बिहार सरकार ने डिजिटल कृषि की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है. राज्य में अब तक 50 लाख से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है. सरकार का कहना है कि इस पहल से किसानों को डिजिटल पहचान मिलेगी. साथ ही किसानों को कृषि योजनाओं का लाभ सीधे तथा पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा.
राज्य में फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान का दूसरा चरण 12 मई से शुरू हुआ है, जो 30 जून तक चलेगा. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस विशेष अभियान की शुरुआत की थी. बता दें कि पहले चरण में 47 लाख 85 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया था.
कृषि विभाग के अनुसार, फार्मर आईडी बनने के बाद किसानों को खाद, बीज, कृषि ऋण और फसल सहायता जैसी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगा. सरकार का दावा है कि इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी.
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 4 करोड़ 54 लाख जमाबंदियां कायम हैं. अब तक 88 लाख 40 हजार किसानों की ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी है.जिनमें 50 लाख से अधिक किसानों की फार्मर आईडी तैयार की गई है. शेष किसानों को अभियान के जरिए जोड़ा जा रहा है.
अधिकारियों का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री से किसानों की जमीन और कृषि रिकॉर्ड का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा. इससे भूमि विवादों को कम करने में मदद मिलेगी और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड स्वतः अपडेट हो सकेंगे. किसानों को परिमार्जन या अन्य प्रक्रियाओं के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा.
सरकार इस पहल को कृषि प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल और ग्रामीण सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है. कृषि विभाग का कहना है कि डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध कराई जा सकेगी और सरकारी सहायता योजनाओं की निगरानी भी बेहतर होगी.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि फार्मर रजिस्ट्री अभियान किसानों के जीवन में “खुशहाली का नया दौर” लेकर आएगा और उन्हें सरकारी सहायता प्रणालियों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा.
रोहित कुमार सिंह