New Income Tax Act 2025: HRA, सैलरी और टैक्‍स... क्‍या-क्‍या बदलेगा? 1 अप्रैल से नया कानून

1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्‍स कानून लागू होने जा रहा है, जिसमें सैलरी स्‍ट्रक्‍चर से लेकर टैक्‍स डिडक्‍शन संबंधी नियम में बदलाव होगा. साथ ही रिटर्न फाइल करने के लिए असेसमेंट ईयर और फाइनेंशियल ईयर को खत्‍म करने सिर्फ टैक्‍स ईयर कर दिया गया है.

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1 अप्रैल से नया इनकम टैक्‍स कानून. (Photo: Representative/ITG) 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्‍स कानून. (Photo: Representative/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 29 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

नई फाइनेंशियल ईयर शुरू होने के साथ ही एक अप्रैल से नया आयकर अधिनियम (New Tax Law 2025) लागू हो रहा है. सैलरी टैक्‍सपेयर्स के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, जिसमें HRA, Salary Structure और टैक्‍स डिडक्‍शन समेत कई बदलाव हो रहे हैं. इस बदलाव के पीछे सरकार का मकसद दशकों से ज्‍यादा जटिल हो चुके टैक्‍स सिस्‍टम को सरल बनाना है. 

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HRA और सैलरी में बदलाव 
सैलरी वाले कम्रचारियों के लिए मकान किराया भत्ता (HRA) टैक्‍स बचाने के लिए सबसे खास साधनों में से एक माना जाता है, लेकिन नई व्‍यवस्‍था के तहत इसमें एक खास तरह का बदलाव किया गया है. बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों को अब 50 फीसदी HRA छूट का लाभ मिलेगा, जिससे वे महानगरों के समान लाभ पा सकेंगे. लेकिन वहीं दिल्‍ली एनसीआर में रहने वाले लोगों को 40 फीसदी तक ही HRA के तहत टैक्‍स डिडक्‍शन का लाभ दिया जाएगा. 

यह बदलाव अर्बन सैलरी एम्‍प्‍लाई के लिए खास है, क्योंकि इससे तेजी से डेवलप हो रहे शहरों में सैलरी स्‍ट्रक्‍चर्स की टैक्‍स क्षमता में बढ़ोतरी हुई है. कंपनी HRA के नए नियम को लागू करने के लिए सैलरी को फिर तय कर सकते हैं, जिससे नई व्यवस्था के तहत सैलरी स्‍ट्रक्‍चर ज्‍यादा कीफायती हो सकता है. नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला मेडिकल लोन पर छूट की सीमा को ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख करने का प्रस्ताव है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय नियोजन में अतिरिक्त राहत मिलेगी. 

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अलाउंस में बड़ा टैक्‍स छूट
सबसे खास बदलाव में से एक बच्‍चों से संबंधित खर्चों के लिए दी जाने वाली छूट में बढ़ोतरी की गई है. बच्‍चों की एजुकेशन अलाउंस अमाउंट बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह और प्रति बच्‍चा कर दिया गया है, जो पहले 100 रुपये था. इसी तरह, हॉस्‍टल अलाउंस भी बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह प्रति बच्‍चा कर दिया गया है, जबकि पहले यह मात्रा 300 रुपये था. 

यह खास बदलाव का संकेत हैं, खासकर मिडिल क्‍लास के सैलरी परिवारों के लिए, जहां शिक्षा खर्च घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्‍सा होता है. इस कदम से वे डिडक्‍शन जो पहले नहीं थे, अब टैक्‍स बचत में शामिल हो चुके हैं.  

आसान टैक्‍स सिस्‍टम 
नए कानून के तहत किए गए संरचनात्‍मक बदलावों में फाइनेंशिय ईयर और असेसमेंट ईयर को एक ही 'टैक्‍स ईयर' में बदल दिया गया है, जिसे अप्रैल से मार्च तक की 12 महीने की अवधि के बीच माना जाएगा. इस बदलाव से टैक्‍स फाइल करना आसान हो गया है. खासकर पहली बार टैक्‍स रिटर्न फाइल करने वालों के लिए ये कफ्यूजन दूर हो चुका है.  

इसके अलावा, सरकार ने उपयोग में सुधार लाने और दिक्कतों को कम करने के उद्देश्य से आयकर रिटर्न (ITR) डॉक्‍यूमेंट्स को नए सिरे से डिजाइन करके जारी करने की योजना बनाई है.

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टैक्स स्लैब में नहीं कोई बदलाव 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट 2026 स्‍पीच में ऐलान किया कि आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, लेकिन टैक्‍स स्लैब अनचेंज रहेंगे. नए कानून के तहत 2025-2026 के टैक्‍स स्लैब फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में कमाए इनकम पर लागू होंगे.

अनुपालन आसान बनाना 
नए नियमों से कुछ अनुपालन आवश्यकताओं में भी ढील दी गई है. वाहन खरीद और कैश जमा जैसे लेन-देन में अनिवार्य पैन नंबर बताने की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे छोटे लेन-देनों का बोझ कम हो गया है. साथ ही कैपिटल मार्केट में नियामक निगरानी को मजबूत किया गया है. स्‍टॉक एक्‍सचेंजों को अब ये काम करने होंगे... 

  • सात सालों तक ऑडिट ट्रेल बनाए रखें. 
  • लेन-देन के रिकॉर्ड को हटाने से रोकें. 
  • संशोधित लेन-देन पर मंथली रिपोर्ट जमा करें. 

इससे ट्रांसपैरेंसी में सुधार होगा और निवेशकों के हितों की रक्षा होगी. 

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