भारत के पूर्व टेस्ट विकेटकीपर किरण मोरे को अमेरिका ने अपनी क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है. मोरे श्रीलंका के पुब्दु दसानायके का स्थान लेंगे. दसानायके का कार्यकाल मार्च 2019 में खत्म हो गया था. उनके कार्यकाल को हालांकि दिसंबर-2019 तक के लिए बढ़ा दिया गया था.
दसानायके के मार्गदर्शन में टीम ने हांग कांग को 84 रनों से मात दे वनडे में अंतरराष्ट्रीय टीम का दर्जा हासिल किया था. मोरे ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मुंबई इंडियंस के साथ विकेटकीपिंग सलाहकार के तौर पर काम किया है.
मोरे के अलावा अमेरिका ने भारत के ही सुनील जोशी को अपनी टीम का स्पिन गेंदबाजी सलाहाकार नियुक्त किया है और प्रवीण आमरे तथा केरन पावेल को बल्लेबाजी सलाहकार बनाया है.
मोरे ने नहीं लगाया एक भी शतक, औसत 13 का
भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज किरण मोरे ने अपने इंटरनेशनल करियर में एक भी शतक नहीं लगाया. उन्होंने 94 वनडे मैच खेले, जिसमें 13.09 की औसत से कुल 563 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने एक भी शतक या अर्धशतक नहीं लगाया. वनडे में उनका उच्च स्कोर 42 रन है.
वहीं, टेस्ट करियर में उन्होंने 49 मैच खेले और 25.70 की औसत से 1285 रन बनाए. इसमें उनके 7 अर्धशतक शामिल हैं, जबकि टेस्ट में भी वो एक भी शतक नहीं बना पाए.
3 टेस्ट में लपके थे 16 कैच
मोरे को 1986 के इंग्लैंड टूर के लिए याद किया जाता है. इस क्रिकेट टूर पर खेले गए 3 टेस्ट मैचों में मोरे ने 16 कैच लपककर तहलका मचा दिया था और टीम इंडिया के नंबर एक विकेटकीपर बन गए थे.
1984 में किया था डेब्यू
सितंबर, 1962 में गुजरात के बड़ौदा में जन्मे किरण मोरे ने टीम इंडिया के लिए इंटरनेशनल लेवल पर विकेटकीपिंग कर चुके हैं. मोरे ने 1984 में पुणे में खेले गए इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच में डेब्यू किया था. उन्होंने टीम इंडिया के लिए 94 वनडे इंटरनेशनल खेले और मार्च, 1993 में वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया.
इसके अलावा उन्होंने 1986 में लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया और भारत के लिए 49 टेस्ट मैच खेले. इसके बाद अगस्त 1993 में उन्होंने टेस्ट को अलविदा कह दिया.
बीसीसीआई ने कर दिया था बैन
2002 में उन्हें 4 साल के लिए टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता के रूप में चुना गया. लेकिन 2007 में ही उन्होंने इस पद को त्याग दिया और आईसीएल ( इंडियन क्रिकेट लीग) से नाता जोड़ लिया. मोरे की इस हरकत से बीसीसीआई आग बबूला हो गया और उन्हें बैन कर दिया. हालांकि, 2012 में उनके ऊपर से बीसीसीआई का बैन हटा और उन्हें बोर्ड (बीसीसीआई) में काम करने के लिए योग्यता प्राप्त हुई.