भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी समिति की बैठक में हुए फैसले का ऐलान हो चुका है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ऐलान करते हुए कहा कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. रेपो रेट 5.25% पर अपरिवर्तित रखा गया है. इसका मतलब है कि आपके लोन की ईएमआई में बढ़ोतरी नहीं होगी. आपके लोन का ब्याज स्थिर रहेगा.
गवर्नर ने कहा कि ग्लोबल स्तर पर कई सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को बढ़ा रहे हैं, लेकिन आरबीआई की बैठक में रेपो रेट को अनचेंज रखने का फैसला लिया गया है. ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता देखी गई है और सप्लाई चेन रुकने से मार्केट में भी उतार-चढ़ाव हुआ है. हालांकि भारत की इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है. हम इस समय भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और इकोनॉमी स्थिर बनी हुई है.
इससे पहले आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 पॉइंट की दर कटौती की है. हालांकि, पिछले मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक से कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं महंगाई की बात करें तो भारत में खुदरा महंगाई दर अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48% हो गई, जो RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से कम रही.
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत
भारत का विदेशी मुद्रा भंड़ार $682.3 बिलियन डॉलर पर बना हुआ है. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बीमा सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई प्रोग्राम सफल रहा है.
महंगाई पर क्या बोले गवर्नर?
गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मॉनिटरी पॉलिसी समिति (MPC) की बैठक के समापन के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई के नजरिए को 5.1 प्रतिशत पर अनुमानित किया है, जो पहले के अनुमान से लगभग 50 आधार अंक अधिक है. उन्होंने पहली तिमाही में महंगाई 4.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. इस साल कोर महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
महंगाई को लेकर चिंता
उन्होंने कहा कि मानसून में देरी की संभावना और अलनीनो के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, जिससे महंगाई को लेकर थोड़ी चिंता रहेगी. हालांकि, ये आरबीआई की सीमा के आसपास रहने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि खाद्य महंगाई दर में मामूली वृद्धि हुई, जबकि ईंधन महंगाई में कोई खास बदलाव नहीं आया, और साथ ही यह भी कहा कि मूल महंगाई स्थिर बनी हुई है. पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई की स्थिति नीति समीक्षा का प्रमुख केंद्र बिंदु रही.
जीडीपी का अनुमान
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी समीक्षा बैठक के बाद बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 जून को वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की रीयल GDP ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है. पहली तिमाही में यह 6.8 प्रतिशत से कम होकर 6.6 प्रतिशत हो गई. दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत हो गई है. तीसरी तिमाही में 7 प्रतिशत से कम होकर 6.5 प्रतिशत हो गई है. चौथी तिमाही में ये 7.2 प्रतिशत से घटकर 6.8 प्रतिशत हो गई है.
आरबीआई के फैसले पर एक्सपर्ट्स की राय
आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने के फैसले पर बेसिक होम लोन के CEO अतुल मोंगा ने कहा कि यह कदम आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने वाला है. वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों के बीच इस स्थिरता से घरेलू खपत, निवेश और व्यावसायिक योजनाओं को मजबूती मिलेगी.
होम लोन बाजार के लिए यह फैसला बड़ी राहत है. इससे ब्याज दरें स्थिर रहेंगी, जिससे फ्लोटिंग-रेट वाले मौजूदा ग्राहकों और विशेषकर किफायती व मध्यम आय वर्ग के नए खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा. स्थिर कर्ज दरों से घरों की मांग बनी रहेगी और रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार बरकरार रहेगी.
वहीं आरबीआई के इस फैसले पर बीवाईएसटी की संस्थापक और प्रबंधन ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमन वेंकटेशन ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और महंगाई के जोखिमों के बीच यह एक संतुलित कदम है. यह ठहराव सूक्ष्म और छोटे उद्यमियों (MSMEs) को एक भरोसेमंद माहौल देता है.
कर्ज की स्थिर लागत से उद्यमी अपने कैश फ्लो, लोन भुगतान और निवेश की बेहतर योजना बना सकेंगे, क्योंकि देश के विकास और निर्यात में MSME सेक्टर का बड़ा योगदान है, इसलिए ऋण की स्थिति सामान्य रहना बहुत जरूरी है. इस समय का उपयोग छोटे उद्यमियों तक मेंटरिंग और बेहतर वर्किंग कैपिटल पहुंचाने के लिए होना चाहिए.
RBI का सही फैसला, ग्रोथ पर फोकस
वहीं 'लेंडिंगप्लेट' के सीएफओ विजय कुमार सिंह ने कहा कि आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखना आर्थिक परिस्थितियों के बीच एक समझदारी भरा फैसला है. स्थिर ब्याज दरें ऋणदाताओं और कर्जदारों को बेहतर वित्तीय नियोजन की निश्चितता देती हैं. इससे डिजिटल लेंडिंग इकोसिस्टम में ऋण वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा, विशेषकर उन वंचित वर्गों में जिन्हें औपचारिक लोन की जरूरत है। यह कदम जिम्मेदारीपूर्ण और समावेशी लोन को बढ़ावा देगा.
'भारतलोन' के बिजनेस हेड शक्ति शेखावत ने कहा कि आरबीआई का यह फैसला कर्जदारों और ऋणदाताओं दोनों को स्थिरता और निश्चितता प्रदान करता है. स्थिर ब्याज दरों का यह माहौल सोच-समझकर लोन लेने के फैसलों और क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देगा. बाजार में डिजिटल लोन की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और आरबीआई का यह संतुलित रुख उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक रफ्तार को भी गति देगा.
Rupee112 के बिजनेस हेड कुलदीप यदुवंशी ने कहा कि दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला लेंडिंग इकोसिस्टम के लिए एक सकारात्मक संकेत है. कर्ज की स्थिर स्थितियां उपभोक्ताओं को बेहतर योजना बनाने में मदद करती हैं और जिम्मेदारी से लोन लेने को बढ़ावा देती हैं. डिजिटल लोन के बढ़ते चलन के बीच यह अनुमानित नीति वित्तीय समावेशन को बढ़ाएगी, कर्जदारों का भरोसा मजबूत करेगी और टिकाऊ क्रेडिट ग्रोथ में योगदान देगी.
आजतक बिजनेस डेस्क