हनुमान गढ़ी का लोकतंत्र-
इस गढ़ी में आने वाले सदस्य को मत देने का अधिकार ऐसे ही नहीं मिल जाता है. इस अधिकार को पाने के लिए उसे एक निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होता है. शिक्षा-दीक्षा के लिए गढ़ी में आने वाले को सादिक चेला या साधक शिष्य कहते हैं. साधु बनने से पहले उसे छोरा बनना पड़ता है, फिर बारी-बारी से बंदगीदार, हुरदंगा, मुरेठिया, नगा और प्रतिश्रेणी नगा. प्रतिश्रेणी नगा हो जाने के बाद वह गढ़ी का सदस्य हो जाता है और उसे मताधिकार मिल जाता है.