इंडिया VIX में जबरदस्त उछाल आया. बुधवार को यह 26.03% के उछाल के साथ 14.68 पर बंद हुआ. इंट्राडे में यह 15.16 तक पहुंच गया था. इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी हाई होने की आशंका है तो इसके कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है. 

इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों गिरावट दर्ज की थी, पिछले सत्र में सेमीकंडक्टर और बड़ी टेक कंपनियों (जैसे इंटेल और एएमडी) के शेयरों में 6% से 9% तक की भारी गिरावट देखी गई थी. वहीं दक्षिण कोरिया के बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है, बुधवार को कोस्पी में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई. 

Advertisement

अगर भारतीय बाजार की बात करें तो बुधवार को पीएसयू बैंक, रियल्टी, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा पिटे. मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और पीएसयू बैंकों में भारी नुकसान दर्ज हुआ. पीएसयू और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स 2.5 फीसदी से अधिक टूट गए तो निफ्टी एफएमसीजी भी करीब ढाई फीसदी नीचे आ गया. ऑटो सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक टूटा. हालांकि अब सबकी नजर अमेरिकी शेयर बाजार पर टिकी है. बुधवार अमेरिकी मार्केट की क्लोजिंग कैसी रहती है, इसपर ग्लोबल मार्केट की चाल निर्भर करेगी. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »