भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद पुराने केस की गूंज, मुजफ्फरपुर कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में कोर्ट की सुनवाई शुरू

भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद 2007 के मुजफ्फरपुर कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ मामले की फिर चर्चा तेज हो गई है. इस मामले में वर्तमान डीएसपी राजेश शर्मा का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. अदालत में सुनवाई शुरू हो चुकी है और अगली तारीख 15 जुलाई 2026 तय की गई है.

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15 जुलाई को अगली तारीख.(File Photo: ITG) 15 जुलाई को अगली तारीख.(File Photo: ITG)

मणि भूषण शर्मा

  • मुजफ्फरपुर,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:21 PM IST

भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर की गूंज के बीच अब 19 साल पुराने मुजफ्फरपुर के कथित फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले ने फिर से सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी हैं. इस मामले में तत्कालीन सदर थाना प्रभारी और वर्तमान डीएसपी राजेश शर्मा का नाम एक बार फिर चर्चा में है. इसी बीच 2007 के इस मामले की सुनवाई भी मुजफ्फरपुर की अदालत में शुरू हो गई है.

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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जुलाई 2026 की तारीख तय की है. पिछले दो दिनों से इस प्रकरण पर सुनवाई हुई, जिसके बाद एक बार फिर यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है.

यह भी पढ़ें: जिस SDPO पर दर्ज है भरत तिवारी एनकाउंटर की FIR, उसे बिहार सरकार ने दे दी नई पोस्टिंग

दरअसल, यह पूरा मामला 4 नवंबर 2007 का है. आरोप है कि ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एमआईटी के पास पुलिस मुठभेड़ में 16 वर्षीय मनीष महिवाल, 22 वर्षीय मुकुल ठाकुर और 25 वर्षीय सुबोध कुमार सिंह उर्फ दारा सिंह की मौत हुई थी. उस समय पुलिस ने इसे मुठभेड़ बताया था, जबकि मृतकों के परिजनों ने शुरू से ही इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया.

'पूछताछ के नाम पर घर से ले गई थी पुलिस', मां का आरोप

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मृतक मनीष महिवाल की मां अनीता देवी का आरोप है कि छठ पूजा से पहले पुलिस उनके बेटे को पूछताछ के नाम पर घर से लेकर गई थी. अगले दिन उन्हें बेटे के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना मिली.

अनीता देवी का कहना है कि उनके बेटे की हिरासत में लेने के बाद कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय की लड़ाई लड़ने के दौरान उन्हें लगातार धमकियां भी मिलीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

उन्होंने तत्कालीन चार थाना प्रभारियों समेत सात पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अदालत और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया. अब इस मामले की सुनवाई फिर से अदालत में चल रही है.

CID जांच हुई, मानवाधिकार आयोग ने मुआवजे का दिया था आदेश

मामले की जांच के दौरान तत्कालीन तिरहुत डीआईजी अरविंद पांडे ने इसकी CID जांच की सिफारिश की थी. इसके बाद CID ने जांच भी की, लेकिन मानवाधिकार आयोग उसकी रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ.

मानवाधिकार आयोग ने इसे मानवाधिकार उल्लंघन का मामला मानते हुए वर्ष 2012 में तीनों मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था.

इसके बाद वर्ष 2013 में अनीता देवी ने अदालत में परिवाद दायर किया. यह मामला फिलहाल न्यायिक दंडाधिकारी अनुराग वर्मा की अदालत में विचाराधीन है.

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15 जुलाई को अगली सुनवाई, कोर्ट पहुंचीं पीड़िता

पिछले दो दिनों से अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई. अब कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है. सुनवाई के दौरान पीड़िता अनीता देवी भी कोर्ट रूम में मौजूद रहीं.

मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता डॉ. सुबोध कुमार झा ने कहा कि अदालत इस मामले की गंभीरता से सुनवाई कर रही है. उन्हें उम्मीद है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा.

वहीं, भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर में डीएसपी राजेश शर्मा का नाम सामने आने के बाद अनीता देवी ने कहा कि उनके बेटे के मामले में भी निष्पक्ष न्याय होना चाहिए. उन्होंने मांग की कि यदि जांच में कोई पुलिस अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े.

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