बिहार: बेतिया में लोहे का जर्जर पुल बना खतरे की घंटी, हादसे के डर में जी रहे गांव वाले

बेतिया के मझौलिया प्रखंड स्थित माधोपुर गांव में वर्षों पुराना लोहे का पुल अब ग्रामीणों के लिए खतरे का सबब बन गया है. पुल की जर्जर हालत को लेकर लोगों में दहशत है. कई बार शिकायत और मांग के बावजूद न तो मरम्मत हुई और न ही पुनर्निर्माण. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

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बेतिया में लोहे का जर्जर पुल बना खतरे की घंटी, डर में जी रहे गांव वाले (Photo: itg) बेतिया में लोहे का जर्जर पुल बना खतरे की घंटी, डर में जी रहे गांव वाले (Photo: itg)

अभिषेक पाण्डेय

  • बेतिया,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:32 AM IST

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित मझौलिया प्रखंड के माधोपुर गांव में बना पुराना लोहे का पुल अब ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गया है. वर्षों पहले निर्मित यह पुल वर्तमान में काफी जर्जर हो चुका है और इसकी हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. पुल से गुजरने वाले लोगों को हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है.

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बड़ी संख्या में इस पुल पर चलते हैं लोग

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. रोजाना बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं. लेकिन पुल की कमजोर होती संरचना और जगह-जगह दिखाई दे रहे नुकसान के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है.

ग्रामीणों ने बताया कि पुल की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सांसद और विधायक को अवगत कराया गया है. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों के आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है.

किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका

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ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है. ऐसे में पुल की जर्जर हालत किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है. लोगों ने प्रशासन से तत्काल तकनीकी जांच कराकर पुल के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है. इसके अलावा माधोपुर पंचायत के वार्ड संख्या-5 और 6 को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के निर्माण की मांग भी ग्रामीणों ने दोहराई है.

उनका कहना है कि सड़क और पुल दोनों की बदहाल स्थिति विकास कार्यों पर सवाल खड़े कर रही है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों की होगी. फिलहाल इलाके के लोग प्रशासन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं.
 

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