Drought Situation in UP: उत्तर प्रदेश में कम बारिश होने के चलते खरीफ की फसलों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है. सिर्फ विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के भी कई विधायक और सांसद पूर्वांचल और मध्य यूपी को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं. कई जनप्रतिनिधियों ने सीएम योगी को पत्र लिखकर अपने क्षेत्र के स्थितियों के बारे में अवगत कराया है.
सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग में आई तेजी
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार जून से अब तक तक प्रदेश में बारिश का आंकड़ा 50 फ़ीसदी से भी नीचे गिर चुका है. 10 सितंबर तक यूपी में सामान्य के मुकाबले महज 46% बारिश हुई है. 20 के ऊपर जिले ऐसे हैं जहां अब तक 40% से भी कम बारिश हुई है.
बीजेपी के सांसद जगदंबिका पाल ने तो पिछले दिनों लोकसभा में मांग की कि केंद्र सरकार सूखे का आकलन करने के लिए एक अध्ययन दल यूपी भेजें. बस्ती के बीजेपी सांसद हरीश त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर पूर्वांचल को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है.
भारतीय किसान यूनियन राजनीतिक के प्रदेश अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा ने सीएम योगी से पूरे यूपी को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सभी किसानों के पास सरकारी नलकूप या नहर के पानी की सिंचाई की सुविधा नहीं है.
एक्शन मोड में सरकार
वहीं अब स्थिति को देखते हुए योगी सरकार एक्शन मोड में आ चुकी है. प्रदेश में सूखे की स्थिति के सर्वेक्षण का आदेश दिया है. इसके लिए 75 जिलों में 75 टीमें बनाने का निर्देश दिया गया है. एक हफ्ते के अंदर सभी डीएम को सर्वेक्षण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देनी होगी. किसी भी तरह की लापरवाही होने पर इसके जिम्मेदार जिलाधिकारी होंगे.
लिए गए ये भी फैसले
सरकार के मुताबिक, 62 जिलों में औसत से कम बारिश हुई है. ट्यूबवेल के बिलों की वसूली भी नहीं की जाएगी. किसी का भी ट्यूबवेल कनेक्शन नहीं काटा जाएगा. जल्द से जल्द दलहन-तिलहन और सब्जी के बीज किसानों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, सिंचाई विभाग को नहरों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है. बिजली विभाग को भी बिजली की आपूर्ति बढ़ाने का आदेश दिया है, ताकि प्रभावित किसानों के सामने सिंचाई को लेकर कोई समस्या न आए.