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यूरोपियन लीग में खेलने वाला यह इकलौता भारतीय गोलकीपर बनना चाहता था क्रिकेटर

गुरप्रीत ने कहा, 'ईमानदार से कहूं तो मैंने फुटबॉल से नहीं बल्कि क्रिकेट के साथ शुरुआत की थी. मैंने अपने पिता की वजह से क्रिकेट खेलना शुरू किया, वह क्रिकेट के बड़े फैन हैं और मैं मोहाली में पीसीए स्टेडियम के काफी करीब रहता हूं.'

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गुरप्रीत सिंह संधू
गुरप्रीत सिंह संधू

गुरप्रीत सिंह संधू भारतीय फुटबॉल की बड़ी दीवार हैं. वह भारत के नंबर 1 गोलकीपर और यूरोपियन लीग में खेले जाने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी हैं. 26 साल की उम्र में गुरप्रीत ने बहुत सी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं.

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फुटबॉल वह पहला खेल नहीं था, जिसमें उन्होंने अपना हाथ आजमाने की कोशिश की थी. क्योंकि गुरप्रीत सिंह का पहला लक्ष्य क्रिकेटर बनना था. 6 फीट 4 इंच के गुरप्रीत सिंह दरअसल बल्लेबाज बनना चाहते थे.

इतना ही नहीं गुरप्रीत जब अपने गृह नगर मोहाली में 3-4 दिनों के लिए क्रिकेट खेलने वाली अकादमी में थे, तो फुटबॉल की बजाय उन्होंने क्रिकेट खेलने का फैसला किया और उन्होंने तय किया कि यह उनके लिए मजाक बिलकुल नहीं है.

गुरप्रीत ने कहा, 'ईमानदार से कहूं तो मैंने फुटबॉल से नहीं बल्कि क्रिकेट के साथ शुरुआत की थी. मैंने अपने पिता की वजह से क्रिकेट खेलना शुरू किया, वह क्रिकेट के बड़े फैन हैं और मैं मोहाली में पीसीए स्टेडियम के काफी करीब रहता हूं.'

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इंडिया टुडे के साथ बात करते हुए गुरप्रीत ने कहा, 'मैं बल्लेबाज बनना चाहता था, लेकिन कोच ने मुझ में यह नहीं देखा. उन्होंने (पिता ने) मुझे अकादमी में प्रवेश कराने में मदद की लेकिन पहले 3-4 दिनों ने मुझे बहुत उत्साहित नहीं किया.'

गुरप्रीत ने कहा, 'जब यह खेल आपके लिए मजेदार नहीं है, तो आप यह नहीं खेल सकते हैं और फुटबॉल मेरे लिए बहुत मजेदार था.'

गुरप्रीत पहले ऐसे भारतीय खिलाड़ी नहीं हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत जो वह खेलना चाहते थे उससे अलग खेल के साथ की है. पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी इसका बड़ा उदाहरण हैं.' वास्तव में धोनी एक फुटबॉल गोलकीपर बनना चाहते थे.

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