Reel और अश्लील वीडियो देखने वाले सरकारी कर्मचारी हो जाएं सावधान, बिहार सरकार ले लिया बड़ा फैसला

बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सेवा नियमावली में व्यापक संशोधन किया है. कैबिनेट ने बिहार सरकार सेवक आचार संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी दी है. नए नियमों के तहत सोशल मीडिया अकाउंट, पोस्ट, वीडियो, राय और गोपनीय जानकारी साझा करने पर सख्त नियंत्रण रहेगा.

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सोशल मीडिया को लेकर नए नियम (Photo: Representational) सोशल मीडिया को लेकर नए नियम (Photo: Representational)

शशि भूषण कुमार

  • पटना ,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:42 PM IST

पटना में नीतीश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. कैबिनेट की ब्रीफिंग के दौरान शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र ने बिहार सरकार सेवक आचार संशोधन नियमावली 2026 की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग एप्स के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए यह संशोधन जरूरी था.

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डॉ. राजेंद्र ने कहा कि पहले नियमावली में फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का अलग से उल्लेख नहीं था, लेकिन इनके दुरुपयोग को कदाचार माना जाता रहा है. हाल के मामलों को देखते हुए सरकार ने सोशल मीडिया पर सरकारी सेवकों के व्यवहार को लेकर स्पष्ट और सख्त नियम तय किए हैं.

सोशल मीडिया पर नीतीश सरकार की सख्ती

नए नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी सेवक अपने नाम या छद्म नाम से सोशल मीडिया खाता सक्षम पदाधिकारी की अनुमति के बिना नहीं बना सकेगा. सरकारी ईमेल या मोबाइल नंबर का उपयोग निजी सोशल मीडिया अकाउंट के लिए नहीं किया जाएगा. सोशल मीडिया पर ऐसी कोई पोस्ट नहीं की जा सकेगी जिससे पद की गरिमा कम हो या सरकार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे.

सरकारी कर्मचारी अश्लील, भड़काऊ या असत्य सामग्री पोस्ट नहीं कर सकेंगे. गुमनाम अकाउंट चलाने पर रोक होगी. सरकारी नीतियों, योजनाओं, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों पर व्यक्तिगत राय देना प्रतिबंधित रहेगा. किसी भी तरह की संवेदनशील या गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकेगी.

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बिहार में बदले सोशल मीडिया के नियम


कार्यस्थल या बैठकों के वीडियो, रील या लाइव प्रसारण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है. शिकायतकर्ता के संवाद, आदेश से जुड़े दस्तावेज, रिपोर्ट या प्रार्थना पत्र सोशल मीडिया पर डालना भी मना होगा. सरकारी सेवक अपने सोशल मीडिया अकाउंट से किसी तरह की कमाई नहीं कर सकेंगे. जाति या धर्म के आधार पर किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी पर भी रोक रहेगी.
 

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