नीतीश की सियासत कैसे 21 साल में 360 डिग्री घूम गई... सांसदी छोड़कर सीएम बने थे, अब सीएम पद छोड़कर सांसदी करेंगे

नीतीश कुमार ने अपनी सियासी पारी का आगाज आपातकाल के दौर में शुरू किया, लेकिन उन्हें राजनीतिक बुलंदी 20वीं सदी में मिली. नीतीश ने सांसद रहते हुए दोबारा बिहार के सीएम बने और अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर सांसदी करेंगे. इस तरह नीतीश की सियासत 360 डिग्री घूम गई है.

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बिहार के सीएम पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे नीतीश कुमार (Photo-PTI) बिहार के सीएम पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे नीतीश कुमार (Photo-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:21 AM IST

राज्यसभा के लिए नामांकन करते ही नीतीश कुमार की राजनीतिक 360 डिग्री पर घूम गई है. नीतीश कुमार ने 2005 में लोकसभा सदस्य रहते बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद से बिहार की सत्ता नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सिमटी रही, लेकिन अब 21 साल के बाद सीएम रहते हुए नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला किया है.  

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नीतीश कुमार की राजनीति का संयोग है या फिर सियासी विदाई का प्रयोग. नीतीश कुमार ने राज्यसभा के नामांकन से पहले अपने एक्स पर एक लंबी-चौड़ी पोस्ट लिखकर कहा कि उनकी इच्छा राज्यसभा जाने की है. उन्होंने कहा कि संसदीय राजनीति में बिहार विधानमंडल के दोनों सदन का सदस्य रह लिया हूं और संसद के दोनों सदन का सदस्य रहने की ख्वाहिश है. 

लोकसभा के सदस्य नीतीश कुमार चार बार रह चुके हैं और अब राजसभा सदस्य बनने की अधूरी इच्छा भी पूरी हो रही है. नीतीश के चारों सदन की इच्छा दो दशक तक सीएम रहने के बाद पूरी हो रही है. इस तरह नीतीश ने सांसदी छोड़कर सीएम बने थे और अब सीएम की कुर्सी छोड़कर सांसदीय करेंगे? 

सांसद रहते नीतीश दो बार सीएम बने 
नीतीश कुमार अपने राजनीतिक करियर में 1989 से लेकर 2005 तक लगातार लोकसभा के सांसद रहे. इस दौरान नीतीश कुमार दो बार बिहार के सीएम बने. सांसद रहते हुए नीतीश कुमार सबसे पहले साल 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के चलते सात दिन के बाद सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था. नीतीश कुमार संसद के सदस्य बने रहे. इसके बाद दोबारा सीएम बनने का मौका साल 2005 में बना. 

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2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार चौथी बार सांसद चुने गए थे. एक साल के बाद 2005 में दो बार बिहार विधानसभा चुनाव हुए. पहली बार किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल सका था. इसके बाद दोबारा अक्तूबर 2005 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें एनडीए को बहुमत मिला तो सत्ता का ताज नीतीश कुमार के सिर सजा. लोकसभा के सांसद रहते हुए नीतीश कुमार ने दूसरी बार से 24 नवंबर 2005​ को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

सीएम की कुर्सी छोड़कर सांसदी करेंगे
बिहार की सियासत 2005 से नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सिमटी रही. कुछ समय छोड़कर नीतीश कुमार 2005 से लेकर अभी तक मुख्यमंत्री हैं, लेकिन अब राज्यसभा में जाने के बाद फैसले सीएम पद की छोड़ना होगा. हालांकि, नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वे अगले पांच वर्षों तक सीएम शायद ही रह पाएं, लेकिन इसे विराम कब देंगे, इसके बारे में कोई तिथि तय नहीं की गई थी. यह तिथि इतनी करीब होगी, इसका अनुमान नहीं थाय

नीतीश के मुताबिक, राज्यसभा में जाने की उनकी इच्छा थी. यह वादा भी किया कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका सहयोग जारी रहेगा। विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा. अब बताया जा रहा है कि राज्यसभा जाने का निर्णय नीतीश कुमार का अपपना था, लेकिन यह बात नीतीश के समर्थक को हजम नहीं हो रही है. जेडीयू के नेता और कार्यकर्ता जगह-जगह सड़क पर उतर गए और विरोध प्रदर्शन किया. 

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नीतीश की सियासत 360 डिग्री पर घूमी

नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज आपातकाल के दौर में शुरू किया, लेकिन उन्हें सफलता 1985 के चुनाव में मिली. 1985 में विधायक बने और दो साल बाद युवा लोकदल के अध्यक्ष और फिर जनता दल के महासचिव. 1989 से पहली बार लोकसभा सांसद बने और केन्द्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाई. 

वर्ष 1991 में नीतीश कुमार दोबारा लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन 1994 में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर समता पार्टी की स्थापना किया था. 1996 में वे लोकसभा के लिए चुने गए थे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया. वे लगातार वर्ष 1989 से लेकर 2004 तक बाढ़ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद बने. 

1990 में वीपी सिंह की सरकार में पहली बार केंद्रीय मंत्रीमंडल में बतौर कृषि राज्यमंत्री शामिल हुए थे. इसके बाद 2001 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर रेल मंत्रालय रहे. इसके बाद 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया, उसके बाद से विधान परिषद के सदस्य बने. इस तरह अभी तक बिहार के विधान परिषद के सदस्य रहे और मुख्यमंत्री बनते रहे. 

साल 2013 में बीजेपी न नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री को चेहरा घोषित किया था तब नीतीश कुमार ने NDA का साथ छोड़ दिया था, लेकिन 2017 में दोबारा से फिर एनडीए के साथ आ गए. इसके बाद 2022 में फिर एनडीए से अलग हुए, लेकिन 2024 में दोबारा वापसी कर गए.

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2025 बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड जीत मिली तो नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के सीएम बने, लेकिन अब चार महीने के बाद सीएम पद से मोहभंग हो गया है और फिर से सांसदी करने के लिए राज्यसभा का रास्ता अपनाया है. इस तरह नीतीश कुमार ने जहां से आकर बिहार की सत्ता अपने हाथ में ली थी और अब फिर से वहीं लौटने का फैसला किया है.

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