डॉक्टर बनने का सपना लेकर कभी NEET पास करने वाले कुछ मेडिकल छात्र अब उसी परीक्षा की साख पर सवाल खड़े करने वाले नेटवर्क का हिस्सा बन गए. बिहार में NEET री-एग्जाम के दौरान पुलिस ने जिस सॉल्वर गैंग का खुलासा किया है, उसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है. इस गैंग में ऐसे छात्र शामिल बताए जा रहे हैं जो देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं. कोई MBBS का छात्र है, कोई नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा है, तो कोई मेडिकल इंटर्नशिप कर रहा है. आरोप है कि ये लोग मोटी रकम लेकर असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे.
मामले में अब तक 24 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें पांच मेडिकल छात्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक कहानी की शुरुआत एक संदिग्ध व्यक्ति से हुई, जो परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में मौजूद था. उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ तो जांच शुरू हुई. बाद में उसकी पहचान पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के तृतीय वर्ष के MBBS छात्र मयंक कश्यप के रूप में हुई. जांच एजेंसियों को यहीं से पहली बड़ी सफलता मिली. पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने कई अन्य परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी की और देखते ही देखते पूरा नेटवर्क सामने आने लगा.
मेडिकल कॉलेज तक फैला था नेटवर्क
पुलिस ने लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर कार्रवाई की. जांच के दौरान कई ऐसे लोग पकड़े गए जिनकी पहचान और दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल उठे. बताया जा रहा है कि कुछ लोग दूसरे अभ्यर्थियों के नाम पर परीक्षा देने पहुंचे थे. कई मामलों में पहचान छिपाने और बायोमेट्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश किए जाने की भी आशंका जताई जा रही है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का दायरा सिर्फ बिहार तक सीमित था या फिर इसकी जड़ें दूसरे राज्यों तक भी फैली हुई हैं.
मेडिकल छात्र ही बन गए सॉल्वर
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन छात्रों ने खुद NEET जैसी कठिन परीक्षा पास कर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाया, वही अब दूसरे छात्रों के लिए सॉल्वर की भूमिका निभाते हुए पकड़े गए. गया स्थित ANMMCH के मेडिकल छात्र अर्पित राज को जांच एजेंसियां इस नेटवर्क का प्रमुख चेहरा मान रही हैं. अर्पित राज का नाम इससे पहले भी चर्चाओं में आ चुका है. पिछले वर्ष NEET पेपर लीक मामले की जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसियां उससे पूछताछ कर चुकी थीं. अब एक बार फिर उसका नाम सामने आने से जांच एजेंसियां पुराने मामलों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही हैं.
BHU, AIIMS और दिल्ली तक पहुंची जांच
मामले में जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, उनमें देश के नामी संस्थानों से जुड़े छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं. जांच में सामने आया कि BHU से जुड़ी एक नर्सिंग छात्रा दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ी गई. इसी तरह AIIMS रायबरेली से जुड़े छात्र सौरभ झा को भी गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र के एक मेडिकल कॉलेज से जुड़े इंटर्न अमन अग्रवाल का नाम भी जांच में सामने आया है. इसके अलावा नर्सिंग संस्थानों से जुड़े कुछ अन्य छात्रों की गिरफ्तारी भी हुई है.
मेडिकल कॉलेजों की कोशिश भी नाकाम
सूत्रों के मुताबिक NEET परीक्षा के दौरान कई मेडिकल कॉलेजों ने अपने छात्रों को परिसर से बाहर न जाने की सलाह दी थी. कुछ संस्थानों में छात्रों को व्यस्त रखने के लिए सेमिनार, शैक्षणिक गतिविधियां और क्विज कार्यक्रम तक आयोजित किए गए. इसके बावजूद कुछ छात्र कॉलेज से बाहर निकल गए. जांच में सामने आया कि एक आरोपी छात्र ने बीमारी का बहाना बनाकर कॉलेज छोड़ा और बाद में लखीसराय में पकड़ा गया. यह तथ्य भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के बीच NTA का बयान
सोशल मीडिया पर NEET 2026 को लेकर कई तरह के वीडियो और दावे भी वायरल हुए. इस पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट बयान जारी किया है. एजेंसी का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा एक वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उसमें किए गए दावे गलत हैं. NTA के अनुसार परीक्षा व्यापक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था के बीच सफलतापूर्वक आयोजित की गई. एजेंसी ने कहा है कि छात्रों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए तथा भ्रामक सामग्री को साझा करने से बचना चाहिए.
शशि भूषण कुमार