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विश्व

ताइवान पर अधूरा रह जाएगा चीन का सपना, 'एक देश, दो व्यवस्था' खारिज

ताइवान पर अधूरा रह जाएगा चीन का सपना, 'एक देश, दो व्यवस्था' खारिज
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ताइवान पर हमेशा अपना कब्जा दिखाने वाले चीन को वहां के मतदाताओं ने झटका देते हुए राष्ट्रपति चुनाव में फिर से साई इंग वेन को राष्ट्रपति चुन लिया है. यह ताइवान की तरफ से चीन के अभियान को खारिज करने का संदेश भी माना जा रहा है.
ताइवान पर अधूरा रह जाएगा चीन का सपना, 'एक देश, दो व्यवस्था' खारिज
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दरअसल, ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव में मतदाताओं ने स्वशासित द्वीप ताइवान को अलग-थलग करने के चीन के अभियान को सिरे से खारिज कर दिया और अपनी प्रथम महिला नेता साई इंग वेन को दूसरी बार चुना है. इसके साथ ही नेता साई इंग वेन ने चीन को चेतावनी भी दे दी.
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चीन को दी साफ चेतावनी: 

जीत के बाद साई इंग वेन ने मीडिया से बातचीत करते हुए चीन को साफ चेतावनी दी कि ताइवान के मतदाताओं ने फिर से मुझे चुन लिया है और अब बीजिंग ताइवान के लिए खतरा बनना बंद कर दे. शांति का अर्थ यह है कि चीन ताइवान पर बल प्रयोग की धमकियां देना छोड़ दे.
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बाद साई इंग वेन ने अपनी जीत की घोषणा करते हुए मीडिया सम्मलेन में कहा कि ताइवान दुनिया को दिखा रहा है कि हम जीवन के अपने लोकतांत्रिक तरीके का कितना आनंद उठाते हैं और हम अपने देश को कितना पसंद करते हैं.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार शाम तक जारी वोटों की गिनती में उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी खान ग्वो यी 38 फीसदी मत ही हासिल कर सकी हैं.  कुओमिनटांग पार्टी की खान ग्वो ने अपने प्रचार में चीन के साथ तनाव कम करने का वादा किया था,जबकि डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की साई ने साफ किया था कि वह चीन से करीबी रिश्ते नहीं चाहती हैं.
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इसके बाद चुनाव मतदान में साई इंग विन को 57 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले हैं, उन्हें रिकॉर्ड स्तर पर 82 लाख मत प्राप्त हुए. इतने मतों के साथ उन्होंने कुओमिनटांग पार्टी के खान ग्वो यी को बहुत पीछे छोड़ दिया.
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साई इंग-वेन की जीत, दुनिया और ताइवान लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह चीन के साथ नजदीकी संबंधों का विरोध करती आई हैं. साई इंग वेन ने इसी महीने कहा था कि वो चीन के 'एक देश, दो व्यवस्था' वाले प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगी.
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चीन ने पेश किया था फार्मूला: 

चुनाव से पहले चीन ने ताइवान के सामने 'एक देश, दो व्यवस्था' का फॉर्मूला पेश किया था, जिसे ताइवान ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. इतना ही नहीं ताइवान के चुनावी कैंपेन में भी चीन का डर सबसे बड़ा मुद्दा था.
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चुनाव प्रचार के दौरान साई ने कहा था कि हांगकांग के लोगों ने हमें बता दिया है कि 'एक देश, दो व्यवस्था' एक नाकाम फॉर्मूला है और हम भी उसका विरोध करते हैं.
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क्या है चीन-ताइवान विवाद?
चीन 1949 में गृह युद्ध की समाप्ति के बाद से ही ताइवान पर अपना दावा करता आया है. एक ओर जहां ताइवान खुद को स्वतंत्र और संप्रभु मानता है, वहीं चीन का मानना है कि ताइवान को किसी भी तरह चीन में शामिल होना चाहिए.

(All Photos: Twitter & PTI)