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Exclusive: गगनयान सात दिन नहीं, तीन दिन लगाएगा धरती के चक्कर

Gaganyaan Earth Orbit: पहले ISRO की योजना थी कि गगनयान में तीन अंतरिक्षयात्री सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में धरती के चारों तरफ चक्कर लगाएंगे. फिलहाल इसे तीन दिन तक धरती के ऊपर चक्कर लगाने के लिए तैयार किया जा रहा है. अंतरिक्षयात्रियों की संख्या में भी कटौती हो सकती है. ISRO ने 13 मई 2022 को आंध्र प्रदेश में स्थित श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में ह्यूमन रेटेड सॉलिड रॉकेट बूस्टर यानी HS200 का सफल परीक्षण किया था.

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ये है गगनयान का क्रू मॉड्यूल जिसमें बैठकर अंतरिक्षयात्री धरती का चक्कर लगाएंगे. यह गगनयान के आकार का ओरिजिनल मॉडल है. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)
ये है गगनयान का क्रू मॉड्यूल जिसमें बैठकर अंतरिक्षयात्री धरती का चक्कर लगाएंगे. यह गगनयान के आकार का ओरिजिनल मॉडल है. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कितने गगननॉट्स जाएंगे अंतरिक्ष में यह फैसला बाकी
  • तीन अंतरिक्षयात्री के बजाय दो या एक भी हो सकता है

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की पहले योजना थी कि वो अपने पहले ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन (First Human Spaceflight Mission) के दौरान गगनयान (Gaganyaan) से भारतीय अंतरिक्षयात्रियों को धरती के चारों तरफ सात दिन चक्कर लगवाएंगे. लेकिन अब इस योजना बदलाव आ रहा है. अभी की स्थितियों के मुताबिक गगनयान को सिर्फ तीन दिन के लिए धरती के चारों तरफ चक्कर लगाने के लिए छोड़ा जाएगा. 

ह्यूमन स्पेसफ्लाइट सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने नाम न छापने की शर्त पर ये जानकारी दी. उन्होंने कहा कि गगनयान को फिलहाल तीन दिन अंतरिक्ष में भेजने की प्लानिंग है. लगातार इस मिशन में डेवलपमेंट हो रहे हैं. कई बार कमियां भी मिलती हैं, उन्हें ठीक किया जाता है. ये भी हो सकता है कि इस मिशन में तीन के बजाय दो या एक ही अंतरिक्षयात्री जाए. 

टॉयलेट से लेकर सांस लेने तक की तकनीक की हो रही जांच

वैज्ञानिक ने बताया कि फिलहाल जो गगनयान का मॉडल लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया है, वो आकार में असली गगनयान के बराबर है. लेकिन उसके अंदर की तकनीक, बैठने की व्यवस्था, टॉयलेट, खाने-पीने का अरेंजमेंट, सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की प्रणाली, नेविगेशन सिस्टम आदि सबकुछ बदला जा सकता है. गगनयान धरती से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित लोअर अर्थ ऑर्बिट में हमारे नीले ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. 

आप इस तस्वीर में खड़े इस व्यक्ति के आकार से गगनयान के आकार का अंदाजा लगा सकते हैं. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)
आप इस तस्वीर में खड़े इस व्यक्ति के आकार से गगनयान के आकार का अंदाजा लगा सकते हैं. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

इस मिशन में गलती की कोई गुंजाइश नहींः इसरो वैज्ञानिक

वैज्ञानिक ने बताया कि यह मिशन ऐसा है कि इसमें किसी तरह की गलती स्वीकार नहीं की जा सकती. क्योंकि हम अपनी भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के काबिल पायलटों को इसमें भेजेंगे. उनकी जान कीमती है. उन्हें भेजने से पहले इस मिशन के कई परीक्षण होंगे. अगले साल लॉन्चिंग की तैयारी है लेकिन यह आगे-पीछे हो सकता है. क्योंकि इस मिशन में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है. हम किसी तरह की गलती नहीं करना चाहते. 
 
कुछ हफ्ते पहले ही हुआ था नए बूस्टर का टेस्ट

ISRO ने 13 मई 2022 को आंध्र प्रदेश में स्थित श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में ह्यूमन रेटेड सॉलिड रॉकेट बूस्टर यानी HS200 का सफल परीक्षण किया था. इस बूस्टर को जीएसएलवी-मार्क3 (GSLV-MK3) रॉकेट के एस200 बूस्टर की जगह लगाया जाएगा. इस बूस्टर के और भी टेस्ट होने हैं. इससे पहले इसरो ने 14 जुलाई 2021 विकास इंजन लॉन्ग ड्यूरेशन हॉट टेस्ट का तीसरा सफल परीक्षण किया. यह इंजन GSLV-MkIII रॉकेट के लिक्विड स्टेज में लगाया जाएगा.  

तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में हुए HS200 रॉकेट बूस्टर की टेस्टिंग की तस्वीर. (फोटोः ISRO)
तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में हुए HS200 रॉकेट बूस्टर की टेस्टिंग की तस्वीर. (फोटोः ISRO)

विकास इंजन के सहारे अंतरिक्ष में जाएगा गगनयान

तमिलनाडु स्थित महेंद्रगिरी में इसरो के प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (ISRO Propulsion Complex - IPRC) में विकास इंजन को 240 सेकेंड्स चलाया गया. इस ट्रायल में इंजन ने तय मानकों पर खुद को खरा साबित किया. इसने सारे संभावित गणनाओं को पूरा किया और बेहतर तरीके से परफॉर्म करके दिखाया. आपको बता दें कि इसी इंजन को रॉकेट अलग-अलग स्टेज में लगाया जाएगा, जो गगनयान कैप्सूल को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा. 

बेंगलुरू स्थित सेंटर पर चल रही है गगननॉट्स की ट्रेनिंग

गगनयान (Gaganyaan) के लिए भारतीय वायुसेना के चार पायलटों ने रूस में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है. इन्हें मॉस्को के नजदीक जियोजनी शहर में स्थित रूसी स्पेस ट्रेनिंग सेंटर में एस्ट्रोनॉट्स बनने का प्रशिक्षण दिया गया था. गैगरीन कॉस्मोनॉट्स ट्रेनिंग सेंटर में भारतीय वायुसेना के पायलटों की ट्रेनिंग हुई थी. भारतीय वायुसेना के चार पायलट जिनमें एक ग्रुप कैप्टन हैं. बाकी तीन विंग कमांडर हैं, उन्हें गगनयान के लिए तैयार किया जा रहा है. फिलहाल इन्हें बेंगलुरू में गगनयान मॉड्यूल की ट्रेनिंग दी जाएगी.

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