अमेरिका और ईरान के बीच नए हमले रुकने के बाद भी कच्चे तेल के दाम में तेजी देखी जा रही है, क्योंकि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अंतरिम शांति समझौते पर संकट मंडरा रहा है. जिस कारण एशियाई बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव दिखाई दिया है.
हालांकि अभी भी होर्मुज खुला हुआ है, जिससे तेल का प्रवाह जारी है. लेकिन बाजारों में गिरावट जारी है. शुरुआती कारोबार में S&P500 और नैस्डैक के वायदा भाव में 0.4% की बढ़त दर्ज की गई. दक्षिण कोरिया का केओएसपीआई लगभग 2% गिर गया. जापान का निक्केई में 1% की गिरावट आई. जबकि हांगकांग के मार्केट और चीन के बाजार में तेजी देखने को मिला है.
भारतीय बाजार में क्या होगा?
तेल की कीमतें ऊपर जाने और शु्क्रवार को ग्लोबल स्तर पर भारी गिरावट के बाद भी भारतीय बाजार की स्ट्रक्चर मजबूत बना हुआ है. भारतीय बाजार में गैपअप के संकेत दिखाई दे रहे हैं. अनुमान है कि निफ्टी आज 34 अंक ऊपर खुल सकता है. वहीं बैंक निफ्टी बैंक में भी तेजी का अनुमान है.
तेल की कीमतों में तेजी
शांति समझौते के भविष्य को लेकर चिंताओं के चलते तेल की कीमतों में उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड वायदा 0.85% बढ़कर 72.6 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1% से अधिक बढ़कर 70.01 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. भले ही तेल की कीमतों में आज तेजी देखी जा रही है, लेकिन जंग के दौरान जितनी तेजी थी, वह अब खत्म हो चुकी है. अब तेल जंग से पहले वाली स्थिति में आ चुका है. हालांकि, अभी भी तनाव के कारण स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.
फेड के फैसले का भी डर
शेयर बाजारों को फेडरल रिजर्व बैंक के फैसले का भी डर सता रहा है. अनुमान है कि फेडरल रिजर्व बैंक अपनी अगली बैठक के दौरान ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है. इससे कंपनियों की अर्निंग पर असर होगा और शेयर बाजारों में गिरावट आ सकती है.
एआई को लेकर भी चिंता
निवेशकों की यह चिंता कि AI से संबंधित कंपनियों की वैल्यूवेशन सालों की तेजी के बाद बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं, बाजारों पर दबाव डाल रही है, जिसमें माइक्रोन के मजबूत कमाई अनूमान और पिछले सप्ताह ऐप्पल द्वारा कीमतों में की गई वृद्धि ने विपरीत चुनौतियों को पैदा कर दिया है.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क