बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल अष्टमी को मनाई जाती है. देवी बगलामुखी को समर्पित है, जिन्हें दश महाविद्याओं में आठवीं शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है. इस दिन साधक विशेष रूप से देवी की कृपा पाने के लिए उपवास, मंत्र जप, हवन और तंत्र साधना करते हैं.
देवी बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और रहस्यमय होता है. उनका पीला रंग उन्हें ‘पीताम्बरा’ भी कहलाता है. एक हाथ में वह शत्रु की जिह्वा पकड़ती हैं और दूसरे से गदा चलाती हैं, जो यह दर्शाता है कि वे वाणी और बुद्धि पर नियंत्रण प्रदान करती हैं. वे न केवल शत्रुओं को परास्त करती हैं, बल्कि वाद-विवाद में विजय, न्यायालय में सफलता, और मानसिक शांति भी प्रदान करती हैं.
बगलामुखी साधना विशेष रूप से न्यायिक मामलों, राजनीतिक संघर्ष, शत्रु बाधा, तंत्र-मंत्र प्रभाव से सुरक्षा और वाक्सिद्धि के लिए की जाती है. ऐसा माना जाता है कि बगलामुखी माता की उपासना करने से व्यक्ति शत्रुओं को वश में कर सकता है और आत्मबल बढ़ाता है.
जयंती पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं. इस दिन श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते और देवी पीले फूलों से पूजा करते हैं, साथ ही कुछ पीला फल और मिठाई प्रसाद में अर्पित करत हैं.
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश के दतिया स्थित मां बगलामुखी के दर्शन किए. उन्होंने वनखंडेश्वर महादेव की पूजा भी की. गौतम गंभीर की पीतांबरा पीठ में गहरी आस्था है और वह अक्सर यहां आते रहते है.
माता बगलामुखी की जयंती बैसाख महीने की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, जो इस बार 24 अप्रैल को है. पीला रंग माता के स्वरूप और तांत्रिक साधना में विशेष महत्व रखता है, जो ज्ञान, स्थिरता और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का प्रतीक है.
माता बगलामुखी जयंती वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, जो देवी के प्राकट्य का दिन है. देवी का स्वरूप पीले रंग का है और वे असुर मदन की जीभ पकड़ती हैं, जो वाक् सिद्धि वरदान के दुरुपयोग का प्रतीक है.