Vinesh Phogat Disqualified Wrestling Rules: भारतीय महिला रेसलर विनेश फोगाट के लिए बुधवार (7 अगस्त) का दिन बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहा. जबकि इससे ठीक एक दिन पहले ही उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों के लिए गोल्ड जीतने की उम्मीद जगाई थी. मगर फाइनल से ठीक पहले वो 100 ग्राम ज्यादा वजन के कारण अयोग्य करार दी गईं और बाहर हो गईं.
विनेश इस पेरिस ओलंपिक में 50 किग्रा वेट कैटेगरी में उतरी थीं. उन्होंने मंगलवार को सेमीफाइनल जीता था. तब तक उनका वजन 50 किग्रा ही था. इसके बाद बुधवार को उन्हें फाइनल खेलना था. तब नियम के हिसाब से फाइनल से पहले विनेश का वजन किया या तो वो 100 ग्राम ज्यादा पाया गया.
इसी बीच सोशल मीडिया और इसके इतर लोग कह रहे हैं कि विनेश को वजन कराने से मना कर देना था. ऐसा करते ही विनेश को फाइनल में हार मिलती और उन्हें कम से कम सिल्वर मेडल तो मिल ही जाता. मगर यह सिर्फ लोगों की बातें हैं. आइए जानते हैं क्या यह सच है और इसकी हकीकत क्या है?
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वजन कराने से मना करतीं विनेश तो क्या होता?
यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के नियमों को देखा जाए तो विनेश के पास वजन कराने के अलावा कोई दूसरा ऑप्शन था ही नहीं. नियम में साफ शब्दों में लिखा है कि मैच से पहले हर एक पहलवान को वजन कराना ही होता है. इसमें किसी प्रकार की छूट नहीं होती है.
यदि कोई एथलीट पहले या दूसरे, दोनों बार में भी वज़न नहीं करवाता तो भी उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता है. साथ ही उसे बिना कोई रैंक दिए आखिरी स्थान पर रखा जाता है. इस हिसाब से यदि विनेश वजन कराने से मना करतीं तब भी उन्हें अयोग्य ही करार दिया जाता.
एक मामले में पहलवान को वजन कराने वाले मामले में छूट मिलती है. यह मामला मेडिकल कंडीशन का है. यदि कोई पहलवान मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करता है, जिसमें लिखा हो कि वो रेसलर अपना मैच नहीं खेल सकता है, तभी वो वजन से छूट पा सकता है.
रेसलिंग में क्या है वजन का नियम?
दरअसल, रेसलिंग में वेट कैटेगरी होती हैं. यानी कि एक पहलवान को मैच में अपने बराबर वजन के ही रेसलर से भिड़ना होता है. जैसे विनेश 50 किग्रा वेट कैटेगरी में उतरी थीं. ऐसे में विनेश और सामने वाली रेसलर दोनों का वजन 50 किग्रा ही होना चाहिए था. इस खेल में नियम बनाने का अधिकार UWW का है.
UWW का आर्टिकल 11 कहता है- मैच में एंट्री से पहले टीम के लीडर को 'फाइनल एथलीट्स' का नाम देना होता है, जो मुकाबले में लड़ेगा. इसकी जानकारी पहले से देनी होती है. हर मैच से पहले खिलाड़ी का वजन किया जाता है. वजन का ब्योरा मैच से एक दिन पहले 12वें घंटे तक जमा करना होता है. अपनी वेट कैटेगरी के अलावा दूसरे वेट कैटेगरी के पहलवान से मैच नहीं होता.
वजन के दौरान कौन से कपड़े पहनते हैं?
नियम के मुताबिक, जो एथलीट वजन के अनुरुप नहीं होता, उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाता है. इसके अलावा यदि कोई एथलीट पहले या दूसरे, दोनों बार में भी वज़न नहीं करवाता तो भी उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता है. साथ ही उसे बिना कोई रैंक दिए आखिरी स्थान पर रखा जाता है.
वज़न करवाने के दौरान सिर्फ एक ही पोशाक जिसे 'सिंगलेट' कहा जाता है, सिर्फ वही पहनने की इजाज़त होती है. वज़न के दौरान प्रतियोगी के नाखून भी ठीक से कटे होने चाहिए. पूरे वज़न प्रक्रिया के दौरान रेसलर्स जितनी बार चाहें, वज़न करवा सकते हैं.
इस तरह समझें पहलवानों की वजन प्रक्रिया...
- जिस दिन मुकाबला होता है उस दिन सुबह पहलवान का वजन होता है. हर एक वेट कैटेगरी के मुकाबले दो दिन तक चलते हैं. ऐसे में यदि कोई रेसलर फाइनल या रेपचेज में पहुंचता है तो दोनों दिन उसका वजन किया जाता है.
- पहले वजन के दौरान रेसलर्स के पास 30 मिनट का समय होता है. इस दौरान वे जितनी बार चाहे उतनी बार स्केल पर जा सकते हैं. वजन के दौरान पहलवान केवल खेलने की पोशाक ही पहनते हैं. इस दौरान एथलीट्स की स्वास्थ्य जांच भी होती है जिसमें देखा जाता है कि उन्हें कोई संक्रामक बीमारी तो नहीं है. उनके नाखून भी कटे हुए होने चाहिए.
- दूसरे दिन खेलने वाले पहलवानों के पास वजन के लिए 15 मिनट का समय होता है.