जापान में एटम बम के बाद सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी 1995 में हुई थी. इसका कारण बना था एक बाबा. (फोटो: AP)
अब उस बाबा शोको अशाहारा और उसके 6 अनुयायियों को फांसी दे दी गई है. (फोटो: GETTY)
पिछले 14 साल से ये सभी जेल में बंद थे. (फोटो: GETTY)
इन पर जापान की राजधानी टोक्यो में वर्ष 1995 में ज़हरीली गैस सरिन से हमला करने का दोष था. (फोटो: GETTY)
'ओम शिंरिक्यो' डूम्सडे पंथ के नेता शोको असहारा को उसके 6 अनुयायियों को शुक्रवार दी गई. (फोटो: GETTY)
जापान की सबसे बड़ी आतंकी घटनाओं में से एक इस हमले में 13 लोग मारे गए थे और हज़ारों घायल हुए थे. (फोटो: AP)
घायल लोगों से कई आज भी इस गैस की वजह से मानसिक और शारीरिक रूप से दिक्कत का सामना कर रहे हैं. (फोटो: GETTY)
इनके अनुयायियों ने सरिन गैस से भरे बैग सबवे स्टेशन पर रख दिए थे. इसके वे लोग छाते की नोक से बैग में छेद कर फरार हो गए थे. (फोटो: GETTY)
इस पंथ के 8 आरोपी अब भी मौत की सजा पाकर जेल में बंद हैं. (फोटो: GETTY)
हमले के बाद लोग खांसते उलटी करते हुए स्टेशन से बाहर निकले थे. हेलिकॉप्टर को सड़क पर उतारकर लोगों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया गया था.
हमले के दो महीने बाद माउंट फूजी के पास से मुख्य आरोपी शोको असहारा को गिरफ्तार किया गया था.
उस दौरान दावा किया गया था कि इस पंथ के 10हजार अनुयायी जापान में और 30 हजार रूस में हैं.
साल 2000 में इस पंथ का नाम बदलकर असेल्फ रख दिया गया,लेकिन कभी इस पर बैन नहीं किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार दिमागी चोट से ब्लाइंड हो चुके इस बाबा के प्रवचनों का असर उसके अनुयायियों पर काफी ज्यादा होता था.