शेयरों पर दो तरह के टैक्स लगते हैं. पहला- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG), जो 12 महीने से ज्यादा समय तक अपने पोर्टफोलियो में शेयर या फंड रखने के बाद बेचे जाते हैं, तो उन शेयरों पर यह टैक्स लगता है. वहीं दूसरा- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स (STCG), जो 12 महीने से कम समय तक रखे गए शेयरों पर लगता है.
अब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को लेकर सरकार का बयान सामने आया है. ऐसे सवाल उठ रहे थे कि लॉन्गटर्म कैपिटल गेन टैक्स को समाप्त कर दिया जाएगा और निवेशकों को बड़ी राहत दी जाएगी, लेकिन सरकार ने सोमवार को लिस्टेड शेयरो पर LTCG टैक्स को समाप्त करने की संभवनाओं से इनकार कर दिया है और कहा है कि रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए इस टैक्स को समाप्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
लोकसभा में एक सवाल का जबवा देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि बाजार के कुछ वर्गों द्वारा निवेशकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए इस टैक्स को हटाने की मांग के बावजूद, केंद्र की फिलहाल LTCG को वापस लेने की कोई योजना नहीं है.
टैक्स की समय-समय पर जांच
वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि मैक्रोइकॉनॉमिक स्थितियों पर विचार करने के बाद सालाना बजट प्रोसेस के तौर पर कैपिटल गेन टैक्स रेट्स पॉलिसी समय-समय पर समीक्षा के तहत बदलते हैं. यह स्पष्टीकरण निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों की ओर से टैक्स को वापस लेने की लगातार मांगों के बीच आया है, जिनमें से कुछ का तर्क है कि यह लॉन्गटर्म निवेश को हतोत्साहित करता है और टैक्स के बाद मुनाफे को कम करता है. वहीं सरकार द्वारा हाल ही में सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) के लिए टैक्स छूट की घोषणा के बाद, अन्य लोगों ने घरेलू निवेशकों और कुछ विदेशी निवेशकों के बीच समानता की मांग की है.
एलटीसीजी से कितना कलेक्शन
हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि इस तरह के कदम के लिए बहुत कम रुचि है और इक्विटी गेन से टैक्स कलेक्शन में तेज बढ़ोतरी हुई है. संसद में डेटा शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि इक्विटी ट्रांजैक्शन पर कैपिटल गेन टैक्स से रेवेन्यू, असेसमेंट ईयर 2025-26 में पिछले साल के 72,249 करोड़ रुपये से करीब 78 फीसदी बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये हो गया है.
एलटीसीजी के तहत कितना टैक्स लगता है?
किसी भी शेयर या फंड पर लॉन्गटर्म कैपिटल गेन टैक्स तब लगता है जब लिस्टेड शेयरों या इक्विटी फंड़ों को एक साल से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचा जाता है. मौजूदा टैक्स व्यवस्था के तहत, एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के लाभ पर 12.5% की दर से टैक्स लगता है , जबकि उस सीमा तक के लाभ फ्री रहते हैं. लिस्टेड शेयरों पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 20 फीसदी की दर से टैक्स लगता है. जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में घोषित बदलाओं के बाद से इन दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
...तो शेयर बाजार में आती धांसू तेजी?
पिछले एक साल में यह मुद्दा कई बार फिर सामने आया है, क्योंकि शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए और खुदरा निवेशकों की भागीदारी में भारी उछाल आया. कई निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का तर्क था कि लॉन्गटर्म कैपटिल गेन टैक्स (एलटीसीजी) की दर कम करने या छूट की सीमा बढ़ाने से दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है और बाजार की भावना में सुधार हो सकता है, जिससे शेयर बाजार में अच्छी तेजी आ सकती है.
हालांकि, सरकार के रुख ने इन उम्मीदों को बार-बार कमज़ोर किया है. संसद में पहले भी इस टैक्स को समाप्त करने के संबंध में इसी तरह के सवाल उठाए गए हैं, और वित्त मंत्रालय लगातार यही कहता रहा है कि इसे वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सोमवार को जारी स्पष्टीकरण से इस स्थिति की और पुष्टि होती है. हालांकि सरकार का कहना है कि कर नीतियों की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वह इक्विटी निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत कर (एलटीसीजी) को समाप्त करने की योजना बना रही है.
आजतक बिजनेस डेस्क