सोशल मीडिया के जरिए फैलाई जा रही सांप्रदायिक नफरत के बीच गंगा-जमुनी के उदाहरण अक्सर सामने आते रहते हैं. ऐसा ही एक नया उदाहरण असम के एक मस्जिद का सामने आया है. जो देशभर में मिसाल बन रहा है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार असम की इस मस्जिद में बाकी धर्मों और उनकी किताबों को बराबर सम्मान दिया गया है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
इस मस्जिद की लाइब्रेरी की तारीफ पूरे सोशल मीडिया पर हो रही है. इस लाइब्रेरी में सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल देखने को मिली है. यह मस्जिद है असम के काचर जिले में स्थित जामा मस्जिद. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
असम के काचर जिले में स्थित जामा मस्जिद के दूसरे फ्लोर पर यह लाइब्रेरी स्थित है . इसमें करीब एक दर्जन अलमारियां हैं.
इस लाइब्रेरी में हिंदू, इस्लाम और ईसाई धर्म से जुड़ी 300 किताबें हैं. ये सभी बांग्ला भाषा में हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
मीडिया रिपोर्ट में मस्जिद के सचिव सबीर अहमद चौधरी के हवाले से कहा गया है कि उन्हें इस सुविधा पर हमें गर्व है और उनका मकसद मुस्लिमों को अन्य धर्म के बारे में शिक्षित करना है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
यहां की लाइब्रेरी में कुरान, इस्लाम धर्म से जुड़ी किताबों के आलावा ईसाई दर्शन, वेद, उपनिषद, रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद की बायोग्राफी और रविंद्रनाथ टैगोर व सरत चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास भी मौजूद हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
चौधरी ने कहा कि वे 1948 में इस मस्जिद के निर्माण के समय से ही लाइब्रेरी
बनाना चाहते थे, लेकिन 2012 में जाकर सपना पूरा हुआ है. चौधरी आजादी के
समय चिंतक एमएन रॉय के विचारों से प्रभावित थे.
चौधरी सोनाई स्थित एमसीडी कॉलेज में अंग्रेजी के एचओडी हैं. चौधरी ने बताया कि इस लाइब्रेरी में हर उम्र और धर्म के लोग आते हैं. उनके अनुसार आसपास किसी मस्जिद में लाइब्रेरी नहीं है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)