स्टूडेंट पॉलिटिक्स से करिअर की शुरुआत करने वाले लालू यादव पहली बार इंदिरा गांधी के खिलाफ चली लहर में लोकसभा सासंद बने थे. लालू यादव 1973 में पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष बने थे. 1974 में उन्होंने जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे बिहार आंदोलन में हिस्सा लिया और करप्शन, बेरोजगारी और महंगाई का मुद्दा उठाया. तब केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी.
आंदोलन के दौरान लालू जनता पार्टी के नेता सत्येंद्र नारायण सिन्हा के करीब आए और उन्हें बिहार के छपरा से 1977 में लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया.
इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गई इमरजेंसी के खिलाफ तब इस कदर लहर थी बिहार की सभी 54 सीटों पर जनता पार्टी के सांसद चुने गए.
इमरजेंसी के दौरान मेंटेनेंस ऑफ इंटर्नल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) का दुरुपयोग करने का आरोप इंदिरा गांधी पर लगा. लालू यादव को भी अन्य नेताओं के साथ इसी कानून के तहत जेल भेजा गया. लालू जब जेल में थे, तभी उनकी बेटी हुई. लालू ने इसी कानून के नाम पर उसका नाम मीसा रख दिया.
1977 में लोकसभा सदस्य बने लालू तब लोकसभा में पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के सासंदों में से एक थे. तब उनकी उम्र 29 साल थी.
लोकसभा चुनाव जीतने से पहले लालू यादव को उनके क्षेत्र से बाहर कम ही लोग जानते थे और उन्होंने इससे पहले विधानसभा का कोई चुनाव भी नहीं लड़ा था.
बाद में जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद लालू जनता पार्टी-एस से जुड़ गए और उन्हें 1980 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, इसी साल हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में लालू ने जीत दर्ज कर ली.
बाद में जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद लालू जनता पार्टी-एस से जुड़ गए और उन्हें 1980 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, इसी साल हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में लालू ने जीत दर्ज कर ली.
बाद में जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद लालू जनता पार्टी-एस से जुड़ गए और उन्हें 1980 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, इसी साल हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में लालू ने जीत दर्ज कर ली.
अपनी राजनीति से गरीबों को ताकत देने, उनकी भाषा बोलने सहित अन्य वजहों से लालू गरीबों के बेहद करीब दिखने लगे.