NSE IPO: खत्म हो रहा 10 साल का इंतजार, NSE आईपीओ से कौन-कौन होगा मालामाल?

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को शेयर बाजार में लिस्ट कराए जाने की प्रक्रिया साल 2016 में शुरू की गई थी, लेकिन बार-बार इसके प्रोसेस में अड़चनें आती गईं. आखिरकार अब निवेशकों की उम्मीद पूरी होती नजर आ रही है.

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2016 में शुरू हुई थी एनएसई आईपीओ लाने की प्रक्रिया. (Photo: File/ITG ) 2016 में शुरू हुई थी एनएसई आईपीओ लाने की प्रक्रिया. (Photo: File/ITG )

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने बीते बुधवार को अपने आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (NSE IPO) के लिए ड्राफ्ट पेपर मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) के पास जदमा करा दिए हैं. ऐसा होने से बीते 10 साल का लंबा इंतजार खत्म होता नजर आया है, क्योंकि इसे पब्लिक करने के लिस्टिंग प्रोसेस प्रक्रिया पहली बार साल 2016 में शुरू हुई थी, लेकिन तमाम कारणों के चलते ये बार-बार फेल होती चली गई.  

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एनएसई का आईपीओ और इसकी लिस्टिंग न सिर्फ एक्सचेंज के लिए, बल्कि उन सबसे बड़े निवेशकों के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकती है, जो इसमें अपनी होल्डिंग वैल्यू को अनलॉक करने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. 

सबसे बड़ा फायदा इन्हें होगा
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट की मानें, तो NSE IPO से शेयर बिक्री में भाग लेने से टॉप शेयरहोल्डर्स को लगभग 25,000 करोड़ रुपये का अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. इनमें सबसे ज्यादा फायदे में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), सिंगापुर स्थित टेमासेक और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड रह सकते हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि एनएसई का आईपीओ अब तक का भारत का सबसे बड़ा इश्यू होगा. 

इतना हो सकता है प्राइस बैंड!
NSE IPO का साइज करीब 30000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद जताई जा रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आईपीओ प्राइस बैंड करीब 1,900 रुपये प्रति शेयर तय किया जा सकता है, जो अनलिस्टेड मार्केट में इसके वर्तमान प्राइस की तुलना में 5% से 10% की छूट होगी. हाई लेवल पर एक्सचेंज की वैल्यूएशन बढ़कर करीब 57 अरब डॉलर होगी. 

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ऐसे लग गया पूरा एक दशक
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयर मार्केट डेब्यू के लिए करीब 10 साल का समय लग गया है. भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में एनएसई की आईपीओ यात्रा सबसे लंबी यात्राओं में से एक साबित हुई है. पहली बार 2016 में आईपीओ के लिए पेपर जमा कराए गए थे, लेकिन रेग्युलेटरी जांच, कानूनी विवाद और एनएसई को-लोकेशन केस के कारण हर बार योजना पटरी से उतर गई.

इससे अलग बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज साल 2017 में ही पब्लिक हो गया था. हालांकि, इंतजार 2026 में खत्म होता नजर आया और एनएसई ने फिर से ड्राफ्ट पेपर मार्केट रेग्युलेटर के पास जमा करा दिए. 

किसे कितने फायदे का अनुमान 
SBI सबसे ज्यादा फायदे में रहता हुआ नजर आ रहा है. रॉयटर्स के मुताबिक, DRHP के आधार पर जताए जा रहे अनुमानों से पता चलता है कि एसबीआई एक्सचेंज में अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से की बिक्री से लगभग 4,700 करोड़ रुपये कमा सकता है. अन्य प्रमुख लाभार्थियों में मॉर्गन स्टेनली का मॉरीशस स्थित फंड एमएस स्ट्रेटेजिक, जो लगभग 2,934 करोड़ रुपये का लाभ कमा सकता है.

सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड टेमासेक को अपनी अरंडा इन्वेस्टमेंट शाखा के जरिए शेयर बिक्री से करीब 2,067 करोड़ रुपये का लाभ हो सकता है. वहीं कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB), करीब 1,871 करोड़ रुपये कमा सकता है. कुल मिलाकर, इस पेशकश में भाग लेने वाले टॉप-10 स्टेकहोल्डर्स कंबाइंड रूप से करीब 2.6 अरब डॉलर (लगभग 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) कमा सकते हैं.

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