धुबरी (Dhubri), असम राज्य का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिला एवं नगर है, जो भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है. यह शहर ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर बसा हुआ है और असम का एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र माना जाता है. धुबरी पश्चिमी असम का प्रवेश द्वार भी कहलाता है, क्योंकि यह बांग्लादेश की सीमा के काफी निकट स्थित है.
धुबरी का ऐतिहासिक महत्व बहुत पुराना है. माना जाता है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल में कामरूप राज्य का हिस्सा था. यहां गुरु तेग बहादुर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित उमानंद (मधुपुर) द्वीप धुबरी का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जिसे भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. यह द्वीप पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है.
धुबरी सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है. यहां असमिया, बंगाली, बोडो, हिंदी और उर्दू भाषाएं बोली जाती हैं. विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग यहां आपसी सौहार्द के साथ रहते हैं. ईद, दुर्गा पूजा, बिहू और छठ जैसे पर्व यहां बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं, जो इस क्षेत्र की सामाजिक एकता को दर्शाते हैं.
आर्थिक रूप से धुबरी कृषि आधारित जिला है. यहां धान, जूट, सरसों और सब्जियों की खेती प्रमुख रूप से की जाती है. ब्रह्मपुत्र नदी के कारण मत्स्य पालन भी स्थानीय लोगों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है. इसके अलावा, नदी मार्ग से व्यापार भी धुबरी की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है.
शिक्षा के क्षेत्र में भी धुबरी निरंतर प्रगति कर रहा है. यहां कई विद्यालय, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान स्थित हैं, जो आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं.
असम के धुबरी में मानव तस्करी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. बांग्लादेशी महिला ने आरोप लगाया है कि उसे नौकरी का झांसा देकर भारत लाया गया और बाद में दिल्ली में बेच दिया गया. पीड़िता किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर असम पहुंची और अपने देश बांग्लादेश लौटने की गुहार लगा रही है.