वैसे तो यह कोई नई बात नहीं है कि देश की एकता अखंडता का दुश्मन पाकिस्तान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की बातों को अपने हित लाभ के लिए कोट करता रहा है. पर अब मामला कुछ ज्यादा होता जा रहा है. खालिस्तानी गुर पतवंत के बाद अब पाक रक्षा मंत्री को राहुल गांधी के सुर में अपनी आवाज दिख रही है. अनुच्छेद 370 को लेकर पाक रक्षामंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू और कश्मीर में कई सालों के बाद चुनाव हो रहे हैं. पाकिस्तान के लिए निराशा वाली बात यह है कि कश्मीर में चुनाव न केवल शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहा है बल्कि इतने बड़े पैमाने पर वोट डाले गए हैं जितनी किसी को उम्मीद नहीं थी. बल्कि कश्मीर में वोट का परसेंटेज इतना है जितना पूरे देश में किसी और राज्य में नहीं होता है. जाहिर है ऐसे माहौल में पाकिस्तान को मिर्ची लगनी तय है. पर एक सवाल यह भी उठता है कि कांग्रेस या विपक्ष का कोई भी नेता इस तरह का बयान दे ही क्यों , जिसका लाभ अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत के दुश्मन उठाएं. फिलहाल पाक रक्षामंत्री के बयान भारत में राजनीति गर्म हो गई है. गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस को इसके लिए निशाने पर लेते हुए हमला बोला है.
1- पहले गुर पतवंत पन्नू अब पाक रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के सुर में सुर मिलाया
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि 370 की बहाली पर पाकिस्तान कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ है. जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि हम अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस गठबंधन के रुख से सहमत हैं. 'मेरा खयाल है कि ये संभव है. कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों की ही महत्वपूर्ण मौजूदगी है. इस इश्यू पर मुझे लगता है कि वादी यानि कश्मीर घाटी की जनता बहुत मोटिवेट हुई है, वादी के बाहर भी. बहुत चांस है कि वह सत्ता में आएं. उन्होंने स्टेटस रिस्टोर होना चाहिए, इसे इलेक्शन का मुद्दा बनाया हुआ है. अगर स्टेटस रिस्टोर हुआ तो, मैं समझता हूं कि कश्मीरी लोगों को जो जख्म मिला है उसमें कुछ मरहम लगेगा.' जाहिर है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र से जो ऊर्जा मिली है.
नेशनल कांन्फ्रेंस के घोषणापत्र में कश्मीर में धार 370 को फिर से लागू करने का वादा किया गया है. चूंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस का गठबंधन इस बार के चुनावों में कांग्रेस के साथ है इसलिए जाहिर है इस 370 हटाने की बात को बल मिलेगा. क्योंकि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है. और देश में कभी सरकार बनती है तो वो कांग्रेस के ही नेतृत्व में बन सकती है. हालांकि कांग्रेस ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ संसद में जमकर मोर्चा खोला था . पर बाद में इस मुद्दे पर कांग्रेस ने चुप्पी साध ली. इस बार के जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में 370 को हटाए जाने का वादा नहीं किया है. फिर भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन के चलते बीजेपी लगातार मांग कर रही है कि 370 को लेकर कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे.
केवल 370 ही नहीं सिखों के उत्पीड़न के मुद्दे पर भी राहुल गांधी ने अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान जिस तरह की बातें की हैं उससे भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हुईं हैं. राहुल गांधी का यह कहना कि भारत में सिखों को पगड़ी पहनने और कड़ा धारण करने में दिक्कत होती है कांग्रेस के लिए सेल्फ गोल ही है. राहुल गांधी के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खालिस्तानियों के लिए खाद पानी मिला है. आखिर भारत के लोकप्रिय सदन के विपक्ष का नेता अगर इस तरह की बात करता है तो जाहिर है कि भारत विरोधियों की बातों पर मुहर लग जाएगी. हुआ भी यही. राहुल गांधी के सिखों के उत्पीड़न वाले बयान के बाद कुख्यात खालिस्तानी गुर पतवंत पन्नू ने कहा जो मैं कहता रहा हूं उसे राहुल गांधी भी कह रहे हैं . इसका सीधा मतलब है कि भारत में सिखों का उत्पीड़न हो रहा है.
2- पहले भी यही गलतियां करके कांग्रेस ने पाकिस्तान को भारते के खिलाफ आग उगलने का दिया था मौका
2019 सितंबर में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने न्यूयॉर्क में UNGA सत्र के मौके पर कांग्रेस का हवाला देकर भारत में कश्मिरियों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाय़ा था. उन्होंने कहा कि भारत में कांग्रेस पार्टी ने भी कहा है कि गरीब लोगों को 50 दिनों से अंदर बंद रखा गया है. किसी को नहीं पता कि राजनीतिक कैदियों के साथ क्या हो रहा है. पाकिस्तान उसी दौरान भारत विरोधी दस्तावेजों में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के बयानों को शामिल किया था.
इस दस्तावेज़ में राहुल गांधी द्वारा भारत के जम्मू-कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले के बाद की गई टिप्पणियों को उद्धृत किया गया था, जहां उन्होंने जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों की आलोचना की थी और भारतीय सरकार पर संदेह व्यक्त किया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए इमरान खान ने भारत पर एक और हमला किया था और कहा था कि पूर्व कांग्रेस गृह मंत्री ने बयान दिया था कि आरएसएस के शिविरों में आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. 2013 में, तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बीजेपी और आरएसएस पर हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था.
3-बीजेपी के अति राष्ट्रवाद के मुकाबले में कांग्रेस ने पकड़ ली वामपंथ की राह?
दरअसल जब तक भारत में बीजेपी का उभार नही्ं हुआ था कांग्रेस राष्ट्रवादी पार्टी ही हुआ करती थी. इसलिए ऐसी गलतियां नहीं करती थी जिससे भारत के दुश्मन देश उसका लाभ उठा सकें. पर बीजेपी के उभार के बाद कांग्रेस वामपंथियों के प्रभाव में होती गई. विशेषकर सोनिया गांधी के प्रभाव में आने के बाद कांग्रेस पार एंटी हिंदू तक का ठप्पा लग गया. 2014 में कांग्रेस की करारी हार के कारणों का पता लगाने के लिए एके एंटनी की अध्यक्षता में जो कमेटी बनाई गई उसने भी जो रिपोर्ट दिया था वो यही था कि पार्टी की छवि एंटी हिंदू हो रही है.यह संयोग नहीं है कि जिन राज्यों में बीजेपी आज तक मजबूत नहीं हुई वहां पर हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कांग्रेस के लिए हुआ करता है. पंजाब और केरल इसका जीता जागता उदाहरण है. कांग्रेस के हिंदू वोटों के बिखराव से बीजेपी मजबूत होती गई. और कांग्रेस में वामपंथी विचारों वालों का रोल बढ़ता गया. सैम पित्रोदा के समान संपत्ति वितरण जैसे बयानों को हम इसी तर्ज पर ले सकते हैं. अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करना या सिख उत्पीड़न की बात करके खालिस्तानी आतंकियों को खाद पानी मुहैया कराना भी इसी रणनीति का हिस्सा है.